Tue Sep 29, 2026 | 08:13 PM IST

Medically Reviewed by Dr Sunil Kumar K , Pulmonology

फेफड़ों के लिए Vitamin D क्यों जरूरी है? खुद एक्सपर्ट से जानें

विटामिन D इम्यून रिस्पॉन्स को कंट्रोल करने करने के लिए जरूरी है। ऐसे में जब शरीर में विटामिन डी की कमी होती है तो आपको फेफड़ों से जुड़े इंफेक्शन और बीमारियां ज्यादा परेशान कर सकती हैं। आइए, जानते हैं इस बारे में डॉक्टर की राय।
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विटामिन D हड्डियों की सेहत और कैल्शियम को सोखने में अपनी भूमिका के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है, लेकिन इम्यून सिस्टम में भी इसके अहम काम हैं। इसलिए Dr. Sunil Kumar K, Lead Consultant - Interventional Pulmonology, Aster CMI Hospital, Bangaluru कहते हैं कि जब फेफड़े किसी इंफेक्शन के शिकार होते हैं तो आपका इम्यून सिस्टम ही है जो इससे लड़ सकता है और इम्यून सिस्टम की मजबूती के लिए जरूरी है कि आपके शरीर में पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी हो। आगे जानते हैं फेफड़ों की सेहत और विटामिन डी (Vitamin D) का आपस में क्या संबंध है?

फेफड़ों की सेहत और विटामिन डी (Vitamin D) का आपस में क्या संबंध है?

डॉ. सुनील कुमार कहते हैं कि फेफड़ों का लगातार वायरस, बैक्टीरिया, प्रदूषण और दूसरे कणों से सामना होता रहता है, इसलिए शरीर का इम्यून सिस्टम सांस लेने वाले तंत्र यानी रेस्पिरेटरी सिस्टम की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। विटामिन D इम्यून रिस्पॉन्स को कंट्रोल करने में शामिल होता है, जिसके कारण रिसर्चर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या विटामिन D का स्तर सांस की सेहत से जुड़ा है।

साल 2011 में Vitamins & Hormones नामक जर्नल में प्रकाशित यह रिपोर्ट बताती है कि शरीर में विटामिन डी की कमी का संबंध माइक्रोबैक्टीरियल इंफेक्शन, वायरल श्वसन संक्रमण और अस्थमा जैसी बीमारियों के बढ़ने से है।

विटामिन डी की कमी से फेफड़ों और श्वसन तंत्र (Respiratory System) पर क्या असर पड़ता है?

इसी शोध में बताया गया है कि विटामिन डी उन सेलुलर तंत्रों को प्रभावित करता है जो रोगाणुओं (pathogens) को पहचानने और उन्हें नष्ट करने, सूजन को कम करने, और फेफड़ों के भीतर इम्यूनिटी को नियंत्रित करने के लिए जरूरी हैं। इसके अलावा डॉ. सुनील कुमार कहते हैं कि जिन लोगों में विटामिन डी की कमी होती है

  • बदलते मौसम में बीमार रहते हैं।
  • जल्दी संक्रमित हो जाते हैं और रिकवरी धीरे-धीरे होती है।
  • लंबे समय तक सर्दी-जुकाम ठीक नहीं होती और अस्थमा और निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है।

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क्या विटामिन डी फेफड़ों के इंफेक्शन और अस्थमा के खतरे को कम कर सकता है?

American Lung Association के अनुसार विटामिन D इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रियाओं को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है और सांस की नली में सूजन को कम करने में मदद करता है। बच्चों और वयस्कों में विटामिन D की कमी का संबंध अस्थमा के दौरे के बढ़ते जोखिम से जोड़ा गया है। The Lancet Respiratory Journal में प्रकाशित यह रिसर्च बताती है कि अस्थमा से पीड़ित वयस्कों को विटामिन D सप्लीमेंट से फायदा हो सकता है, जैसे कि गंभीर रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन से बचाव और बीमारी के अचानक बिगड़ने (exacerbations) की दर में कमी जैसे कि बार-बार अस्थमा का दौरान पड़ना।

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फेफड़ों को मजबूत रखने के लिए विटामिन डी के मुख्य प्राकृतिक स्रोत कौन-से हैं?

डॉ. सुनील कुमार कहते हैं कि फेफड़ों को मजबूत रखने के लिए विटामिन D देने वाले खाद्य पदार्थों में फोर्टिफाइड दूध और डेयरी उत्पाद, फोर्टिफाइड प्लांट-बेस्ड ड्रिंक्स, अंडे की जर्दी और कुछ तरह के मशरूम शामिल हैं, हालांकि सिर्फ खाने-पीने की चीजों से हमेशा इसकी जरूरत पूरी नहीं हो पाती।

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स्वस्थ फेफड़ों के लिए एक दिन में कितनी मात्रा में विटामिन डी लेना जरूरी है?

अगर किसी में इसकी कमी का शक हो, तो डॉक्टर तय कर सकते हैं कि ब्लड टेस्ट करवाना सही रहेगा या नहीं और ज़रूरत पड़ने पर सप्लीमेंट लेने की सलाह दे सकते हैं। National Institute of Health के अनुसार शिशु को 400 IU यानी (10 mcg) लेना चाहिए और बच्चे और वयस्क को 600 IU विटामिन डी लेना चाहिए।

निष्कर्ष:

अंत में डॉ. सुनील कहते हैं हालांकि, बहुत ज्यादा विटामिन D लेना हमेशा फायदेमंद नहीं होता। डॉक्टर की सलाह के बिना ज्यादा डोज वाले सप्लीमेंट लेने से शरीर में कैल्शियम का लेवल बहुत बढ़ सकता है और सेहत से जुड़ी दूसरी परेशानियां हो सकती हैं। सही तरीका यह है कि समझदारी से धूप लेकर, खान-पान के जरिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लेकर विटामिन D का सही लेवल बनाए रखा जाए।

इसके अलावा विटामिन D को अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया या फेफड़ों की दूसरी बीमारियों के इलाज के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। फेफड़ों की सेहत कई बातों पर निर्भर करती है, जैसे कि स्मोकिंग और दूसरों के धुएं (सेकंड-हैंड स्मोक) से बचना, हवा के प्रदूषण के संपर्क में कम आना, शारीरिक रूप से एक्टिव रहना, वजन सही रखना, समय पर टीके लगवाना और सांस से जुड़ी तकलीफें बने रहने पर डॉक्टर से सलाह लेना।

FAQ

  • अस्थमा कितने दिनों तक रहता है?

    जिन लोगों को अस्थमा की बीमारी होती है उन्हें जब भी यह ट्रिगर करता है लंबे समय तक बना रहता है। अस्थमा को ठीक होने में 1 हफ्ते से लेकर 15 दिन से ज्यादा समय लग सकता है। हालांकि, इलाज की शुरुआत जल्दी करवाएं।
  • अस्थमा के लिए सबसे खराब भोजन कौन सा है?

    अस्थमा के मरीजों को ज्यादा तेल मसाले वाली चीजों के सेवन से बचना चाहिए जो कि आपकी सेहत को काफी हद तक प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा पैकेटबंद और डिब्बाबंद चीजों के सेवन से बचें।

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Pallavi Kumari

चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 29, 2026 18:33 IST

    Published By : Pallavi Kumari
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