Wed Oct 7, 2026 | 09:31 PM IST

Medically Reviewed by Dr Srikanth Madikattu , Consultant – Orthopaedic Surgeon and Joint Replacement Surgeon Manipal Hospitals, Pune

उम्र के हिसाब से रोज कितना लेना चाहिए विटामिन D? डॉक्टर से जानें 

विटामिन D की कमी गंभीर समस्या बनती जा रही है। इसका असर हड्डियों के साथ-साथ शरीर के इम्यून सिस्टम पर पड़ता है। इसलिए विटामिन D उम्र के हिसाब से लेना बहुत महत्वपूर्ण है। इस लेख में डॉक्टर ने उम्र के हिसाब से विटामिन D के बारे में बताया है।
उम्र के हिसाब से रोज कितना लेना चाहिए विटामिन D? डॉक्टर से जानें 


उम्र के हिसाब से रोज कितना लेना चाहिए विटामिन D? डॉक्टर से जानें 

विटामिन D शरीर में सूजन कम करने, कोशिकाओं की ग्रोथ, न्यूरोमॉस्कुलर प्रणाली, इम्यून फंक्शन और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म में मदद करता है। इसके अलावा, विटामिन D कैल्शियम और फॉस्फोरस को अवशोषित करने में मदद करता है। इसलिए विटामिन D सही मात्रा में उम्र के हिसाब (vitamin d recommeded dosage in hindi) से लेना चाहिए। इस बारे में Dr. Srikanth Madikattu, Consultant, Orthopaedic Surgeon and Joint Replacement Surgeon, Manipal Hospital, Baner, Pune ने बताया कि विटामिन D को सिर्फ हड्डियों या मांसपेशियों से जोड़कर देखना सही नहीं है। विटामिन D शरीर को संक्रमण से बचाता है और साथ ही मांसपेशियों के फंक्शन में भी जरूरी है। इसलिए लोगों को विटामिन D कितना लेना चाहिए? इसकी जानकारी होना बहुत महत्वपूर्ण है।

विटामिन D की कमी होने पर शरीर को क्या नुकसान हो सकते हैं?

Cleveland Clinic के अनुसार, अगर विटामिन D की कमी हो जाए, तो आंतें कैल्शियम और फॉस्फोरस का अवशोषण नहीं कर पाती हैं, जिस वजह से खून में कैल्शियम की कमी होने लगती है। इस कंडीशन को हाइपोकैल्सीमिया कहते हैं।

  • अगर बच्चों में विटामिन D कम हो जाए, तो उनकी हड्डियां मुड़ जाती हैं या टेढ़ी हो जाती हैं। इससे बच्चों में रिकेट्स होने का खतरा बढ़ सकता है। 
  • विटामिन D की कमी से ओस्टियोमलेशिया और ओस्टियोपोरोसिस होने का रिस्क बढ़ सकता है।

Dr. Srikanth Madikattu कहते हैं कि बच्चों में विटामिन D की गंभीर कमी हड्डियों के सामान्य विकास को प्रभावित कर सकती है। वहीं, वयस्कों में इसकी कमी हड्डियों और मांसपेशियों की कमजोरी से जुड़ी हो सकती है। कुछ लोगों को थकान भी महसूस हो सकती है, लेकिन इसके साथ अन्य लक्षणों को भी देखना चाहिए।

विटामिन D की कमी क्यों हो सकती है?

Dr. Srikanth Madikattu ने बताया कि आजकल बहुत से मामले आते हैं, जिनमें विटामिन D की कमी होती है। इसके कई कारण देखने को मिलते हैं।

  • पर्याप्त धूप न मिलना
  • डाइट में विटामिन D न मिलना
  • पाचन से जुड़ी समस्याएं जैसे सेलिएक बीमारी, क्रोहन और सिस्टिक फाइब्रोसिस होना
  • लिवर और किडनी की बीमारियां होने पर
  • मोटापे से ग्रस्त लोगों में फैट कोशिकाएं विटामिन D को बाइंड कर देती हैं।
  • जिन लोगों ने वजन घटाने की गैस्ट्रिक बाईपास जैसी सर्जरी कराई है, जिसमें पेट या छोटी आंत के उस हिस्से को छोटा कर दिया जाता है, जो विटामिन D को अवशोषित करता है।
  • कुछ खास दवाएं जैसे स्टेरॉयड्स या कोलेस्ट्रॉल कम करने की दवाएं लेने से विटामिन D के अवशोषण को रोकता है।

vitamin D dosagevitamin D dosage

यह भी पढ़ें- विटामिन D सप्लीमेंट सुबह या शाम कब लेना सबसे बेहतर? न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया सही समय

क्या हर उम्र में विटामिन D की जरूरत एक जैसी होती है?

Dr. Srikanth Madikattu कहते हैं, “हर उम्र के लोगों को विटामिन D की जरूरत अलग-अलग हो सकती है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और कुछ स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों में विटामिन D को लेकर डॉक्टर की सलाह अलग हो सकती है। इसके साथ, यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हर व्यक्ति खासतौर पर बच्चों को विटामिन D की हाई डोज नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि जरूरत और उम्र के अनुसार ही इसे तय किया जाना चाहिए।”

विटामिन D कितना होना चाहिए?

Dr. Srikanth Madikattu ने कहा कि विटामिन D का डोज हर उम्र और हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं हो सकता है। इसलिए खुद से विटामिन के सप्लीमेंट्स न लें, बल्कि जांच कराने के बाद डॉक्टर से ही सलाह लेनी चाहिए।

RDA के अनुसार, उम्र के हिसाब से रोजाना विटामिन D रिकमंड किया गया है।

उम्र

पुरुष

महिला

0 से 6 महीने

10 mcg (400 IU)

10 mcg (400 IU)

7 से 12 महीने

10 mcg (400 IU)

10 mcg (400 IU)

1 से 3 साल

15 mcg (600 IU)

15 mcg (600 IU)

4 से 8 साल

15 mcg (600 IU)

15 mcg (600 IU)

9 से 13 साल

15 mcg (600 IU)

15 mcg (600 IU)

14 से 18 साल

15 mcg (600 IU)

15 mcg (600 IU)

19 से 50 साल

15 mcg (600 IU)

15 mcg (600 IU)

51 से 70 साल

15 mcg (600 IU)

15 mcg (600 IU)

70 साल से ज्यादा

20 mcg (800 IU)

20 mcg (800 IU)

अगर प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग 19 से 50 साल के बीच है, तो 15 mcg (600IU) लेनी चाहिए और इसके लिए डॉक्टर से सप्लीमेंट्स के बारे में पूछा जा सकता है।

विटामिन D के लिए क्या खाना चाहिए?

NHS के अनुसार, विटामिन D धूप में बैठने के अलावा, कुछ फूड्स में नेचुरल मिल सकता है।

  • मछली जैसे साल्मन, सार्डिन, हेरिंग, ट्रॉट लेना
  • लाल मांस
  • अंडे की जर्दी
  • फोर्टिफाइड फूड
  • लिवर खाना, लेकिन प्रेग्नेंसी में लिवर खाने से बचना चाहिए।
  • विटामिन D सप्लीमेंट फैट के साथ लें। 

डॉक्टर की सलाह

Dr. Srikanth Madikattu कहते हैं कि अगर रिपोर्ट में विटामिन D कम आया है या इसकी कमी है, तो डॉक्टर की सलाह लेकर ही सप्लीमेंट लेना चाहिए। लंबे समय तक विटामिन D का हाई डोज लेना कई बार नुकसान भी कर सकता है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के विटामिन D न लें। इसकी कितनी मात्रा लेनी चाहिए और कब दोबारा जांच की जरूरत है या नहीं, इसका फैसला व्यक्ति की मेडिकल कंडीशन और उम्र को हिसाब से ही किया जाता है।

निष्कर्ष
विटामिन D के लक्षणों और कमी को पूरा करने के लिए इसकी सही मात्रा में खुराक लेना जरूरी है। इसमें उम्र और मेडिकल कंडीशन को भी देखा जाता है। इसके साथ किशोरों में विटामिन डी की कमी की पहचान करना जरूरी है, ताकि उन्हें इससे होने वाली समस्याओं से बचाया जा सके।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • शरीर में विटामिन D की गंभीर कमी होने पर डॉक्टर कितनी खुराक देते हैं?

    अगर ब्लड टेस्ट में लेवल 20 ng/mL से कम आता है, तो डॉक्टर आमतौर पर 60,000 IU प्रति सप्ताह की हाई डोज 6 से 8 हफ्तों के लिए लेने की सलाह देते हैं।
  • केवल धूप से रोजाना कितना विटामिन D मिल सकता है और सबसे सही समय क्या है?

    सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच 15 से 20 मिनट तक चेहरे, हाथों और पैरों पर बिना सनस्क्रीन के धूप लेने से शरीर को लगभग 1,000 से 3,000 IU विटामिन D मिल जाता है।

Read Next

→ ओव्यूलेशन के दिनों में मह‍िलाओं को क्‍या खाना चा‍ह‍िए? एक्‍सपर्ट से जानें 10 खाद्य पदार्थों के नाम

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Oct 07, 2026 20:45 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Srikanth Madikattu