महिलाओं के मासिक चक्र में कुछ दिन ऐसे होते हैं जिसमें गर्भधारण की सबसे अधिक संभावना होती है और इसे ओव्यूलेशन पीरियड कहा जाता है। यह समय पीरियड्स के बाद आता है। ओव्यूलेशन के दौरान एस्ट्रोजन और LH हार्मोन का स्तर बढ़ा हुआ होता है जो गर्भधारण में मदद करता है। ओव्यूलेशन वह समय है जब अंडाशय से परिपक्व अंडा बाहर निकलता है। इस दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं इसलिए इस दौरान शरीर के लिए पर्याप्त पोषण लेना जरूरी होता है जैसे अल्कलाइन फूड्स, प्रोटीन फूड्स, ओमेगा 3 रिच फूड्स, हेल्दी फैट्स, फोलेट रिच फूड्स, डेयरी उत्पाद, साबुत अनाज, एंटीऑक्सीडेंट, जिंक, पोटैशियम और मैग्नीशियम, प्रोबायोटिक्स फूड्स वगैरह। आइए जानते हैं ओव्यूलेशन के दौरान महिलाएं किन चीजों का सेवन करने से क्या फायदे मिलते हैं? बेहतर जानकारी के लिए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।
Harvard Medical School में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की कोशिश कर रही महिलाओं में फोलिक एसिड, विटामिन बी12, ओमेगा 3 फैटी एसिड, हेल्दी फैट्स जैसे पोषक तत्वों का फर्टिलिटी पर सकारात्मक प्रभाव देखा गया है।
साल 2022 में Nutrients में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, फोलिक एसिड, विटामिन डी, आयोडीन, विटामिन बी12, आयरन, जिंक और प्रजनन स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभाते हैं। स्टडी में बताया गया है कि अंडाणु की गुणवत्ता और उसके परिपक्व होने की प्रक्रिया में ये पोषक तत्व मदद कर सकते हैं।
ओव्यूलेशन के दौरान क्या खाएं? |
क्या न खाएं? |
| अल्कलाइन फूड्स | एसिडिक फूड्स |
| प्रोटीन फूड्स | प्रोसेस्ड फूड्स |
| ओमेगा 3 रिच फूड्स | पैकेज्ड फूड्स |
| हेल्दी फैट्स | रिफाइंड चीनी |
| फोलेट रिच फूड्स | प्रोसेस्ड मीट, फ्रोजन स्नैक्स |
| डेयरी उत्पाद | शुगर वाली ड्रिंक्स |
| साबुत अनाज | रिफाइंड कार्ब्स |
| एंटीऑक्सीडेंट रिच फूड्स | |
| जिंक, पोटैशियम और मैग्नीशियम रिच फूड्स | |
| प्रोबायोटिक्स फूड्स |
ओव्यूलेशन के दौरान फर्टिलिटी में मदद करेंगे ये 10 खाद्य पदार्थ
1. अल्कलाइन फूड्स
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ओव्यूलेशन के दौरान अल्कलाइन फूड्स खा सकती हैं। हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी, केल, खीरा, ब्रोकली, शिमला मिर्च, केला, बादाम, अखरोट, नारियल पानी वगैरह का सेवन कर सकती हैं।
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2. प्रोटीन फूड्स
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वेज में स्प्राउट्स, भुने चने, राजमा, काबुली चने, दाल का सेवन कर सकती हैं। नॉन-वेज में अंडे और लीन मीट का सेवन कर सकती हैं। इस दौरान चिकन ब्रेस्ट खा सकती हैं, लेकिन रेड मीट से परहेज करें।
3. ओमेगा 3 फैटी एसिड
अंडाणु की गुणवत्ता और विकास के लिए ओमेगा 3 फैटी एसिड फायदेमंद माना माना जाता है। सैल्मन, सार्डिन जैसी मछलियों से ओमेगा 3 मिलता है। अलसी और चिया सीड्स, अखरोट से भी ओमेगा मिलता है।
4. हेल्दी फैट्स
एवोकाडो, जैतून का तेल, नट्स और बीजों में हेल्दी फैट्स पाए जाते हैं। ओव्यूलेशन के दौरान हेल्दी फैट्स को डाइट का हिस्सा बनाएं। इससे शरीर में हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।
5. फोलेट वाले खाद्य पदार्थ
चना, मसूर, राजमा, पालक, ब्रोकली और एवोकाडो में फोलेट पाया जाता है। नई कोशिकाओं के निर्माण में फोलेट अहम भूमिका निभाता है। अगर गर्भधारण की योजना है, तो पर्याप्त फोलेट लेना चाहिए। डॉक्टर से फोलिक एसिड सप्लीमेंट की जरूरत के बारे में सलाह लेना न भूलें।
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6. डेयरी उत्पाद
डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दही और पनीर वगैरह में कैल्शियम और विटामिन डी की भरपूर मात्रा होती है। विटामिन डी शरीर में हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
7. साबुत अनाज
ओट्स, दलिया, ज्वार, बाजरा, रागी और ब्राउन राइस जैसे साबुत अनाज फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। ओव्यूलेशन के दौरान साबुत अनाज पाचन और ब्लड शुगर को सामान्य रखने में मदद करते हैं। रिफाइंड कार्ब्स जैसे सफेद ब्रेड या सफेद रोटी की जगह साबुत अनाज चुनना बेहतर विकल्प है।
8. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजें
ओव्यूलेशन के दौरान एंटीऑक्सीडेंट वाले खाद्य पदार्थों को डाइट का हिस्सा बना सकते हैं। एंटीऑक्सीडेंट शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव में मदद करते हैं। आंवला, अमरूद, संतरा, बेरीज, अनार, टमाटर, पालक, शिमला मिर्च, गाजर और ब्रोकली को डाइट का हिस्सा बना सकते हैं।
9. जिंक, पोटैशियम और मैग्नीशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ
ओव्यूलेशन के समय जिंक, पोटैशियम और मैग्नीशियम युक्त चीजों को संतुलित डाइट का हिस्सा बना सकती हैं। जिंक कोशिकाओं के निर्माण, मैग्नीशियम एनर्जी उत्पादन और पोटैशियम शरीर में तरल संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। कद्दू के बीज, तिल, बादाम, काजू, चना, राजमा, मसूर, केला, शकरकंद, पालक का सेवन कर सकती हैं।
10. प्रोबायोटिक्स से भरपूर खाद्य पदार्थ
ओव्यूलेशन के दौरान प्रोबायोटिक्स रिच फूड्स खाने से आंतों में गुड बैक्टीरिया बढ़ते हैं। इससे पाचन भी बेहतर होता है। दही, छाछ वगैरह को डाइट में शामिल कर सकते हैं।
ओव्यूलेशन के दिनों में किन खाद्य पदार्थों से बचें?
एसिडिक फूड्स से बचें
बाजार में मिलने वाली सॉस, चटनी, पैकेज्ड फूड्स से बचें। इनमें प्रिजर्वेटिव्स होते हैं। अधिक प्रोसेस्ड फूड्स, इमली, सिरका, अचार वगैरह के सेवन से भी परहेज करें।
रिफाइंड शुगर से बचें
अधिक मात्रा में रिफाइंड शुगर भी कुछ लोगों में एसिडिटी का कारण बनती है इसलिए ओव्यूलेशन के दौरान इससे बचना चाहिए। साथ ही, रिफाइंड शुगर से वजन और ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है इसलिए इससे परहेज करें।
ओव्यूलेशन डाइट को कैसे प्लान करें?
- प्लेट का आधा हिस्सा सब्जियों और सलाद को दें।
- प्लेट में एक चौथाई हिस्सा प्रोटीन का रखें।
- एक चौथाई हिस्सा साबुत अनाज रखें।
- प्लेट में थोड़ी मात्रा में हेल्दी फैट जोड़ें।
- हर दिन फल की एक सर्विंग रखें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें।
उदाहरण:
½ प्लेट सब्जियां + ¼ प्लेट प्रोटीन + ¼ प्लेट साबुत अनाज + थोड़े नट्स और सीड्स + 1 फल।
ध्यान रखें कि ये फूड्स गर्भधारण की गारंटी नहीं देते। इन फूड्स को हेल्दी डाइट का हिस्सा बना सकती हैं। किसी क्रोनिक बीमारी की मरीज हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर ही इन फूड्स को डाइट में शामिल करें।
निष्कर्ष:
ओव्यूलेशन के दौरान गर्भधारण की संभावना सबसे अधिक होती है इसलिए इस दौरान फर्टिलिटी को सपोर्ट करने वाले खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करें जैसे अल्कलाइन फूड्स, प्रोटीन फूड्स, ओमेगा 3 रिच फूड्स, हेल्दी फैट्स, फोलेट रिच फूड्स, डेयरी उत्पाद, साबुत अनाज, एंटीऑक्सीडेंट, जिंक, पोटैशियम और मैग्नीशियम, प्रोबायोटिक्स फूड्स वगैरह। इस दौरान एसिडिक फूड्स, प्रोसेस्ड फूड्स, पैकेज्ड फूड्स, रिफाइंड चीनी वगैरह से परहेज करना चाहिए। ओव्यूलेशन के दौरान प्लेट के आधे हिस्से में सब्जियों को रखें, एक चौथाई हिस्से में प्रोटीन, एक चौथाई में साबुत अनाज, हेल्दी फैट और दिनभर में फल की एक सर्विंग रखें। साथ ही, पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें।
image credit: magnific
FAQ
ओव्यूलेशन कब होता है?
28 दिन के नियमित मासिक चक्र में ओव्यूलेशन अक्सर अगले पीरियड से करीब 14 दिन पहले होता है। हालांकि, हर महिला का चक्र अलग हो सकता है, इसलिए केवल तारीख के आधार पर ओव्यूलेशन का अनुमान हमेशा सही नहीं होता।क्या हर महीने ओव्यूलेशन होना जरूरी है?
नियमित पीरियड होने के बावजूद हर चक्र में ओव्यूलेशन हो, यह जरूरी नहीं है। तनाव, वजन में बदलाव, PMOS, थायराइड जैसे कारण ओव्यूलेशन को प्रभावित कर सकते हैं।
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Current Version
Oct 07, 2026 19:22 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Neha Mohan Sinha
