Wed Oct 7, 2026 | 06:39 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

प्राकृत‍िक पेनकिलर हैं भारतीय रसोई में मौजूद ये 7 चीजें, दर्द से जल्‍द म‍िल सकती है राहत

भारतीय रसोई में मौजूद हल्‍दी, अदरक, लहसुन, अजवाइन जैसे कई मसाले और हर्ब्स दर्द-न‍िवारक होते हैं और कई शारीर‍िक दर्द से राहत देते हैं। जानें ऐसी 7 चीजों के फायदे।
प्राकृत‍िक पेनकिलर हैं भारतीय रसोई में मौजूद ये 7 चीजें, दर्द से जल्‍द म‍िल सकती है राहतप्राकृत‍िक पेनकिलर हैं भारतीय रसोई में मौजूद ये 7 चीजें, दर्द से जल्‍द म‍िल सकती है राहत

शारीर‍िक दर्द को कम करने के ल‍िए प्राकृत‍िक दर्द-न‍िवारक उपायों की मदद ली जाती है। इनमें कई ऐसे नाम है जो आसानी से घर की रसोई या बगीचे में म‍िल जाते हैं जैसे हल्‍दी, अदरक, लौंग, दालचीनी, लहसुन, काली म‍िर्च, अजवाइन, नीलग‍िरी वगैरह। हल्‍दी जोड़ों के दर्द से राहत के ल‍िए जानी जाती है, वहीं अदरक से पीरि‍यड पेन, सूजन और दर्द कम करने में मदद म‍िलती है। लौंग को दांत के दर्द में उपयोगी माना जाता है, दालचीनी को मास‍िक धर्म के दर्द और पाचन समस्‍याओं से राहत के ल‍िए इस्‍तेमाल क‍िया जाता है। लहसुन और काली म‍िर्च को मांसपेश‍ियों के दर्द से राहत के ल‍िए इस्‍तेमाल क‍िया जाता है। अजवाइन को पेट दर्द एवं ऐंठन और नीलगिरी को मांसपेशियों एवं जोड़ों के दर्द से आराम के ल‍िए इस्‍तेमाल क‍िया जाता है। आइए जानते हैं ये सभी प्राकृत‍िक उपाय क‍िस प्रकार दर्द को कम करते हैं और इन्‍हें इस्‍तेमाल करते समय क‍िन सावधान‍ियों का ध्‍यान रखना है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Ayurveda Expert Dr. Shrey Sharma, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।

7 दर्द-न‍िवारक प्राकृत‍िक मसाले दर्द के प्रकार 
1. हल्दी जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द में।
2. अदरक जोड़ों के दर्द और पीरियड्स के दर्द में।
3. लौंग दांत के दर्द में।
4. दालचीनी  पेट दर्द और पेट की ऐंठन में।
5. लहसुन मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द में।
6. काली मिर्च     मांसपेशियों, नसों और जोड़ों से जुड़े दर्द में।
7. अजवाइन पेट दर्द, गैस और पेट की ऐंठन में।

हल्दी और अदरक: सूजन और दर्द के लिए सबसे प्रभावी प्राकृतिक विकल्प

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हल्‍दी में करक्यूमिन मौजूद होता है। साथ ही, इसमें सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं जो जोड़ों और मांसपेश‍ियों के दर्द से राहत के ल‍िए जाने जाते हैं। इसी तरह, अदरक में जिंजरोल और शोगाओल जैसे यौगिक मौजूद होते हैं जो ज्‍वॉइंट पेन के अलावा पीर‍ियड्स में होने वाले दर्द से भी कुछ हद तक राहत देने में मदद करते हैं।

साल 2022 में Molecules में प्रकाश‍ित स्टडी में पाया गया कि अदरक और हल्दी का अर्क सूजन को कम करने में मदद कर सकता है। शोधकर्ताओं ने अलग-अलग अनुपातों में दोनों के अर्क मिलाकर जांचे। 5:2 अनुपात (अदरक:हल्दी) ने लगातार बेहतर प्रभाव दिखाए।

सावधान‍ियां:

  • ब्‍लड थि‍नर ले रहे हैं, तो डॉक्‍टर की सलाह पर ही हल्‍दी और अदरक का इस्‍तेमाल करें।
  • एस‍िड‍िटी या सीने में जलन होने पर अदरक का इस्‍तेमाल न करें।

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लौंग और दालचीनी का उपयोग: दांत और जोड़ों के दर्द में असरदार

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लौंग में मौजूद यूजेनॉल (Eugenol) एक प्रमुख यौगिक है जो दर्द से राहत देने में मदद करता है। इसके सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण दांत के दर्द से राहत देने में मदद करते हैं। इसी तरह दालचीनी पेट दर्द और पाचन समस्‍याओं को दूर करने में मदद करती है। ये प्राकृत‍िक मसाले, जोड़ों के दर्द से भी राहत देते हैं।

साल 2022 में BMC Complementary Medicine And Therapies में प्रकाश‍ित स्‍टडी के जर‍िए शोधकर्ताओं ने बताया क‍ि लौंग और दालचीनी के तेल से सूजन और दर्द को कम करने में मदद म‍िलती है। हालांक‍ि, यह एक पशु आधार‍ित स्‍टडी है इसल‍िए इंसानों पर इसका असर देखने के ल‍िए और स्‍टडीज की जरूरत है।

सही मात्रा:

एक बार में 1 से 2 लौंग का ही इस्‍तेमाल करें।

सावधान‍ियां:

  • लौंग का ज्‍यादा सेवन करने से मुंह में जलन, पेट में जलन या उल्टी हो सकती है।
  • लिवर की बीमारी होने पर दालचीनी लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

लहसुन और काली म‍िर्च के औषधीय गुण: नसों के दर्द और मांसपेशियों की जकड़न से राहत

लहसुन में एलिसिन, सल्फर और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसमें सूजनरोधी गुण भी पाए जाते हैं। यह जोड़ों, नसों और मांसपेश‍ियों के दर्द में राहत देने में मदद कर सकता है। काली म‍िर्च में पाइपरिन पाया जाता है। यह सूजन और दर्द को कम करने में मदद करता है।

सही मात्रा:

1 से 2 कली लहसुन की खा सकते हैं।

सावधान‍ियां:

  • त्‍वचा पर कच्‍चा लहसुन लगाने से बचना चाह‍िए। इससे जलन हो सकती है।
  • एस‍िडि‍टी होने पर या दवाओं के साथ काली म‍िर्च का सेवन करने से बचना चाह‍िए।

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अजवाइन: पाचन संबंधि‍त दर्द और पेट की ऐंठन का समाधान

अजवाइन में थाइमोल जैसे एक्‍ट‍िव यौगि‍क पाए जाते हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और रोगाणुरोधी गुण पाए जाते हैं। अजवाइन का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से पेट दर्द, गैस, अपच और पेट की ऐंठन को दूर करने के ल‍िए किया जाता है।

कब लें डॉक्टर की सलाह?

शारीर‍िक दर्द होने पर हमेशा घरेलू उपायों पर न‍िर्भर नहीं रहना चाह‍िए। घरेलू उपाय केवल दर्द को मैनेज करने में मदद करते हैं, ये उपाय दर्द के कारण को खत्‍म करने में उतना असरदार नहीं होते। इसल‍िए डॉक्‍टर की मदद से दर्द के पीछे छुपे कारणों का पता लगाएं। ये लक्षण नजर आने पर डॉक्‍टर से संपर्क करें-

  • दर्द लगातार बना रहे।
  • दर्द बार-बार होने लगे।
  • दर्द धीरे-धीरे बढ़ रहा हो।
  • दर्द के साथ बुखार, लगातार उल्टी, कमजोरी या चक्कर हों।
  • पेट दर्द के साथ पेशाब या स्‍टूल में ब्‍लड आए।

न‍िष्‍कर्ष:

हल्‍दी से जोड़ों और मांसपेश‍ियों के दर्द को कम करने में मदद म‍िलती है। अदरक से ज्‍वॉइंट पेन और पीर‍ियड्स पेन से राहत म‍िल सकती है। लौंग, दांत के दर्द में उपयोगी मानी जाती है, दालचीनी को पेट दर्द और पाचन समस्‍याओं को दूर करने में असरदार माना जाता है। लहसुन और काली म‍िर्च नसों, मांसपेश‍ियों और जोड़ों के दर्द से राहत देने में मदद कर सकता है। पेट दर्द, गैस, अपच, पेट की ऐंठन जैसी समस्‍याओं में अजवाइन का सेवन क‍िया जाता है। इन उपायों को अपनाने के बाद भी दर्द बना रहे, लगातर बढ़े या बार-बार दर्द हो, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें। दर्द के साथ बुखार, उल्‍टी, कमजोरी, चक्‍कर, पेशाब या स्‍टूल में ब्‍लड को भी नजरअंदाज न करें।

image credit: magnific

FAQ

  • क्या नीलगिरी जोड़ों के दर्द में राहत देती है?

    नीलगिरी का तेल में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसे कैर‍ियर ऑयल के साथ म‍िक्‍स करके त्‍वचा पर लगाने से जोड़ों के दर्द से काफी हद तक राहत म‍िल सकती है।
  • स‍िरदर्द के घरेलू उपाय क्‍या हैं?

    स‍िरदर्द को दूर करने के ल‍िए पानी प‍िएं, ठंडी स‍िंकाई करें, पुदीना और बादाम के तेल को म‍िलाकर माल‍िश करें और स्‍क्रीन से दूरी बनाएं। 

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Health Journalist

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े।

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    Oct 07, 2026 17:12 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma