Wed Sep 16, 2026 | 07:09 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

जोड़ों के दर्द में फायदेमंद हो सकता है नीलगिरी तेल, आयुर्वेदिक डॉक्‍टर से जानें इस्तेमाल का तरीका

नीलगिरी (यूकलिप्टस) एक दर्द-न‍िवारक पौधा है। इसका इस्‍तेमाल दर्द का इलाज करने के ल‍िए क‍िया जाता है। जानें जोड़ों के दर्द के ल‍िए नीलग‍िरी तेल का उपयोग कैसे करें?

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नीलग‍िरी तेल की मदद से घुटनों का दर्द कम करने में मदद मि‍लती है। इस तेल में एंटीसेप्टिक, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं। घुटनों में दर्द की समस्‍या आज के समय में आम होती जा रही है। इसका एक सबसे बड़ा कारण है अर्थराइट‍िस। इसके अलावा चोट लगना या ऐसे काम करना ज‍िससे घुटनों पर प्रेशर पड़ता है जैसे झुककर भारी सामान उठाना, उम्र बढ़ने से हड्ड‍ियों के कमजोर होने से, साइनोव‍ियल फ्लूइड की कमी से भी घुटनों और जोड़ों में दर्द हो सकता है। आइए घुटनों का दर्द दूर करने के ल‍िए नील‍ग‍िरी तेल को इस्‍तेमाल करने का सही तरीका और फायदे जानते हैं। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।

नीलग‍िरी का तेल, नीलग‍िरी पेड़ की पत्तियों से बनाया जाता है। नीलग‍िरी के तेल में यूकेल‍िप्‍टोल नाम का कंपाउंड पाया जाता है। यह एक शक्‍त‍िशाली एंटीइंफ्लेमेटरी एजेंट माना जाता है ज‍िससे दर्द कम करने में मदद म‍िलती है। साल 2024 में International Journal Of Pain में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी र‍िव्‍यू में 60 अध्ययनों की जानकारी को शामिल किया गया। रिव्यू के अनुसार, नीलगिरी के तेल में मौजूद यूकेल‍िप्‍टोल को दर्द कम करने और सूजन घटाने में असरदार समझा गया है।

जोड़ों के दर्द में क्‍यों फायदेमंद है नीलग‍िरी तेल?

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  • इस तेल को त्‍वचा पर लगाने से मेंथॉल जैसा ठंडा महसूस होता है ज‍िससे दर्द का एहसास कम हो जाता है। इस तेल का कूल‍िंग इफेक्‍ट, दर्द को कम करने में मदद करता है। इस वजह से दर्द को तेजी से कम करने में भी मदद म‍िलती है।
  • नीलग‍िरी तेल में एंटीऑक्‍सीडेंट्स भी मौजूद होते हैं। ये ऐसे फ्री रेड‍िकल्‍स को न्‍यूट्र‍िलाइज करते हैं जो जोड़ों को खराब कर देते हैं या ज्‍वॉइंट कार्टि‍लेज को नुकसान पहुंचाते हैं।

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नीलग‍िरी तेल को जोड़ों पर अप्‍लाई करने का तरीका

  • न‍ीलग‍िरी तेल में एनेस्‍थेट‍िक इफेक्‍ट है इसल‍िए इसे अप्‍लाई करने से जोड़ों में दर्द की समस्‍या दूर होती है।
  • तेल लगाकर हल्‍के हाथ से माल‍िश करें।
  • नीलग‍िरी तेल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं ज‍िससे दर्द जल्‍दी दूर होता है।
  • नीलग‍िरी तेल को सीधे त्‍वचा पर लगाने के बजाय नार‍ियल या बादाम के तेल के साथ म‍िक्‍स करके अप्‍लाई करें।
  • एक चम्‍मच तेल में दो से तीन बूंद नीलग‍िरी तेल को म‍िक्‍स करके लगाएं।
  • तेल लगाने के बाद सर्कुलर मोशन में माल‍िश करें।
  • गर्म कपड़े से घुटने को ढक लें, इस तरह तेल बेहतर ढंग से त्‍वचा में एब्‍जॉर्ब होगा।

नीलग‍िरी तेल का इस्‍तेमाल करते समय इन बातों का ध्‍यान रखें

  • इसे आराम से हल्‍के हाथ से अप्‍लाई करें।
  • तेल लगाकर हाथ से दबाने की कोश‍िश न करें।
  • तेल को त्‍वचा में एब्‍जॉर्ब होने दें।
  • इसमें वेदना हरण गुण होते हैं यानी दर्द को कम करता है। हालांक‍ि, यह जोड़ों की बीमारी को दूर नहीं करता है, केवल दर्द के ल‍िए उपयोगी है।

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जोड़ों के दर्द में गुरु आहार से बचें

आयुर्वेद में गुरु आहार यानी ऐसे खाद्य पदार्थों को कहा जाता है जिन्हें पचने में ज्‍यादा समय लगता है। जोड़ों के दर्द के दौरान बहुत ज्यादा तला-भुना, भारी या जरूरत से ज्यादा भोजन करने से बचने की सलाह दी जाती है। इसकी जगह हल्का, ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन लेना बेहतर माना जाता है। भोजन की मात्रा भी जरूरत के अनुसार रखें और बार-बार या जरूरत से ज्यादा खाने से बचें।

देर रात खाना और देर तक जागना कम करें

रात में बहुत देर से खाना या देर तक जागना आपकी नींद और भोजन के नियमित समय को प्रभावित कर सकता है। आयुर्वेद में दिनचर्या को स्वास्थ्य के लिए अहम माना गया है। इसलिए कोशिश करें कि रात का भोजन बहुत देर से न करें और पर्याप्त नींद लें। नियमित सोने-जागने का समय शरीर की दिनचर्या को बनाए रखने में मदद कर सकता है।

दूध, दही, मलाई और मक्खन से परहेज क्यों?

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से दूध से बने कुछ खाद्य पदार्थों को भारी या गुरु माना जाता है, खासकर जब इनका सेवन ज्‍यादा मात्रा में किया जाए। इसलिए जोड़ों के दर्द के दौरान दूध, दही, मलाई और मक्खन का सेवन कम करने या व्यक्ति की प्रकृति और समस्या के अनुसार उनसे बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, हर व्यक्ति को इन चीजों को पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं होती। खासकर अगर डाइट में इनसे प्रोटीन या कैल्शियम मिलता है, तो बिना डॉक्‍टर की सलाह के इनसे पूरी तरह परहेज न करें।

जोड़ों में भारीपन या सूजन होने पर गौर करें

अगर जोड़ों में भारीपन, सूजन, गर्माहट, रेडनेस या दर्द महसूस हो रहा है, तो इसे केवल सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज न करें। सूजन के पीछे चोट, ज्‍यादा इस्तेमाल, गठिया या कोई अन्य समस्या हो सकती है। ऐसे में ज्‍वॉइंट्स पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें और अगर सूजन बार-बार हो रही है, बढ़ रही है या दर्द लगातार बनी हुई है, तो डॉक्टर से जांच कराएं।

न‍िष्‍कर्ष:

जोड़ों के दर्द को दूर करने के ल‍िए नीलग‍िरी तेल का इस्‍तेमाल फायदेमंद माना जाता है। इसमें एंटीसेप्टिक, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं। इसे कर‍ियर ऑयल के साथ म‍िक्‍स करके दर्द वाले स्‍थान पर हल्‍के हाथ से लगाएं। इस तरह जल्‍द आराम म‍िल सकता है। जोड़ों में दर्द होने पर गुरु आहार के सेवन से बचना चाह‍िए। गुरु आहार वो होते हैं जो पचने में ज्‍यादा समय लगाते हैं। ज्यादा तला-भुना, भारी या जरूरत से ज्यादा भोजन करने से बचें। साथ ही, दूध, दही, मलाई और मक्खन भी गुरु आहार माने जाते हैं इसल‍िए जोड़ों की तकलीफ में इनका भी सीमि‍त सेवन करना चाह‍िए। अगर जोड़ों में भारीपन, सूजन, गर्माहट, रेडनेस या दर्द हो, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें।

image credit: magnific

FAQ

  • क्या जोड़ों के दर्द में गर्म सिंकाई कर सकते हैं?

    गर्म सिंकाई कुछ लोगों में मांसपेशियों की जकड़न और दर्द से अस्थायी राहत दे सकती है। अगर चोट लगी है, तो गर्म स‍िंकाई से बचें।
  • क्या जोड़ों के दर्द में ठंडी सिंकाई कर सकते हैं?

    नई चोट या सूजन के कुछ मामलों में ठंडी सिंकाई से राहत म‍िल सकती है। इसे सीधे त्वचा पर बहुत देर तक न लगाएं और लगातार सूजन होने पर डॉक्टर से सलाह लें।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 16, 2026 17:39 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma

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