डायबिटीज और बढ़ते वजन की समस्या बहुत गंभीर होती जा रही है। इसलिए लोग इसे मैनेज करने के लिए करेला या कंटोला की सब्जी खाना पसंद करते हैं। लोगों का मानना है कि ऐसा करके उनकी डायबिटीज और वजन कंट्रोल पर असर पड़ेगा। क्या सच में डायबिटीज या वजन कम करने में करेला या कंटोला महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं? यह जानने के लिए हमने Dr. Chetan Sharma, Sr. Ayurveda Consultant, Sarvodaya Hospital, Faridabad से बात की।
उन्होंने बताया कि डायबिटीज के मामले में करेले पर ज्यादा रिसर्च हो चुकी है, लेकिन इसका मतलब है कि करेला डायबिटीज की दवा नहीं है और न ही इससे वजन अपने-आप कम होता है।
डायबिटीज में करेले के फायदे
Dr. Chetan Sharma कहते हैं, “आयुर्वेद में करेला अपने तिक्त यानी कड़वे रस के कारण जाना जाता है और पारम्परिक रूप से इसे डाइट और डायजेशन से जोड़कर देखा जा सकता है, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि व्यक्ति को रोजाना ज्यादा करेला खाना चाहिए। अगर किसी डायबिटीज का मरीज दवाएं भी ले रहा है, तो उसे डाइट में बदलाव करने से पहले एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए। कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह लिए सुबह खाली पेट करेले का जूस पीने लगते हैं, जिससे कई तरह के गंभीर नुकसान हो सकते हैं।”
Journal of Ethnopharmacology में प्रकाशित अध्ययन में 30 प्री-डायबिटिक लोगों को 4 हफ्तों के लिए करेले के जूस का पाउडर दिया गया।
- इसे 4 हफ्तों पर चेक किया गया, तो पाया गया कि जिन लोगों का शुरुआती फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज ज्यादा था, उनका करेला खाने से कम हुआ था।
- इसके साथ एक और स्टडी की गई जिसमें 38 प्री-डायबिटिक लोगों को 12 हफ्ते के लिए करेले के पूरे फल का पाउडर दिया गया। इसमें पाया गया कि फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज में कमी दर्ज की गई।
- दोनों ही स्टडीज में प्री-डायबिटिक मरीजों को करेले से कोई नुकसान नहीं हुआ।

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डायबिटीज में कंटोला के फायदे
Dr. Chetan Sharma ने कहा, “कंटोला मौसमी सब्जी है, जिसे कई लोग रोजाना खाते हैं। कंटोला में डाइटरी फाइबर के साथ कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो सेहतमंद रखने में फायदेमंद होते हैं। हालांकि, कंटोला को लेकर ज्यादा स्टडी नहीं हुई है। इसलिए डायबिटीज के लिए यह कितनी फायदेमंद है, यह कहना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन बेहतर स्वास्थ्य के लिए कंटोला को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।”
Journal of Traditional and Complementary Medicine में प्रकाशित स्टडी में बताया गया है कि कंटोला की पत्तियों, फलों का इस्तेमाल डायबिटीज के लिए किया जाता है। इस स्टडी में डायबिटीज चेक करने के लिए चूहों को कंटोला फल दिया गया। 21 दिनों तक इलाज के बाद चूहों के लिवर, किडनी, पैंक्रियाज चेक किया गया, तो पाया गया कि जिन चूहों को डायबिटीज था, उनमें लिवर, किडनी और पैंक्रियाज बेहतर रहा। हालांकि, यह स्टडी इंसानों पर नहीं की गई।
वजन घटाने में करेला या कंटोला कौन बेहतर है?
Dr. Chetan Sharma कहते हैं, “अगर किसी को अपना वजन कम करना है, तो करेले या कंटोला पर निर्भर रहना सही नहीं है। हालांकि, कंटोला में डाइटरी फाइबर होते हैं, जो कब्ज जैसी परेशानियों को कम करने में मदद कर सकते हैं। वजन कम करने के लिए डाइट में कुल कैलोरी, प्रोटीन, फाइबर, फिजिकल एक्टिविटी और पर्याप्त नींद बहुत जरूरी हैं। करेले या कंटोला से जुड़ी किसी भी तरह की स्टडी सामने नहीं आई है, जिसमें पता चल सके दोनों में से कोई भी वजन कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।”
करेले या कंटोला में क्या बेहतर है?
Dr. Chetan Sharma ने कहा, “अगर डायबिटीज को कंट्रोल करना है, तो करेला बेहतर है। वहीं कंटोला मौसमी सब्जी है, जिसे अपने खाने में जरूर शामिल करना चाहिए। कंटोला को पाचन के लिए लेना फायदेमंद है। दोनों ही सब्जियां पोषक तत्वों से भरपूर है, जो पूरी सेहत के लिए बेहतर हैं। इसलिए किसी एक सब्जी को बेहतर नहीं बताया जा सकता।”
आयुर्वेदाचार्य की सलाह
Dr. Chetan Sharma सलाह देते हैं कि लोग अक्सर करेले को बहुत ज्यादा तेल में तलकर खाते हैं, जिससे इसके फायदे कम हो सकते हैं। वहीं कुछ लोग करेले का जूस बनाकर पीते हैं, जिसे डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए। वहीं कंटोला को भी बहुत ज्यादा तेल में न भूनें। कम तेल और कम नमक में सब्जियां बनाने से ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर, दोनों के लिए बेहतर है।
निष्कर्ष
डायबिटीज को मैनेज करने के लिए करेला और कंटोला दोनों लिए जा सकते हैं, लेकिन इसे दवा की तरह इस्तेमाल न करें। डायबिटीज और वजन को मैनेज करने के लिए रोजाना फिजिकल एक्टिविटी, डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करना बहुत जरूरी है।
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FAQ
क्या करेले का कसैलापन दूर करने के लिए उसे नमक में भिगोने से उसके औषधीय गुण कम हो जाते हैं?
करेले को नमक में भिगोकर उसका पानी निचोड़ने से उसके कई पानी में घुलनशील विटामिन C, बी-कॉम्प्लेक्स और एंटी-डायबिटिक मिनरल्स नष्ट हो जाते हैं। कंटोला में यह समस्या नहीं होती क्योंकि यह स्वाभाविक रूप से स्वादिष्ट और कम कड़वा होता है।क्या बच्चों को पोषण देने के लिए करेला या कंटोला में से कौन-सा देना बेहतर है?
कंटोला बच्चों के लिए कहीं बेहतर है। यह कड़वा नहीं होता, पचने में आसान है और इसमें बच्चों के शारीरिक विकास के लिए आवश्यक प्लांट प्रोटीन, आयरन और कैरोटीनॉयड प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
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Sep 16, 2026 15:29 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Chetan Sharma