Suji vs Dalia in Hindi: आजकल डायबिटीज, बीपी और डाइजेशन को लेकर लोगों को कई तरह की समस्याएं हो रही हैं और इसका मुख्य कारण मोटापा है, इसलिए लोग वजन घटाने के लिए ज्यादा सजग हो गए हैं। जिम या पार्क में कसरत करने के साथ-साथ डाइट का भी पूरा ध्यान रखा जा रहै है और इसमें ब्रेकफास्ट सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। अक्सर लोगों को ब्रेकफास्ट को लेकर भी कन्फ्यूजन रहती है कि इसमें क्या होना चाहिए सूजी या दलिया? दरअसल, भारतीय घरों में दोनों को ही ब्रेकफास्ट में इस्तेमाल किया जाता है, तो ऐसे में सवाल उठता है कि डायबिटीज और वजन कम करने के लिए कौन सा सबसे बेहतर ब्रेकफास्ट है? इस बारे मे जानने के लिए हमने फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल की चीफ डाइटिशियन मीना कुमारी (Ms Meena Kumari, Chief Dietician, Sarvodaya Hospital, Faridabad) से बात की। उन्होंने बताया कि सबसे पहले दलिया और सूजी के बीच फर्क समझना बहुत जरूरी है।
सूजी और दलिया में फर्क
चीफ डाइटिशियन मीना कुमारी कहती हैं, “सूजी रिफाइंड गेहूं से बनाई जाती है जिसमें गेहूं की ऊपरी परत और फाइबर का बड़ा हिस्सा प्रोसेसिंग में निकल जाता है। दलिया साबुत गेहूं को हल्का तोड़कर बनाया जाता है, जिसमें फाइबर और पोषक तत्व काफी हद तक सेफ रहते है। इसलिए इन दोनों के न्यूट्रिशन में फर्क होता है, जिसमें फाइबर और ग्लाइसेमिक इंडेक्स का काफी अंतर है।”

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सूजी और दलिया में फाइबर की मात्रा
मीना कुमारी कहती हैं कि अगर 100 ग्राम दलिया और सूजी की बात करें, तो दलिया में फाइबर की मात्रा सूजी से कहीं ज्यादा होती है। इसके अलावा, आयरन, मैग्नीशियम और जिंक जैसे मिनरल्स भी दलिया में अच्छे होते हैं। इसके उलट, सूजी में कैलोरी ज्यादा होती है और बहुत जल्दी पच जाता है। फाइबर कम होने की वजह से सूजी का बना नाश्ता करने से थोड़ी देर में भूख लगने लगती है। इससे ओवरईटिंग का रिस्क बढ़ जाता है। इसलिए अगर लंबे समय तक पेट भरने, एनर्जी और वजन कंट्रोल करना है, तो दलिया काफी बेहतर ऑप्शन है। ”
सूजी और दलिया का ग्लाइसेमिक इंडेक्स
मीना कुमारी कहती हैं, “जिन लोगों को डायबिटीज की शिकायत है या फिर प्रीडायबिटिक स्टेज में हैं, तो उन्हें ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) जरूर समझना चाहिए। दलिया का GI लगभग 41-55 होता है जबकि सूजी का GI का लगभग 63-78 होता है। कम GI वाले फूड्स धीरे-धीरे पचते हैं और ब्लड शुगर को अचानक नही बढ़ाता। इस वजह से दलिया ब्लड शुगर को बैलेंस रखता है, इंसुलिन स्पाइक से बचाता है और डायबिटीज डाइट के लिए सेफ माना जाता है। वहीं सूजी खाने के बाद शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है, खासकर अगर उसे अकेले खाया जाए। इसलिए डायबिटीज मरीजों को अपने डाइट प्लान में दलिया शामिल करना चाहिए। अस्पतालों में वेट लॉस, कार्डियक और डायबिटिक डाइट में दलिया को प्राथमिक माना जाता है, जबकि सूजी को भी डाइट में रखा जाता है, लेकिन सीमित मात्रा में और सब्जियों, दाल या प्रोटीन के साथ लिया जाए।”
सूजी या दलिया में से कौन सा बेहतर है?
चीफ डाइटिशियन मीना कुमारी कहती हैं, “अगर किसी को लगता है कि कम खाने के बावजूद वजन कम नहीं हो रहा, तो उन्हें दलिया चुनना चाहिए। इससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और कैलोरी कंट्रोल में मदद मिलती है, वहीं सूजी तुरंत एनर्जी देता है लेकिन भूख भी बहुत जल्दी लगती है। इसलिए वजन घटाने या कंट्रोल करने वालों के लिए दलिया बेहतर ऑप्शन है। इसके अलावा, मैंने कई केस देखें हैं, जिसमें लोग सूजी खाने के बाद भारीपन, गैस और एसिडिटी की शिकायत करते हैं। इसलिए मैं उन सभी को दलिया का ऑप्शन सजेस्ट करती हूं।”
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दलिया बनाने के तरीके
मीना कुमारी कहती हैं कि दलिया सिर्फ बीमारों का खाना नहीं है, इसे सब्जियों के साथ दलिया उपमा, दलिया खिचड़ी, दही और सब्जियों के साथ दलिया पुलाव के साथ लिया जाए, तो यह काफी बेहतर हो सकता है। इसके साथ सूजी को भी सीमित मात्रा में लिया जा सकता है।
निष्कर्ष
अगर किसी का ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं आ रहा, वजन तेजी से बढ़ रहा है और डाइजेशन की समस्या लगातार बनी रहती है, तो डाइडिशियन या डॉक्टर की सलाह जरूर लें और अपने डाइट प्लान पर काम करें क्योंकि सही और न्यूट्रिशन से भरपूर खाना कई बीमारियों से बचाता है।
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Current Version
Jan 30, 2026 11:05 IST
Modified By : Aneesh Rawat Jan 30, 2026 11:05 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dt Meena Kumari