कई लोग यह शिकायत करते हैं कि सुबह उठते ही एड़ी में तेज दर्द उठता है। कुछ को दर्द इतना तेज होता है कि वे जमीन पर चल भी नहीं पाते। एड़ी के दर्द के कारण काम प्रभावित हो सकता है और चलने में परेशानी हो सकती है। इसकी जांच जरूरी है। हालांकि, कुछ आयुर्वेदिक उपाय है जिनकी मदद से अस्थायी राहत मिल सकती है। दर्द और सूजन को कम करने के लिए निर्गुंडी, शुंठी जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल कर सकते हैं, नीलगिरी और तिल के तेल से मालिश कर सकते हैं और अजवाइन की पोटली बनाकर सिंकाई कर सकते हैं। आइए जानते हैं इन उपायों की मदद से एड़ी का दर्द कैसे दूर कर सकते हैं? बेहतर जानकारी के लिए हमने Ayurveda Expert Dr. Shrey Sharma, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।
| एड़ी का दर्द दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय | |
| निर्गुंडी का प्रयोग | शुंठी का प्रयोग |
| तिल के तेल से मालिश | नीलगिरी के तेल से मालिश |
| अजवाइन की पोटली से सिंकाई |
1. दर्द और सूजन राहत देने वाली जड़ी-बूटी निर्गुंडी
निर्गुंडी एक औषधीय पौधा है, जिसे आयुर्वेद में दर्द, सूजन और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। इसमें फ्लेवोनॉइड और अन्य वनस्पति यौगिक पाए जाते हैं। इसके अर्क पर किए गए कुछ प्रयोगों में सूजन कम करने वाले गुण देखे गए हैं।
कैसे इस्तेमाल करें?
- निर्गुंडी के पत्तों का लेप या तेल एड़ी पर लगाकर मालिश कर सकते हैं।
- खुले घाव, फटी त्वचा या जलन वाली जगह पर इसका इस्तेमाल न करें।
जरूरी सावधानियां:
पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर लगाकर प्रतिक्रिया देखें। खुजली, रेडनेस या जलन होने पर इस्तेमाल बंद कर दें। गर्भावस्था या स्तनपान के दौरान इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
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2. शुंठी या सूखी अदरक का इस्तेमाल
शुंठी, सूखी अदरक को कहते हैं। आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल कई प्रकार के दर्द और पाचन संबंधित समस्याओं के लिए किया जाता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो एड़ी के दर्द और सूजन से राहत दे सकते हैं।
साल 2020 में Phytotherapy Research में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, अदरक में मौजूद जिंजरॉल और शोगॉल जैसे सक्रिय यौगिक, सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं। अध्ययन में अदरक के इस्तेमाल से मांसपेशियों के दर्द और सूजन में कमी देखी गई।
कैसे इस्तेमाल करें?
- शुंठी के चूर्ण का सेवन गुनगुने पानी के साथ कर सकते हैं।
- शुंठी के लेप को भी एड़ी पर लगाया जा सकता है।
जरूरी सावधानियां:
- शुंठी को एड़ी पर लगाने या गर्म लेप बनाने से पहले सावधानी बरतें, क्योंकि इससे त्वचा में जलन हो सकती है।
- ब्लड थिनर लेने वाले लोग शुंठी के अधिक सेवन से पहले डॉक्टर से जानकारी लें।
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3. तिल के तेल से मालिश कर सकते हैं
तिल के बीजों से निकाला गया तेल आयुर्वेद में अभ्यंग यानी तेल से मालिश के लिए इस्तेमाल होता है। हल्की मालिश से आस-पास की मांसपेशियों में तनाव कम महसूस हो सकता है।
कैसे इस्तेमाल करें?
- थोड़ी मात्रा में तिल का तेल लें।
- एड़ी और उसके आस-पास हल्के हाथ से 3 से 5 मिनट मालिश करें।
- एड़ी के तलवे में तेज दर्द हो, तो दबाव न डालें और दर्द बढ़ने पर मालिश रोक दें।
जरूरी सावधानियां:
- तिल से एलर्जी होने पर तिल का तेल न लगाएं।
- फटी त्वचा, घाव या संक्रमण वाली जगह पर मालिश न करें।
- एड़ी की हड्डी या आस-पास के टिशूज में चोट होने की आशंका हो, तो त्वचा को जोर से दबाने से बचें।
4. एड़ी के दर्द से राहत देने वाला नीलगिरी तेल
नीलगिरी के पत्तों से निकाला गया तेल एक सुगंधित तेल है। इसमें मौजूद गुण मांसपेशियों के दर्द को कम करने में मदद कर सकते हैं।
साल 2013 में Evidence Based Complementary And Alternative Medicine नामक जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, नीलगिरी तेल को घुटने की सर्जरी करवा चुके मरीजों को दिया गया और उन्हें दर्द से कुछ हद तक राहत मिली। अध्ययन में नीलगिरी तेल को मांसपेशियों के दर्द को दूर करने के लिए कुछ हद तक असरदार बताया है।
कैसे इस्तेमाल करें?
नीलगिरी तेल को नारियल या बादाम तेल के साथ 4 से 5 बूंद जितनी मात्रा में पैरों पर लगाएं और मालिश करें।
जरूरी सावधानियां:
- नीलगिरी का शुद्ध तेल त्वचा में जलन पैदा कर सकता है।
- इसे आंखों और मुंह से दूर रखें वरना जलन या सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
5. अजवाइन की पोटली से सिंकाई कर सकते हैं
अजवाइन को कपड़े में बांधकर हल्का गर्म करके, उससे सिंकाई करना एक घरेलू नुस्खा है। गर्म सिंकाई से कुछ लोगों को मांसपेशियों की अकड़न और दर्द में राहत मिल सकती है।
कैसे इस्तेमाल करें?
- थोड़ी अजवाइन को साफ सूती कपड़े में बांधें।
- पोटली को हल्का गर्म करें और तापमान को हाथ से चेक करें।
- इसे एड़ी पर लगभग 5 से 10 मिनट तक हल्के से रखें।
- दर्द बढ़ने, जलन या असहजता होने पर तुरंत हटा दें।
जरूरी सावधानियां:
- बहुत गर्म अजवाइन की पोटली से सिंकाई न करें।
- डायबिटीज, पैरों में सुन्नपन या ब्लड सर्कुलेशन की समस्या होने पर गर्म सिंकाई से जलने का खतरा बढ़ सकता है।
एड़ी में दर्द होने पर क्या करें?
- एड़ी में दर्द होने पर सिर्फ तेल, लेप या सिंकाई पर निर्भर रहने के बजाय एड़ी पर पड़ने वाला दबाव कम करना भी जरूरी है।
- एड़ी में दर्द है, तो सही जूते पहनें जो मुलायम और आरामदायक हों और एड़ी को सहारा दें।
- घर में भी कठोर फर्श पर नंगे पैर चलने से बचें।
- पिंडली और एड़ी की स्ट्रेचिंग करें। इसे धीरे-धीरे करें और दर्द बढ़ने पर रोक दें।
- लंबे समय तक खड़े रहने से बचें। काम के दौरान बीच-बीच में बैठें और पैर को आराम दें।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
- अगर दर्द बहुत तेज हो
- पैर पर वजन न रख पाएं
- चोट के बाद दर्द शुरू हुआ हो
- एड़ी लाल और गर्म हो
- बुखार आए या दर्द लगातार बना रहे, तो डॉक्टर से जांच कराएं। खासकर, डायबिटिक मरीजों को पैरों के दर्द या घाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ध्यान रखें कि इन 5 आयुर्वेदिक उपायों में से किसी को भी एड़ी के दर्द का निश्चित इलाज नहीं माना जा सकता। इनका इस्तेमाल केवल घरेलू उपाय के रूप में करें और दर्द का कारण जानने के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।
निष्कर्ष:
एड़ी में दर्द होने पर निर्गुंडी, शुंठी जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, अभ्यंग यानी मालिश के लिए तिल के तेल और नीलगिरी तेल का इस्तेमाल करें। साथ ही, दर्द से राहत के लिए अजवाइन की पोटली से सिंकाई कर सकते हैं। एड़ी में दर्द होने पर आरामदायक जूते पहनें, कठोर फर्श पर नंगे पैर चलने से बचें, पिंडली और एड़ी की स्ट्रेचिंग करें। साथ ही, लंबे समय तक खड़े रहने से बचें।
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FAQ
एड़ी के दर्द में कौन से जूते पहनने चाहिए?
एड़ी के दर्द में ऐसे जूते चुनें जिनमें एड़ी को पर्याप्त कुशनिंग और सहारा मिले। बहुत पतली या कठोर चप्पलें, घिसे हुए जूते पहनने से दर्द बढ़ सकता है।क्या डायबिटीज के कारण एड़ी में दर्द हो सकता है?
डायबिटीज में पैरों की नसों और ब्लड सर्कुलेशन पर असर पड़ सकता है। इससे जलन, झनझनाहट, सुन्नपन या दर्द हो सकता है।
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Oct 14, 2026 21:21 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Shrey Sharma
