भारतीय परंपरा में स्नान से पहले शरीर पर तेल लगाने की आदत सदियों पुरानी है। आयुर्वेद में इसे अभ्यंग (Abhyanga) कहा जाता है, जो केवल एक सामान्य मालिश नहीं बल्कि शरीर की देखभाल का अहम हिस्सा माना जाता है। बदलती जीवनशैली, तनाव, अनियमित खानपान और लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदतों के बीच अभ्यंग के फायदे बढ़ जाते हैं, लेकिन आधुनिक समय में लोगोंं को जिम जाने या नई तकनीक वाली मशीनोंं का इस्तेमाल करने की आदत है। ऐसे में एक्सपर्ट से जानते हैं कि क्या स्नान से पहले तेल मालिश की परंपरा वाकई सेहतमंद है या यह केवल एक परंपरा है? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।
स्नान से पहले तेल मालिश है सेहतमंंद

- नियमित तेल मालिश से मांसपेशियों को आराम और पोषण मिलता है।
- मालिश के दौरान त्वचा और मांसपेशियों पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर हो सकता है।
- तेल त्वचा पर एक परत बनाता है, जिससे स्किन ड्राईनेस की समस्या दूर होती है।
- आयुर्वेद में अभ्यंग को समय से पहले उम्र बढ़ने के प्रभावों को कम करने का अच्छा उपाय माना जाता है। साल 2025 में Journal Of Swasthavritta And Yoga नामक जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, वात दोष को संतुलित रखने में अभ्यंग फायदेमंंद है। स्टडी में यह भी बताया गया है कि अभ्यंग (तेल मालिश) त्वचा की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में मददगार साबित हो सकती है।
- तेल मालिश के बाद शरीर हल्का और आरामदायक महसूस कर सकता है। इससे दिनभर की थकान कम करने में भी मदद मिल सकती है।
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अभ्यंग के लिए कौन सा तेल लगाएं?
तेल का चुनाव अक्सर स्थानीय मौसम के अनुसार किया जाता है-
- दक्षिण भारत और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में नारियल तेल का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है।
- उत्तर भारत में सरसों के तेल से मालिश करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।
- गुजरात और आसपास के इलाकों में मूंगफली का तेल लोकप्रिय माना जाता है।
- शरीर में कमजोरी महसूस होने पर तिल के तेल का इस्तेमाल फायदेमंंद माना जाता है।
- अगर किसी व्यक्ति को शरीर में ड्राईनेस और कमजोरी दोनों की समस्या हो, तो तिल के तेल और घृत (घी) को मिलाकर मालिश करने की सलाह दी जाती है। बच्चों के लिए भी कई बार तेल और घी का मिश्रण उपयोग किया जाता है।
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तेल में जड़ी-बूटियां मिलाने के क्या फायदे हैं?
आयुर्वेदिक तेलों में कई बार विशेष जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है ताकि उनके गुण और बढ़ सकें। जैसे-
- अश्वगंधा
- दशमूल
- शतावरी
इन औषधियों को तेल में मिलाकर तैयार किए गए मिश्रण को शरीर की मजबूती और पोषण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। माना जाता है कि ये जड़ी-बूटियां शरीर को एनर्जी और थकान कम करने में फायदेमंंद हो सकती हैं।
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अभ्यंग करने का सही तरीका
- सुबह के समय खाली पेट मालिश करना अच्छा माना जाता है।
- सुबह उठकर पानी पिएं और फिर मालिश करें।
- सिर से पैर तक धीरे-धीरे मालिश करें।
- स्नान से कम से कम 30 मिनट पहले तेल लगाना चाहिए।
- अगर समय है, तो स्नान से दो घंटे पहले तेल लगाना और भी बेहतर माना जाता है।
- एक्सरसाइज से पहले भी हल्की मालिश कर सकते हैं।
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मानसून में क्यों कम करनी चाहिए तेल मालिश?
आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार मानसून के मौसम में बहुत अधिक तेल मालिश करने से बचना चाहिए। इस मौसम में वातावरण में नमी अधिक होती है, इसलिए जरूरत के अनुसार हफ्ते में केवल एक से दो बार अभ्यंग करना पर्याप्त माना जाता है। इससे शरीर को लाभ भी मिलता है और मौसम का दुष्प्रभाव भी शरीर पर नहीं होता है।
निष्कर्ष:
स्नान से पहले तेल मालिश की परंपरा सेहत के लिए फायदेमंद है। स्नान से दो घंंटे पहले मालिश करें, जल्दी हो, तो आधा घंटा पहले भी कर सकते हैं। मालिश के लिए सरसोंं का तेल, नारियल तेल, मूंंगफली का तेल, तिल का तेल और तेल और घृत के मिश्रण का इस्तेमाल कर सकते हैं।
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Jun 03, 2026 12:23 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Jun 03, 2026 12:23 IST
Modified By : Yashaswi MathurJun 03, 2026 12:23 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Shrey Sharma