पीरियड के दौरान होने वाला दर्द हर महिला में अलग-अलग होता है। कुछ महिलाओं को बहुत ज्यादा क्रैम्प्स होते हैं, जबकि कुछ को दर्द का पता भी नहीं चल पाता है। हालांकि, कुछ महिलाओं को पीरियड्स के दौरान अचानक बहुत ज्यादा दर्द होने लगता है, जो दर्द की दवा लेने के बाद भी ठीक नहीं होता है। Dr.(Prof.) Anju Suryapani, Sr. Consultant - Obstetrics & Gynaecology, Metro Hospital, Noida कहती हैं कि पीरियड्स के दौरान नॉर्मल पेट दर्द होना सामान्य बात है, लेकिन बहुत ज्यादा असहनीय दर्द बिल्कुल भी नॉर्मल नहीं होता है। यह दर्द किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
पीरियड्स में बहुत ज्यादा दर्द होने के कारण
साल 2025 में Molecular Pain में प्रकाशित स्टडी के अनुसार पीरियड में दर्द होने का मुख्य कारण गर्भाशय में प्रोस्टाग्लैंडिंस का बढ़ा हुआ लेवल है, जो बहुत तेज सिकुड़न पैदा करता है। प्रोस्टाग्लैंडिंस के अलावा 12-HETE और प्लेटलेट-एक्टिवेटिंग फैक्टर जैसे अणु भी दर्द को बढ़ा सकते हैं।
Dr. Anju Suryapani के अनुसार, पीरियड्स में बहुत ज्यादा दर्द होने की समस्या को डिस्मैनोरिया (Dysmenorrhea) कहा जाता है और इसके होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे:
1. प्रोस्टाग्लैंडिंस लेवल का बढ़ना
पीरियड्स के दौरान महिलाओं के शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिंस का लेवल काफी ज्यादा बढ़ जाता है। जब पीरियड शुरू होने वाला होता है, तो गर्भाशय अपनी अंदरूनी परत को बाहर निकालने के लिए सिकुड़ता है। इस सिकुड़न को बढ़ावा देने के लिए शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिन (Prostaglandins) नाम का एक केमिकल रिलीज होता है। जिन महिलाओं के शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिन का लेवल बहुत ज्यादा बनता है, उनके गर्भाशय में बहुत तेज और दर्दनाक ऐंठन होती है। इससे गर्भाशय के ब्लड वेसल्स में कुछ समय के लिए ऑक्सीजन की कमी होने लगती है, जिससे पेट के निचले हिस्से, कमर और जांघों में तेज दर्द होता है।
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2. एंडोमेट्रियोसिस
पीरियड्स में लगातार और ज्यादा दर्द होना एंडोमेट्रियोसिस जैसी गंभीर बीमारी के कारण हो सकता है। इस समस्या में गर्भाशय के अंदर की परत के समान ऊतक गर्भाशय के बाहर विकसित होने लगते हैं। हर महीने पीरियड्स के दौरान यह बाहरी टिश्यू भी टूटता और ब्लीड करता है, लेकिन इस खून के बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं होता है। इसके कारण अंदरूनी अंगों में सूजन, घाव और सिस्ट बनने लगते हैं, जिससे पीरियड्स के दौरान और उसके बाद भी काफी दर्द महसूस होता है।
3. यूटेराइन फाइब्रॉएड
फाइब्रॉएड गर्भाशय की दीवार में बनने वाली नॉन-कैंसरस गांठें या ट्यूमर होते हैं। अगर गर्भाशय में फाइब्रॉएड बन गए हैं, तो पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है, खून के थक्के आते हैं और पेट के निचले हिस्से में भारीपन व तेज दर्द महसूस होता है। फाइब्रॉएड का साइज छोटा या काफी बड़ा भी हो सकता है, जो आसपास के अंगों पर दबाव डालता है।
4. एडेनोमायोसिस
यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत गर्भाशय की बाहरी मांसपेशियों की दीवार के अंदर तक बढ़ने लगती है। इसके कारण गर्भाशय का आकार बढ़ जाता है। पीरियड के दौरान गर्भाशय पर ज्यादा दबाव पड़ता है, जिससे पेट में तेज मरोड़ और ब्लीडिंग की समस्या भी काफी ज्यादा बढ़ जाती है। यह समस्या अक्सर 30 से 40 साल की महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है।
5. पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज
पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID) महिला प्रजनन अंगों में होने वाला एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है। यह इंफेक्शन अक्सर बैक्टीरिया के योनि से गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब या ओवरी तक फैलने से होता है। अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह प्रजनन अंगों में सूजन और स्कार टिश्यू यानी घाव बना देता है। इसके कारण न सिर्फ पीरियड के दौरान, बल्कि आम दिनों में भी पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द रहता है।
6. गर्भाशय ग्रीवा का सिकुड़ना
कुछ महिलाओं में गर्भाशय का निचला मुंह यानी सर्विक्स जन्मजात या किसी सर्जरी के कारण बहुत ज्यादा टाइट होता है। इसके कारण पीरियड का ब्लड आसानी से बाहर नहीं निकल पाता है। गर्भाशय को उस खून को बाहर निकालने के लिए बहुत ज्यादा जोर से सिकुड़ना पड़ता है, जिससे पेट में बहुत तेज मरोड़ और दर्द महसूस होता है।
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7. कॉपर-टी का इस्तेमाल
अगर आपने गर्भनिरोधक के रूप में कॉपर-टी लगवाया है तो शुरुआत के 3 से 6 महीनों तक पीरियड के दौरान सामान्य से ज्यादा ऐंठन और दर्द होना एक आम बात है। हालांकि, अगर यह दर्द 6 महीने के बाद भी लगातार बना रहता है, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
पीरियड में ज्यादा दर्द होने पर राहत पाने के लिए क्या करें?
Dr. Anju Suryapani का कहना है कि पीरियड्स होने पर बहुत ज्यादा दर्द होने पर राहत पाने के लिए आप इन टिप्स को फॉलो कर सकते हैं:
- पेट के निचले हिस्से और कमर पर गर्म पानी की थैली से सिकाई करें। यह गर्भाशय की मांसपेशियों को आराम देने में मदद कर सकता है।
- पीरियड से पहले और दौरान हल्की वॉक, बटरफ्लाई पोज या भुजंगासन करने से पेल्विक एरिया में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, जिससे दर्द कम हो सकता है।
- कैफीन, शराब,ज्यादा नमक और जंक फूड से बचना चाहिए, क्योंकि ये वॉटर रिटेंशन और सूजन की समस्या को बढ़ा सकते हैं। इसलिए, आप अदरक या कैमोमाइल टी पिएं।
- शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए दिनभर में भरपूर मात्रा में पानी पिएं ताकि ब्लोटिंग और ऐंठन की समस्या को कम किया जा सके।
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कब डॉक्टर के पास जाएं?
Dr. Anju Suryapani के मुताबिक, अगर आपको ये लक्षण नजर आएं तो डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है:
- पीरियड दर्द इतना तेज हो जाए कि रोजमर्रा के जीवन पर असर पड़े
- पेनकिलर से भी दर्द में राहत न मिलना
- पीरियड में बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो
- दर्द के साथ तेज बुखार होना
- उल्टी, चक्कर आना या बदबूदार डिस्चार्ज होना
- पीरियड खत्म होने के बाद भी पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द की समस्या रहना
निष्कर्ष
पीरियड्स में दर्द सहन करना जरूरी नहीं होता है। खासकर अगर आपको दर्द बहुत ज्यादा हो तो यह आपकी लाइफस्टाइल को प्रभावित कर सकता है। पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा दर्द होना किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसलिए, अगर अचानक आपको भी पीरियड्स होने पर ज्यादा दर्द होने लगा है तो तुरंत डॉक्टर से मिलना और दर्द होने के पीछे के कारणों का पता लगाना जरूरी है।
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FAQ
कौन सा फल पीरियड के दर्द को कम करता है?
केला, पपीता और बेरीज जैसे फल पीरियड के दर्द और ऐंठन को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसलिए, आप इन फलों को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।पीरियड के दर्द को कम करने के लिए क्या करें?
पीरियड के दर्द को कम करने के लिए आप अपने पेट के निचले हिस्से पर गर्म सिकाई करें, गुनगुना पानी पिएं और पोषक तत्वों से भरपूर चीजों का सेवन करें।
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Sep 06, 2026 16:34 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Anju Suryapani
