Thu Oct 15, 2026 | 12:44 AM IST

Medically Reviewed by Dr M V Jyothsna , Consultant Obstetrician & Gynaecologist

पीरियड्स की डेट से पहले हो रहे हैं क्रैम्प्स? कैसे जानें यह ओव्यूलेशन का दर्द है या कोई दूसरी समस्या

पीरियड्स से पहले क्रैम्प्स ओव्यूलेशन का दर्द भी हो सकता है, लेकिन अगर दर्द तेज या असामान्य हो तो यह हार्मोनल असंतुलन का संकेत भी हो सकता है।
पीरियड्स की डेट से पहले हो रहे हैं क्रैम्प्स? कैसे जानें यह ओव्यूलेशन का दर्द है या कोई दूसरी समस्यापीरियड्स की डेट से पहले हो रहे हैं क्रैम्प्स? कैसे जानें यह ओव्यूलेशन का दर्द है या कोई दूसरी समस्या

पीरियड से पहले पेट के निचले हिस्से में होने वाला दर्द या क्रैम्प्स महिलाओं में एक आम समस्या बन चुकी है। कई बार यह दर्द हल्का और अस्थायी होता है, जबकि कुछ मामलों में यह काफी तेज और असहज भी हो सकता है। अक्सर महिलाएं यह समझ नहीं पातीं कि यह दर्द ओव्यूलेशन के कारण हो रहा है या किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत है। सही जानकारी न होने के कारण चिंता बढ़ जाती है और कई बार महिलाएं बिना सोचे समझे दवाएं भी ले लेती हैं। इस लेख में यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद की कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिशियन और गायनेकोलॉजिस्ट, डॉ. एम. वी. ज्योत्सना से जानिए, पीरियड्स की डेट से पहले होने वाले क्रैम्प्स ओव्यूलेशन का दर्द है या कोई दूसरी समस्या है?

पीरियड्स की डेट से पहले होने वाले क्रैम्प्स का कारण

डॉक्टर एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, शरीर के संकेतों को सही तरीके से समझकर ही इसके कारण का अनुमान लगाया जा सकता है। ओव्यूलेशन क्रैम्प्स की दिक्कत आमतौर पर पीरियड से लगभग 10-16 दिन पहले होती है, जब अंडाशय से अंडा रिलीज होता है। डॉक्टर एम. वी. ज्योत्सना बताती हैं कि यह दर्द अक्सर हल्का से मध्यम होता है और एक तरफ महसूस होता है। यह दर्द कुछ घंटों से लेकर 1-2 दिनों तक रह सकता है। इसके साथ हल्का ब्लोटिंग या सफेद डिस्चार्ज भी देखा जा सकता है। यदि दर्द बहुत ज्यादा नहीं है और हर महीने लगभग एक ही समय पर होता है, तो यह ओव्यूलेशन क्रैम्प्स हो सकता है।

इसे भी पढ़ें: PCOS में LH और FSH का क्या रोल है? डॉक्टर से जानें इसकी सही रेंज

यदि पीरियड से पहले होने वाला दर्द तेज, लगातार और असहनीय हो, तो यह किसी अन्य समस्या का संकेत हो सकता है। डॉक्टर एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस, पीसीओएस, फाइब्रॉइड या पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज जैसी स्थितियों में भी क्रैम्प्स हो सकते हैं। इसके अलावा, यदि दर्द के साथ तेज बुखार, असामान्य ब्लीडिंग, बदबूदार डिस्चार्ज या पेशाब में दर्द हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

सामान्य और असामान्य क्रैम्प्स में फर्क कैसे करें?

सामान्य ओव्यूलेशन क्रैम्प्स हल्के, अस्थायी और हर महीने एक पैटर्न में होते हैं। वहीं, असामान्य क्रैम्प्स अचानक शुरू हो सकते हैं, ज्यादा तेज हो सकते हैं और रोजमर्रा के काम में बाधा डाल सकते हैं। डॉक्टर एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, दर्द का समय और साथ में दिखने वाले अन्य लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है। यदि दर्द लगातार बढ़ रहा हो या पैटर्न बदल रहा हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इसे भी पढ़ें: PCOS का फर्टिलिटी पर कैसे असर पड़ता है? डॉक्टर से जानें कंसीव करने के लिए क्या करें

cramps before due periodcramps before due period

साल 2023 में StatPearls की Bookshelf में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मिटलश्मेर्ज (Mittelschmerz) यानी ओव्यूलेशन का दर्द, महिलाओं में पीरियड्स के बीच (7वें से 24वें दिन) होने वाला एक सामान्य पेट दर्द है। यह फर्टिलिटी एज की लगभग 40% महिलाओं को हर महीने प्रभावित करता है, जो पीरियड्स शुरू होने के कुछ सालों बाद शुरू होता है। यह दर्द हल्का या बहुत तेज हो सकता है, जो उसी तरफ महसूस होता है जिस तरफ अंडा विकसित हो रहा हो। यह दर्द शरीर में LH हार्मोन बढ़ने के कारण होता है। LH हार्मोन बढ़ने से अंडाशय की मांसपेशियों में खिंचाव और संकुचन (contraction) होता है, जिससे यह दर्द पैदा होता है।

डॉक्टर की सलाह

अनियमित खानपान, तनाव, नींद की कमी और फिजिकल एक्टिविटी की कमी हार्मोनल असंतुलन को बढ़ा सकती है, जिससे पीरियड से पहले दर्द ज्यादा महसूस हो सकता है। पर्याप्त पानी पीना, योग और बैलेंस डाइट क्रैम्प्स को कम करने में मदद कर सकती है। डॉक्टर एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने से हार्मोनल बैलेंस बेहतर होता है और दर्द कम हो सकता है। यदि हर महीने दर्द बहुत ज्यादा हो, समय के साथ बढ़ता जाए या सामान्य दवाओं से भी आराम न मिले, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। अल्ट्रासाउंड और हार्मोन टेस्ट से सही कारण का पता लगाया जा सकता है।

निष्कर्ष

पीरियड से पहले होने वाले क्रैम्प्स कई बार ओव्यूलेशन का सामान्य हिस्सा होते हैं, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता। डॉक्टर एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, दर्द की प्रकृति, समय और अन्य लक्षणों को समझना बेहद जरूरी है। यदि कोई असामान्य संकेत दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय समय पर डॉक्टर की सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है। सही जानकारी और देखभाल से इस समस्या को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।

All Image Credit- magnific

FAQ

  • क्या तनाव से पीरियड क्रैम्प्स बढ़ सकते हैं?

    तनाव हार्मोनल असंतुलन बढ़ाकर पीरियड्स के दौरान दर्द बढ़ा सकता है।
  • क्या पीसीओएस से क्रैम्प्स हो सकते हैं?

    हां, पीसीओएस में हार्मोनल बदलाव से दर्द पीरियड्स के दौरान दर्द हो सकता है।
  • क्रैम्प्स कम करने के घरेलू उपाय क्या हैं?

    मेडिटेशन, हल्की एक्सरसाइज,गर्म सिकाई, पर्याप्त पानी और बैलेंस डाइट क्रैम्प्स कम करने में मदद कर सकती है।

Read Next

→ ओव्यूलेशन के दौरान पेट फूलने की समस्या कितने समय तक रहती है? डॉक्टर से जानें जरूरी बातें

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jun 30, 2026 14:08 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Jun 30, 2026 14:08 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr M V Jyothsna