Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

PCOS में LH और FSH का क्या रोल है? डॉक्टर से जानें इसकी सही रेंज

PCOS में LH और FSH का अनुपात बिगड़ने से ओव्यूलेशन और प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। जानें डॉक्टर से इनकी नॉर्मल रेंज, PCOS में बदलाव और कब करें डॉक्टर से संपर्क।

PCOS हार्मोन से संबंधित समस्या है। PCOS सीधे तौर पर महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ यानी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है। ऐसा नहीं है कि इसे मैनेज नहीं किया जा सकता है। इसके लिए सही ट्रीटमेंट और जीवनशैली में अच्छी आदतें अपनाकर PCOS को नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि, PCOS को बेहतर तरीके से समझने के लिए LH और FSH हार्मोन के संतुलन को समझना बहुत जरूरी होता है। ये दोनों हार्मोन सीधे तौर पर महिलाओं के मेंस्ट्रुअल साइकिल और ओव्यूलेशन को नियंत्रित करते हैं। इस लेख में बताए गए सभी तथ्यों की पुष्टि खुद Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की Medical Director and IVF Specialist डॉ. शोभा गुप्ता ने की है।

LH और FSH क्या हैं?

LH यानी ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन और FSH यानी फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन दोनों ही मस्तिष्क में स्थित पिट्यूटरी ग्लैंड द्वारा प्रोड्यूस होते हैं। Cleveland clinic के अनुसार, FSH की बात करें, तो इसका काम अंडाशय में अंडों के फॉलिकल्स को विकसित करना और उन्हें परिपक्व बनाना है। वहीं, Cleveland clinic के अनुसार LH का मुख्य काम विकसित अंडे को फॉलिकल से बाहर निकालना है। इस प्रक्रिया को ओव्यूलेशन कहा जाता है। इसका मतलब है कि LH और FSH हार्मोन पीरियड्स और ओव्यूलेशन के लिए जरूरी हैं।

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PCOS में LH और FSH का क्या रोल है?

जैसा कि यह स्पष्ट है कि LH और FSH के कारण पीरियड्स और ओव्यूलेशन नियमित होते हैं। जहां तक सवाल इस बात का है कि PCOS में LH और FSH का रोल है? इस बारे में हम आगे विस्तार से समझते हैं-

LH (ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन) का रोल

PCOS में, LH का स्तर बढ़ जाता है, जिसकी वजह से महिलाओं के शरीर में एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है। इसका मतलब साफ है कि PCOS में LH  का स्तर बढ़ने की वजह से फॉलिकल्स (अंडे की थैलियां) का विकास बाधित हो जाता है, जिससे ओव्यूलेशन और पीरियड्स बाधित होने लगते हैं। हार्मोनल असंतुलन के कारण फॉलिकल्स मैच्योर नहीं हो पाते और सिस्ट जैसे दिखाई देते हैं

FSH (फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हार्मोन) का रोल

FSH ओवरीज में फॉलिकल्स को परिपक्व करने के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। PCOS में स्थिति उलट जाती है। इसका मतलब है कि FSH कम या अपर्याप्त हो, तो फॉलिकल्स मैच्योर नहीं हो पाते हैं। ऐसे में ओव्यूलेशन नहीं हो पाता है। इस स्थिति को हम ’एनोव्यूलेशन’ कहते हैं।

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LH और FSH की नॉर्मल रेंज क्या है?

2020 में Medical Archives Journal Of Academy of Medical Sciences of Bosnia and Herzegovina में प्रकाशित स्टडी के अनुसार नॉर्मल रिप्रोडक्टिव साइकिल या स्वस्थ प्रजनन चक्र में इन दोनों हार्मोन की रेंज एक समान या लगभग बराबर होनी चाहिए। अगर इसके सामान्य अनुपात की बात करें, तो यह आमतौर पर 1 और 2 के बीच होता है। इसका मतलब है कि शरीर में FSH की मात्रा LH के बराबर या उससे थोड़ी अधिक होती है ताकि अंडे सही ढंग से मैच्योर हो सकें। वहीं, Cleveland Clinic के अनुसार महिलाओं में FSH की नार्मल रेंज- 

  • प्यूबर्टी से पहले: 0 से 4.0 mIU/mL
  • प्यूबर्टी के दौरान: 0.3 से 10.0 mIU/mL
  • प्यूबर्टी के बाद: 4.7 से 21.5 mIU/mL
  • मेनोपॉज के बाद: 25.8 से 134.8 mIU/mL। 

PCOS में LH और FSH की रेंज क्या होती है?

PCOS से ग्रस्त महिलाओं में LH और FSH की रेंज या कहें अनुपात पूरी तरह उलट हो जाता है। वैसे तो अनुपात हर मरीज की अलग-अलग हो सकती है। डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं PCOS से ग्रस्त महिलाओं में LH और FSH की सामान्य तौर पर 2ः1 या कभी-कभी 3ः1 तक पहुंच जाती है। इसे सरल शब्दों में समझें तो शरीर में LH की मात्रा FSH से दोगुनी या तीन गुनी हो जाती है। निश्चित रूप से यह स्थिति मरीज के लिए सही नहीं है।

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PCOS में LH/FSH test कब करवाएं?

PCOS की सटीक जांच के लिए LH और FSH टेस्ट आमतौर पर पीरियड्स के दूसरे या तीसरे दिन करवाने की सलाह दी जाती है। इस समय को 'बेसल लेवल' माना जाता है, क्योंकि चक्र की शुरुआत में ये हार्मोन अपने सबसे स्थिर स्थिति में होते हैं। PCOS से ग्रस्त महिलाओं में अक्सर LH का स्तर FSH की तुलना में दो या तीन गुना अधिक बढ़ जाता है (LH/FSH ratio 2:1 या 3:1), जो ओव्यूलेशन में समस्या और हार्मोनल असंतुलन का संकेत है। डॉक्टर के निर्देशानुसार सुबह खाली पेट यह ब्लड टेस्ट करवाना सबसे बेहतर परिणाम देता है।

LH और FSH की रेंज में बदलाव के कारण

LH और FSH की रेंज में बदलाव का सबसे बड़ा कारण मेंस्ट्रुअल साइकिल, उम्र और प्रजनन स्थिति हैं। आपको जानकारी के लिए बता  दें कि पीरियड साइकिल हो या प्रजनन दर, हर स्थिति में महिला के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर मुख्य भूमिका निभाते हैं। यह मेनोपॉज, ओव्यूलेशन और PCOS में जरूरी होते हैं। सवाल है, LH और FSH की रेंज में बदलाव के मुख्य कारण क्या हैं? जानें-

  • मेंस्ट्रुअल साइकिलः मेंस्ट्रुएशन में LH और FSH दोनों ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं, महिला की लाइफस्टाइल और खराब डाइट पीरियड्स को प्रभावित करती हैं। ऐसे में LH और FSH के स्तर में भी बदलाव देखा जा सकता है।
  • मेनोपॉजः 2023 में BMC Women's Health प्रकाशित रिसर्च से पता चलता है मेनोपॉज वह चरण होता है जब महिला के पीरियड्स पूरी तरह खत्म हो जाते हैं। इसका मतलब है कि मेनोपॉज होने के बाद महिलाओं की प्रजनन क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाती है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है और महिलाएं मेनोपॉज के करीब पहुंचती है, ओवरीज कम एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन बनाने लगते हैं। ऐसे में मस्तिष्क में मौजूद पिट्यूटरी ग्लैंड को लगता है कि उसे अधिक काम करना चाहिए, जिससे शरीर में LH और FSH का स्तर काफी बढ़ जाता है।
  • हार्मोनल बदलावः महिलाओं के शरीर में किसी भी कारण हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं। इसमें सिर्फ खराब जीवनशैली या डाइट जिम्मेदार नहीं है। कई बार मेडिकल कंडीशंस भी इसके लिए जिम्मेदार मानी जाती हैं। डॉ. शोभा इसे सरल भाषा में समझाती हैं, ‘एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन LH और FSH हार्मोनों को नियंत्रित करते हैं। दरअसल, जब शरीर में एस्ट्रोजन बढ़ता है, तो यह आमतौर पर FSH को कम करता है। लेकिन ओव्यूलेशन से ठीक पहले, एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ने के कारण LH हार्मोन भी तेजी से बढ़ने लगते हैं।’
  • तनाव का बढ़नाः 2026 में Archives of Women's Mental Health में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार जब कोई लंबे समय तक तनाव में होता है, तो इसकी वजह से शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में गोनैडोट्रोपिन-रिलीजिंग हार्मोन-gnrh (प्रजनन प्रणाली को नियंत्रित करने वाला हार्मोन) में रुकावट पैदा होती है। गोनैडोट्रोपिन-रिलीजिंग हार्मोन मुख्य रूप से पिट्यूटरी ग्लैंड को LH और FSH बनाने के लिए संदेश भेजता है। बहरहाल, जब तनाव बढ़ता है, तो इसकी वजह से LH और FSH की रेंज प्रभावित होने लगते हैं।

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LH और FSH की रेंज बदलने पर कब जाएं डॉक्टर के पास

वैसे तो PCOS जैसी कंडीशन का पता चलते ही डॉक्टर के पास जाने की जरूरत होती है। सही ट्रीटमेंट की मदद से मरीज की कंडीशन में सुधार हो सकता है। हां, अगर किसी महिला को यह जानकारी नहीं है कि उन्हें PCOS है या नहीं, तो इसके लिए LH और FSH की रेंज में हो रहे बदलावों को नोटिस करना चाहिए, जैसे-

  • अगर पीरियड्स 35 से 40 दिनों के साइकिल में हो रहा है, अनियमित हैं, नहीं हो रहे हैं, तो उन्हें LH और FSH की रेंज की जांच करवाने के लिए डॉक्टर द्वारा बताए गए टेस्ट करवाने चाहिए।
  • अगर चेहरे पर अनचाहे बाल उग रहे हैं, हेयर फॉल बढ़ रहा है, मेल पैटर्न में गंजापन नजर आ रहा है, तो यह स्थिति भी बता रही है कि आपको डॉक्टर के पास जाने की जरूरत है। इस जांच से यह पता चलता है कि शरीर में LH और FSH की रेंज असंतुलित है। ऐसे में डॉक्टर के पास जाने में देरी नहीं करनी चाहिए।
  • अगर बार-बार नेचुरल तरीके से कोशिश करने के बावजूद महिला कंसीव नहीं कर पा रही है, तो यह भी LH और FSH के अनुपात में बदलाव के कारण होता है। इस स्थिति में भी प्रोफेशनल की मदद लेना न भूलें।

निष्कर्ष

LH और FSH दो तरह के हार्मोन हैं, जो पीरियड साइकिल को नॉर्मल बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी होते हैं। PCOS में इन दोनों हार्मोन का अनुपात बिगड़ जाता है। यही स्थिति PCOS में महिलाओं की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है। जैसे ही महिला को अपने शरीर में किसी भी तरह के लक्षण नजर आएं, जैसे चेहरे पर बाल उगना, हेयर फॉल होना, बाल्डनेस, पीरियड्स अनियमित होना आदि। इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • महिलाओं में FSH कम होने के क्या लक्षण हैं?

    शरीर में FSH (FSH)का स्तर कम होने का मतलब है पिट्यूटरी ग्लैंड या हाइपोथैलेमस में समस्या होना। इससे महिला इंफर्टाइल हो सकती हैं। इसके लक्षणों की बात करें, तो अनियमित पीरियड्स, कामेच्छा में कमी जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
  • क्या PCOS का इलाज न कराने से कैंसर हो सकता है?

    अगर सही समय पर PCOS का इलाज न किया जाए, तो कैंसर का रिस्क बढ़ सकता है। तो अनट्रीटेड PCOS में एंडोमेट्रियल कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। दरअसल, अनियमित पीरियड्स के कारण प्रोजेस्टेरोन की कमी और एस्ट्रोजन की अधिकता हो जाती है, जिससे गर्भाशय की परत मोटी होने लगती है, जो कैंसर का कारण बन सकती है।
  • FSH का पूरा नाम क्या है?

    FSH (FSH) का पूरा नाम फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हार्मोन है। यह पिट्यूटरी ग्लैंड द्वारा प्रोड्यूस होता है और पुरुषों-महिलाओं दोनों में प्रजनन प्रणाली, यौन विकास और एग/स्पर्म के प्रोडक्शन को नियंत्रित करता है।
  • LH का सामान्य स्तर कितना होना चाहिए?

    LH या ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन का सामान्य स्तर उम्र, लिंग और महिलाओं में मासिक धर्म चक्र के अनुसार बदलता है। वयस्क महिलाओं में यह आमतौर पर 1-18 IU/L (ओव्यूलेशन के दौरान 20-80 IU/L तक) और पुरुषों में 1-9 IU/L या 1.7-8.6 IU/L के बीच होता है।
  • FSH हार्मोनल बदलाव को कैसे ठीक करें?

    अगर FSH में बदलाव हो, तो महिलाएं अपनी जीवनशैली में जरूरी बदलाव कर सकती हैं। जैसे संतुलित आहार (प्रोटीन, विटामिन्स युक्त), नियमित रूप से व्यायाम करें, तनाव कम करने के लिए योग और मेडिटेशन करें और रोजाना 7-8 घंटे की नींद जरूरी लें।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Apr 24, 2026 17:38 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Apr 24, 2026 17:38 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta

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