हाल के दिनों में नींद न आने की समस्या से हर कोई दो-चार है। इसमें बच्चों से लेकर वयस्क हर कोई शामिल है। इसके पीछे मुख्य वजह रातभर मोबाइल स्क्रॉल करना है। हालांकि, कई बार नींद न आने की परेशानी किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकती है। कई लोगों का मानना है कि हार्मोनल बदलाव की वजह से भी नींद प्रभावित होती है। ऐसे में यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर इनका आपस में क्या कनेक्शन है? समझें वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट एवं IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से।
क्या नींद न आना हार्मोनल असंतुलन का संकेत है?
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हर व्यक्ति के लिए रोजाना 7-8 घंटे की न्यूनतम नींद बहुत जरूरी होती है। अगर पूरी नींद न ली जाए, तो कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं, जैसे ब्रेन फंक्शन पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है और याददाश्त कमजोर हो सकती है। बहरहाल, सवाल ये है कि क्या नींद न आना हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है? इस बारे में डाॅक्टर का कहना है, "यह पूरी तरह सच है कि नींद न आना हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है। असल में, प्रोजेस्टेरोन, एस्ट्रोजन, मेलाटोनिन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन के स्तर में बदलाव आने की वजह से नींद लेने में दिक्कतें आ सकती हैं। इसलिए, व्यक्ति के लिए यह जान लेना जरूरी है कि उनके साथ ऐसा क्यों हो रहा है। समस्या का समाधान करके बेहतर और अच्छी नींद ली जा सकती है।" वहीं, 2021 में Frontiers in Neuroscience में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, महिलाओं में नींद से जुड़ी समस्याओं का मुख्य कारण ओवेरियन हार्मोन (विशेष रूप से एस्ट्रोजन/एस्ट्राडियोल और प्रोजेस्टेरोन) के उतार-चढ़ाव से संबंधित है। ये हार्मोन मस्तिष्क के उन हिस्सों और न्यूरोकेमिकल्स पर सीधा असर डालते हैं जो सोने और जागने के साइकिल को कंट्रोल करते हैं।
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कब हार्मोन की कमी के कारण नींद बाधित होती है?
मेनोपॉज में
सामान्यतः हार्मोन बदलाव पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक देखने को मिलती है। मेनोपॉज होने पर महिलाओं के शरीर में प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन के स्तर में तेजी से गिरावट आने लगती है। ऐसे में महिलाओं को काफी ज्यादा पसीना और हाॅट फ्लैशेज हो जाते हैं, जिससे उनकी नींद बाधित होती है।
प्रेग्नेंसी में
प्रेग्नेंसी (गर्भावस्था) के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। ये बदलाव गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास के लिए बहुत जरूरी होते हैं, लेकिन महिलाओं के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण होता है। खासकर पहली तिमाही में महिलाओं को उल्टी और जी मिचलाने जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीं, आखिरी तिमाही में शारीरिक भारीपन के कारण थकान और कमजोरी बनी रहती है। ये सभी परिस्थितियां रात की नींद को बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं।
पीरियड्स में
महिलाओं को पीरियड्स में भी नींद से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। असल में, प्रोजेस्टेरोन के स्तर में तेजी से आई गिरावट के कारण महिलाओं के लिए अच्छी नींद लेना काफी मुश्किल हो जाता है।
थायराइड में
अंडरएक्टिव हो या ओवरएक्टिव, दोनों ही परिस्थितियों में हार्मोन का स्तर बदलता है। यह पुरुष और महिला दोनों को परेशान कर सकती है। थायराइड ग्रंथि में दिक्कतें आने की वजह से सर्कैडियन रिदम और नर्वस सिस्टम पर असर पड़ता है, जिससे नींद बाधित होने लगती है।
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हार्मोनल बदलाव के कारण नींद न आने पर क्या करें?
हार्मोनल बदलाव के कारण नींद न आने की समस्या को हल्के में न लें। अगर लंबे समय से नींद की समस्या बनी हुई है, तो बेहतर है कि एक्सपर्ट से मिलें और अपना ट्रीटमेंट करवाएं। इसके अलावा, यहां दिए गए टिप्स को भी अपना सकते हैं-
- हाॅट फ्लैशेज के कारण नींद न आए, तो कमरे के तापमान को ठंडा करें।
- अपनी डाइट में कैफीन युक्त चीजों से दूर रहें। सोने से तुरंत पहले शराब के सेवन से भी बचें।
- अगर शरीर में मेलाटोनिन का स्तर गिर रहा है, तो एक्सपर्ट की सलाह पर सप्लीमेंट ले सकते हैं।
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निष्कर्ष
अगर आप लंबे समय से यह नोटिस करें कि आपको नींद नहीं आ रही है, तो इस स्थिति को नजरअंदाज न करें। ऐसा कई गंभीर बीमारियों की वजह से हो सकता है और इसका सीधा-सीधा कनेक्शन हार्मोनल बदलाव से भी होता है। इसलिए, अगर नींद से संबंधित समस्या हो, तो शरीर में नजर आ रहे अन्य लक्षणों पर गौर करें। जरूरी हो, तो समय पर डाॅक्टर के पास जाएं।
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FAQ
क्या रात को अचानक पसीने से भीगकर नींद खुलना हार्मोनल समस्या हो सकती है?
हां, इसे नाइट स्वेट्स कहा जाता है। ऐसा महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन के अचानक गिरने के कारण होता है। मेनोपॉज हो चुकी महिलाओं में ऐसा अधिक होता है।स्ट्रेस हार्मोन हमारी रात की नींद को कैसे खराब करता है?
विशेषज्ञों की मानें तो स्ट्रेस हार्मोन यानी कोर्टिसोल का स्तर रात के समय गिरना चाहिए ताकि शरीर रिलैक्स हो सके, लेकिन तनाव के कारण कोर्टिसोल का स्तर रात में भी हाई रहता है, जिससे मेलाटोनिन नहीं बन पाता और नींद गायब हो जाती है।
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Jul 07, 2026 11:56 IST
Modified By : Meera Tagore Jul 07, 2026 11:56 IST
Modified By : Meera TagoreJul 07, 2026 11:56 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta