आपने कई बार नोटिस किया होगा कि शारीरिक काम न करने के बावजूद थकान और कमजोरी महसूस होती है। कई बार मन में यह सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है और हम मन ही मन अपने पूरे दिन की गतिविधियों के बारे में सोचने लगते हैं। क्या आप जानते हैं कि कई बार मानसिक थकान सिर्फ शारीरिक काम की वजह से नहीं होती है? इसके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। आइए, माइंडवेल काउंसिल की संस्थापक, काउंसलर और फैमिली थेरेपिस्ट अर्चना सिंघल (Archana Singhal, Counsellor & Family Therapist and Founder of Mindwell Counsel) से जानते हैं इनके कारणों के बारे में।
बिना शारीरिक काम किए दिमाग क्यों थक जाता है?
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शारीरिक रूप से काम करने के बावजूद मानसिक रूप से थकान हो जाती है। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जैसे-
1. दिमाग को रेस्ट न मिलना
मौजूदा समय में आपने देखा होगा कि ब्रेन को बमुश्किल रेस्ट मिल पाता है। हम हर समय किसी न किसी तरह के मेंटल वर्क में होते हैं, जैसे कभी स्क्रीन के संपर्क में रहना, मल्टी टास्किंग करना, तो कभी काम का ओवरबर्डन होना। ऐसे में लगातार दिमाग हाई अलर्ट मोड में रहता है। नतीजतन, मानसिक रूप से हम अक्सर थकान और सुस्ती महसूस करते हैं।
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2. क्रॉनिक स्ट्रेस होना
ऑफिस का काम, वर्क कल्चर, फाइनेंशियल बोझ जैसी स्थितियां तनाव के बड़े कारण हैं। हाल के सालों में हर दूसरा व्यक्ति इस तरह से परिस्थितियों से रूबरू होता है। जब कोई लंबे समय तक तनाव की स्थिति में रहता है, तो इसकी वजह से नर्वस सिस्टम भी सक्रिय मोड में रहता है। ऐसे में मानसिक रूप से थकान, फोकस की कमी और शारीरिक रूप से सुस्ती महसूस होती है।
3. भावनात्मक तनाव
मौजूदा समय में लोगों में भावनात्मक तनाव भी काफी ज्यादा बढ़ गया है। दरअसल, हम सभी की एक्सपेक्टेशन दूसरों से काफी ज्यादा बढ़ गई है। ऐसा चाहे ऑफिस में या निजी संबंधों में। इसके अलावा, जिन लोगों पर किसी अपने की देखरेख की जिम्मेदारी या घर को आर्थिक रूप से संभालने का बर्डन होता है, वे लोग अक्सर भावनात्मक तनाव से घिरे होते हैं। ऐसे में उन्हें कोई अपना करीबी चाहिए, जिनके साथ वे अपनी समस्याओं को शेयर कर सकें। जब ऐसा करना मुश्किल लगता है, तब मानसिक रूप से थकान बढ़ने लगती है।
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4. डिजिटल ओवरलोड
कहने की जरूरत नहीं है कि आज की तारीख में हर व्यक्ति डिजिटली ओवरलोड हो चुका है। ज्यादातर लोग सोशल मीडिया पर अपना ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहते हैं, जो कि पूरी तरह गलत है। हम सभी को कुछ समय डिजिटल वर्ल्ड से दूर रहना चाहिए। इस दौरान मोबाइल फोन को खुद से पूरी तरह दूर रखना चाहिए ताकि खुद को डिजटली डिटाॅक्स कर सकें। जब हम ऐसा नहीं करते हैं, तो इसकी वजह से मानसिक थकान बढ़ने लगती है। एक समय बाद इसका असर हमारी निजी जीवन पर भी दिखने लगता है।
5. लगातार निर्णय लेना
आमतौर पर हम यह महसूस नहीं करते हैं, लेकिन यह सच है कि दिन भर में हम कई तरह के निर्णय लेते हैं। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक। व्यक्ति हर समय सही फैसले लेने के बोझ में होता है, जो कि उसे गहराई तक मानसिक रूप थका देते हैं और एनर्जी के स्तर को कम कर देता है।
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निष्कर्ष
रोजमर्रा के कई ऐसे कामकाज हैं, जो शारीरिक रूप से नहीं किए जाते हैं, फिर भी मानसिक रूप से थकान के लिए जिम्मेदार होते हैं। असल में, हम आज ऐसी जिंदगी जी रहे हैं, जिसमें मेंटल थकान अधिक है और शारीरिक थकान कम। मानसिक रूप से थकान कम करनी है, तो मोबाइल से कुछ देर के लिए दूरी बना लें, सोशल मीडिया से खुद को दूर कर लें और जो बातें आपको परेशान करती हैं, उनका समाधान तलाशें। अगर आप खुद इन समस्याओं का समाधान नहीं निकाल पा रहे हैं, तो बेहतर है कि एक्सपर्ट की सलाह लें।
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FAQ
क्रॉनिक स्ट्रेस हमारी नींद को कैसे प्रभावित करता है?
लगातार तनाव में रहने से हमारा नर्वस सिस्टम हमेशा सक्रिय रहता है, जिससे स्ट्रेस हार्मोन्स बढ़ते हैं। ऐसे में गहरी व आरामदायक नींद नहीं मिल पाती।दिनभर छोटे-बड़े फैसले लेने से मानसिक ऊर्जा पर क्या असर पड़ता है?
सुबह उठने से लेकर रात तक लगातार निर्णय लेने से हमारे दिमाग पर गहरा असर पड़ता है। इसे ही हम डिसीजन फटीग कहते हैं। यह दिमाग की पूरी एनर्जी को सोख लेता है।
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Jul 02, 2026 18:09 IST
Modified By : Meera Tagore Jul 02, 2026 18:09 IST
Modified By : Meera TagoreJul 02, 2026 18:09 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Archana Singhal