आज की तारीख में हमारी जिंदगी पूरी तरह से मोबाइल के चारों ओर घूम रही है। किसी से संपर्क करना हो या देश-दुनिया किसी भी तरह की जानकारी हासिल करनी हो। हर चीज के लिए हमारे पास एक समाधान है, मोबाइल। हालांकि, यह सच है कि मोबाइल ने हमारी जिंदगी काफी आसान कर दी है, लेकिन हर समय बजते नोटिफिकेशन्स ने कहीं न कहीं हमारे सुकून को प्रभावित किया है। सवाल है, कैसे? आइए, माइंडवेल काउंसिल की संस्थापक, काउंसलर और फैमिली थेरेपिस्ट अर्चना सिंघल (Archana Singhal, Counsellor & Family Therapist and Founder of Mindwell Counsel) से जानते हैं इसका जवाब और मानसिक तथा फोकस को बेहतर करने के लिए क्या कुछ किया जा सकता है।
नोटिफिकेशन्स हमारे सुकून को कैसे प्रभावित कर रहे हैं?
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क्या आपने कभी महसूस किया है कि जैसे ही फोन की घंटी या वाइब्रेशन होती है, आपका हाथ अपने-आप मोबाइल की ओर बढ़ जाता है? भले ही आप किसी महत्वपूर्ण काम में व्यस्त हों, आपका ध्यान कुछ क्षणों के लिए उस नोटिफिकेशन की ओर चला जाता है। इसी विषय पर साल 2022 में PLOS ONE में प्रकाशित एक रिसर्च आर्टिकल के अनुसार, स्मार्टफोन पर आने वाले नोटिफिकेशन हमारी सोचने-समझने की क्षमता और एकाग्रता को गहराई से प्रभावित करते हैं। यही नहीं, इसका असर हमारे काम करने की गति पर भी पड़ता है। इस रिसर्च आर्टिकल में आगे कहा गया है कि जब लोगों को काम के दौरान स्मार्टफोन की नोटिफिकेशन जैसी आवाजें सुनाई दीं, तो उनके काम करने की रफ्तार धीमी हो जाती है। हालांकि, आसान काम करते हुए ध्यान तुरंत भटक जाता है, लेकिन मुश्किल काम के दौरान अक्सर लोग मोबाइल के नोटिफिकेशन को नजरअंदाज कर देते हैं। समस्या केवल नोटिफिकेशन के आवाज की नहीं है, बल्कि उससे जुड़ी हमारी मानसिक आदत भी है। धीरे-धीरे हमारा मस्तिष्क हर नोटिफिकेशन को इस संभावना से जोड़ने लगता है कि कहीं कोई महत्वपूर्ण जानकारी छूट न जाए। इसी कारण कई लोग बिना किसी नोटिफिकेशन के भी बार-बार फोन चेक करने लगते हैं।
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बार-बार नोटिफिकेशन्स आने के नुकसान
1. काम में बार-बार बाधा
जब भी किसी काम के दौरान फोन की घंटी बजती है या स्क्रीन चमकती है, हमारा ध्यान उस ओर खिंच जाता है। भले ही हम नोटिफिकेशन न खोलें, लेकिन हमारा मस्तिष्क कुछ क्षणों के लिए उस व्यवधान को प्रोसेस करता है। इससे काम का प्रवाह टूटता है और दोबारा उसी स्तर की एकाग्रता हासिल करने में समय लग सकता है। परिणामस्वरूप उत्पादकता और कार्य की गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकती हैं। यहां तक कि दोबारा काम में मन लगाने के लिए कम से कम 20 मिनट का समय लगता है। इससे काम की गति भी धीमी हो जाती है।
2. टेलीप्रेशर (Telepressure) का मानसिक दबाव
क्या आपको कभी ऐसा महसूस होता है कि किसी का संदेश आते ही तुरंत जवाब देना जरूरी है? या यदि जवाब देने में देर हो जाए तो अपराधबोध महसूस होने लगता है? मनोविज्ञान में इस स्थिति को टेलीप्रेशर (Telepressure) कहा जाता है। यह वह मानसिक दबाव है, जिसमें व्यक्ति हर संदेश, कॉल या नोटिफिकेशन का तुरंत उत्तर देने की जिम्मेदारी महसूस करता है। लंबे समय तक यह दबाव व्यक्ति को लगातार मानसिक रूप से "ऑन" रहने की स्थिति में रख सकता है, जिससे तनाव और मानसिक थकान बढ़ सकती है।
3. क्रॉनिक स्ट्रेस और मानसिक थकान
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जेब में रखा एक छोटा डिवाइस यानी फोन की नोटिफिकेशन हमें क्रॉनिक स्ट्रेस का शिकार बना सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कई बार बड़ी घटनाएं या दुर्घटनाएं तनाव का कारण नहीं होती हैं। मोबाइल में बज रहा नोटिफिकेशन भी लोगों को गहरे तनाव से भर सकता है। दरअसल, जब बार-बार मोबाइल फोन की नोटिफिकेशन बजती है, तो यह हमारे ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम को ट्रिगर करती है। सरल शब्दों में इसका मतलब है आपके ब्रेन के तनाव के प्रति रिएक्ट करने से पहले ही शरीर प्रतिक्रिया दे देता है। लगातार इस मोड में रहने से मानसिक थकान, डिजिटल ब्रेन फॉग और कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है।
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नोटिफिकेशन के दबाव से कैसे बचें?
- गैर-जरूरी ऐप्स की Push Notifications बंद रखें।
- किसी जरूरी काम या पढ़ाई के दौरान Focus Mode या Do Not Disturb मोड का उपयोग करें।
- दिनभर हर नोटिफिकेशन पर प्रतिक्रिया देने के बजाय, निश्चित समय पर मैसेज और सोशल मीडिया चेक करें।
- काम करते समय फोन को खुद से दूर रखें।
- सुबह उठते ही और सोने से कम से कम 30 मिनट पहले मोबाइल नोटिफिकेशन्स से दूरी बनाए रखें।
- दिन में कुछ समय ऐसा रखें जब आप पूरी तरह "Notification-Free" रहें। इससे मस्तिष्क को लगातार सतर्क रहने की स्थिति से बाहर आने का अवसर मिलता है।
एक्सपर्ट की सलाह
काउंसलर और फैमिली थेरेपिस्ट अर्चना सिंघल के अनुसार, "हम अक्सर यह मानते हैं कि तनाव केवल बड़ी घटनाओं की वजह से होता है, जबकि वास्तविकता यह है कि दिनभर होने वाली छोटी-छोटी डिजिटल बाधाएं भी हमारे मस्तिष्क को लगातार सतर्क रखती हैं। इसी वजह से समय के साथ मानसिक थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी आने लगती है। हर नोटिफिकेशन हमारा ध्यान भंग होता है। यदि हम अपने ध्यान को बार-बार बांटते रहेंगे, तो केवल हमारी उत्पादकता ही नहीं, बल्कि मानसिक ऊर्जा भी धीरे-धीरे कम होने लगेगी।"
निष्कर्ष
मोबाइल फोन का नोटिफिकेशन भले ही सुनने में सामान्य लगे और इस ओर अक्सर लोगों को ध्यान नहीं जाता है। हकीकत बात यह है कि नोटिफिकेशन हमारी मानसिक सुकून को भंग करती है और इसका हमारे फोकस पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। इस तरह की स्थिति पैदा न हो, इसके लिए मोबाइल का इस्तमेाल सावधानी से करें। जो जरूरी न हो, उसकी नोटिफिकेशन बंद रखें और सोने तथा काम के दौरान मोबाइल का यूज कम से कम करें।
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FAQ
टेलीप्रेशर क्या है और यह क्यों खतरनाक है?
संदेशों का तुरंत जवाब देने के मानसिक दबाव को टेलीप्रेशर कहा जाता है। यह व्यक्ति को चौबीसों घंटे तनाव में रखता है, जिससे व्यक्ति मानसिक रूप से बर्नआउट महसूस करता है।क्या फोन साइलेंट रखने पर भी नोटिफिकेशन का स्ट्रेस हो सकता है?
हां, क्योंकि दिमाग बंद करने पर भी ध्यान मोबाइल पर ही रहता है, जिसे फैंटम वाइब्रेशन कहते हैं।
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Jul 01, 2026 13:03 IST
Modified By : Meera Tagore Jul 01, 2026 13:03 IST
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Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Archana Singhal