आज के डिजिटल दौर में हमारा ध्यान लगातार मोबाइल नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया, वीडियो गेमिंग, ऑनलाइन शॉपिंग और दूसरे टाइमपास गतिविधियों की ओर खिंच जाता है। इसी समस्या से निपटने के लिए डोपामाइन फास्टिंग या डोपामाइन डिटॉक्स शब्द काफी चलन में है। हालांकि, इसके नाम को समझना जरूरी है, क्योंकि इसका मतलब शरीर से डोपामाइन निकालना नहीं होता है। आइए इस लेख में Dr. Akshay Chugh, Internal Medicine & Metabolic Disorders, Metro Hospital and Heart Institute, Noida से जानते हैं कि डोपामाइन फास्टिंग क्या है और यह कैसे फायदेमंद होती है?
डोपामाइन क्या होता है?
Dr. Akshay Chugh का कहना है कि डोपामाइन दिमाग में बनने वाला एक न्यूरोट्रांसमीटर है, जो सीखने, फोकस, याददाश्त, मूवमेंट और रिवॉर्ड से जुड़ी प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है। इसे सिर्फ खुशी का केमिकल समझना सही नहीं। जब हमें कोई पसंदीदा गतिविधि करने पर तुरंत संतुष्टि मिलती है, तो हमारा दिमाग उस व्यवहार को दोहराने के लिए बढ़ावा दे सकता है। जैसे- सोशल मीडिया पर नया नोटिफिकेशन देखने से हमें बार-बार फोन चेक करने की आदत बन सकती है।
डोपामाइन फास्टिंग क्या है?
Dr. Akshay Chugh के अनुसार, डोपामाइन फास्टिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति कुछ समय के लिए उन सभी आरामदायक और खुशी देने वाली गतिविधियों से दूर रहता है, जिनसे तुरंत खुशी मिलती है। इसमें स्मार्टफोन चलाना, सोशल मीडिया, वीडियो गेम, जंक फूड, संगीत सुनना या खरीदारी करना शामिल हैं। इसका उद्देश्य दिमाग को रीसेट करना और ज्यादा डिजिटल आदतों से राहत दिलाना है। इस प्रक्रिया का मतलब डोपामाइन को पूरी तरह खत्म करना नहीं है, बल्कि यह सीखना है कि हम छोटी और नॉर्मल चीजों में भी खुश रह सकें और अपनी बुरी आदतों पर कंट्रोल पा सकें।
साल 2024 में Cureus Journal of Medical Science में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, डोपामाइन फास्टिंग, जिसे डोपामिनर्जिक फास्टिंग या डोपामाइन डिटॉक्स भी कहा जाता है। यह एक ऐसा कॉन्सेप्ट है, जो हाल के सालों में काफी मशहूर हुआ है। डोपामाइन फास्टिंग को मानने वालों का कहना है कि इससे लोगों को तुरंत मिलने वाली खुशी और जरूरत से ज्यादा स्टिम्युलेशन पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इससे उनकी लाइफ में कंट्रोल और फोकस बेहतर होता है।
dopamine-fasting-inside
डोपामाइन फास्टिंग का क्या उद्देश्य होना चाहिए?
Cureus Journal of Medical Science में बताया गया है कि डोपामाइन फास्टिंग का उद्देश्य तुरंत मिलने वाली खुशी और बुरी आदतों पर से निर्भरता को कम करना है। इससे दिमाग शांत होता है और तनाव या एंग्जायटी कम होती है। इसकी मदद से हम रोजमर्रा के छोटे-छोटे कामों में भी खुशी ढूंढना सीख जाते हैं। इसके अलावा, अपने आस-पास की दुनिया को बेहतर तरीके से महसूस कर पाते हैं। आसान शब्दों में कहें तो इसका उद्देश्य फोन और अन्य डिजिटल चीजों से दूरी बनाकर मन को शांत रखना और वर्तमान को सही तरह से जीना है। इस प्रक्रिया से व्यक्ति को अपने ट्रिगर पहचानने और तुरंत मिलने वाली खुशी के स्थान पर ज्यादा सार्थक गतिविधियों पर ध्यान रखने में मदद मिल सकती है।
डोपामाइन फास्टिंग कैसे करें?
Dr. Akshay Chugh के मुताबिक, डोपामाइन फास्टिंग करने के लिए सबसे पहले एक ही आदत चुनें। शुरुआत में सोशल मीडिया, लगातार वीडियो देखना, गेमिंग या बिना कारण फोन का इस्तेमाल करने जैसी किसी एक गतिविधि के लक्ष्य को बनाना बेहतर होता है। इसके बाद एक छोटी और समय-सीमा तय करें। जैसे- शाम को एक से चार घंटे सोशल मीडिया से दूरी बनाई जा सकती है। हफ्ते में कुछ घंटों या एक दिन के लिए भी डिजिटल ब्रेक लिया जा सकता है। फास्टिंग के दौरान फोन को साइलेंट या दूसरे कमरे में रखें, नोटिफिकेशन बंद करें और सोशल मीडिया ऐप्स से लॉग आउट करना फायदेमंद हो सकता है।
निष्कर्ष
Dr. Akshay Chugh का कहना है कि डोपामाइन फास्टिंग को किसी ब्रेन डिटॉक्स के स्थान पर आदतों और फोकस को बेहतर बनाने के तरीके के रूप में देखना ज्यादा सही होता है। इसका लक्ष्य डोपामाइन को खत्म करना नहीं, बल्कि सोशल मीडिया, गेमिंग आदि जैसी गतिविधियों पर अपना कंट्रोल बढ़ाना है। इसलिए, शुरुआत किसी एक आदत से करें, थोड़े समय का ब्रेक लें और उस दौरान हेल्दी, असल दुनिया की गतिविधियों को जगह दें।
Image Credit: Freepik
FAQ
डोपामाइन के क्या फायदे हैं?
डोपामाइन एक जरूरी न्यूरोट्रांसमीटर है, जो हमारे शरीर और मानसिक स्थिति को ठीक रखने में मदद करता है।डोपामाइन ज्यादा होने से क्या होता है?
डोपामाइन बढ़ने से शरीर और दिमाग में खुशी, एनर्जी और प्रेरणा का एहसास होता है। इसे हैप्पी हार्मोन के रूप में जाना जाता है। हालांकि, इसका लेवल बहुत ज्यादा बढ़ जाने से बेचैनी, और सिजोफ्रेनिया या मैनिया जैसी गंभीर मानसिक समस्याएं भी हो सकती हैं।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Aug 09, 2026 11:28 IST
Modified By : Katyayani Tiwari Aug 09, 2026 11:28 IST
Modified By : Katyayani TiwariAug 09, 2026 11:28 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Akshay Chugh
