आज के समय में ज्यादातर लोग पढ़ाई, सोशल मीडिया या काम के लिए लंबे समय तक मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं और इस स्क्रीन टाइम के कारण लोगों को आंखों में थकान, जलन, भारीपन या आंखों से पानी आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई बार लोग इसे आम समस्या मान लेते हैं, लेकिन ये परेशानी क्यों होती है? ऐसे में आइए इस बारे में Dr. Aravinda S N, Lead Consultant - Internal Medicine, Aster RV Hospital, Bengaluru से जानें।
मोबाइल देखते समय आंखों से पानी क्यों आता है?
डॉ. अरविंद एस एन के अनुसार, मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते समय आंखों से पानी आना अक्सर डिजिटल आई स्ट्रेन यानी आंखों पर पड़ने वाले डिजिटल स्ट्रेस और पलकें कम झपकाने से जुड़ा होता है।
जब हम फोन की स्क्रीन पर फोकस करते हैं, तो हम कम बार और कभी-कभी पूरी तरह से पलकें नहीं झपकाते हैं। नॉर्मली पलकें झपकाने से आंख की सतह पर आंसुओं की एक पतली परत फैलती है, जिससे आंखें नम और आरामदायक रहती हैं। जब पलकें कम झपकाई जाती हैं, तो आंसुओं की परत अस्थिर हो सकती है और आंखें ड्राई या उनमें जलन महसूस हो सकती है।
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लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों पर क्या असर पड़ता है?
डॉ. अरविंद आगे कहते हैं, सूखापन असल में बहुत ज्यादा पानी आने का कारण बन सकता है। जब आंख की सतह ड्राई हो जाती है, तो शरीर उसको प्रोटेक्ट करने और उसे चिकना बनाए रखने के लिए रिफ्लेक्स आंसू को बढ़ावा देकर प्रतिक्रिया दे सकता है। ये आंसू बाहर बह सकते हैं, जिससे आंखें पानी से भरी हुई लग सकती हैं।
लंबे समय तक स्क्रीन को देखने से जलन, खुजली, किरकिरापन, रेडनेस, धुंधली दृष्टि या आंखों में थकान जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। मोबाइल को चेहरे के बहुत पास रखने से फोकस करने के लिए जरूरी मेहनत बढ़ सकती है, खासकर लंबे समय तक पढ़ने के दौरान।
इन परेशानियों को आमतौर पर डिजिटल आई स्ट्रेन यानी स्क्रीन के कारण होने वाली आंखों की थकान से जोड़ा जाता है।

साल 2022 में Ophthalmology and Therapy के अनुसार, स्क्रीन और कुर्सी पर बैठने के समय में अचानक से हुई भारी बढ़ोतरी के कारण अन्य कई बीमारियां हो गई हैं, जैसे डिजिटल आई स्ट्रेन, पास की नजर कम होना (मायोपिया), हड्डियों और मांसपेशियों की समस्याएं, मोटापा और डायबिटीज आदि। दिन में 4 घंटे से ज्यादा डिजिटल चीजों का इस्तेमाल करना, आंखों में पहले से मौजूद दृष्टि दोष (रिफ्रैक्टिव एरर) और पहले से ड्राई आई की समस्या होना, इसके मुख्य खतरे हैं, जो डिजिटल आई स्ट्रेन (DES) के खतरे को बढ़ा देते हैं।
वातावरण से बढ़ती है आंखों में पानी आने की समस्या
डॉ. अरविंद बताते हैं, सिर्फ मोबाइल स्क्रीन ही इसके लिए जिम्मेदार नहीं होती है। आस-पास का माहौल भी इस समस्या को और बढ़ा सकता है। एयर कंडीशनिंग, पंखे, सूखा मौसम, धुआं और धूल आंख की सतह से नमी के इवेपोरेशन (evaporation) को बढ़ा सकते हैं।
स्क्रीन की ब्राइटनेस के कारण
मोबाइल की स्क्रीन की ब्राइटनेस और कंट्रास्ट भी परेशानी का कारण बन सकते हैं, खासकर तब जब स्क्रीन आस-पास के माहौल की तुलना में बहुत ज्यादा चमकदार या बहुत अंधेरी हो। इसलिए मोबाइल की ब्राइटनेस को आसपास की रोशनी के अनुसार रखना बेहतर होता है। हालांकि, नॉर्मल रूप से स्क्रीन का इस्तेमाल करने से आंखों को स्थायी नुकसान नहीं पहुंचता है। मुख्य चिंता कुछ समय के लिए होने वाली बेचैनी और खिंचाव की समस्या है।
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क्या कहती है स्टडी?
StatPearls मेडिकल रिसोर्स के अनुसार, आंखों से पानी आने या आंसू की नली बंद होने की परेशानी वैसे तो किसी को भी हो सकती है, लेकिन महिलाओं, जन्मजात कारणों से बच्चों और उम्र बढ़ने के कारण बुजुर्गों को इसका खतरा ज्यादा रहता है। इसके अलावा, न्यूरोलॉजिकल विकारों (जैसे पार्किंसंस), गठिया, ऑटोइम्यून रोगों (जैसे शोग्रेन सिंड्रोम) या त्वचा रोगों से पीड़ित लोग, कीमोथेरेपी करा रहे या खास आई ड्रॉप्स इस्तेमाल करने वाले मरीज तथा धूल-मिट्टी, प्रदूषण और स्क्रीन के सामने ज्यादा रहने वाले लोगों को भी ये परेशानी हो सकती है।
किन लोगों को ज्यादा होती है आंखों से पानी आने की समस्या?
डॉ. अरविंद बताते हैं, जिन लोगों को पहले से ही ड्राई आई, एलर्जी या पलकों से जुड़ी कुछ समस्याएं हैं, तो उन्हें स्क्रीन का इस्तेमाल करते समय आंखों से पानी आने की समस्या ज्यादा हो सकती है।
आंखों को आराम देने के लिए आसान तरीके
डॉ. अरविंद कहते हैं, मोबाइल का इस्तेमाल पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता है, लेकिन कुछ छोटी आदतों में बदलाव करने से आंखों पर पड़ने वाले प्रेशर को कम किया जा सकता है।
- 20-20-20 नियम अपनाएं: हर 20 मिनट में कम से कम 20 सेकंड के लिए लगभग 20 फीट दूर किसी चीज को देखें।
- पलकें पूरी तरह झपकाएं: मोबाइल देखते समय जानबूझकर नियमित रूप से पलकें झपकाने की कोशिश करें।
- मोबाइल को बहुत पास न रखें: फोन को ऐसी दूरी पर रखें जहां पढ़ने के लिए आंखों पर ज्यादा जोर न पड़े।
- स्क्रीन की ब्राइटनेस सही रखें: स्क्रीन की रोशनी आसपास के वातावरण के हिसाब से रखें।
- अंधेरे में मोबाइल देखने से बचें: बहुत अंधेरे कमरे में तेज रोशनी वाली स्क्रीन देखने से आंखों में असहजता बढ़ सकती है।
- बीच-बीच में ब्रेक लें: लंबे समय तक लगातार स्क्रीन देखने के बजाय आंखों को कुछ समय आराम दें।
- धूल और धुएं से बचें: ऐसा वातावरण आंखों में जलन और पानी आने की समस्या को बढ़ा सकता है।
डॉक्टर से सलाह कब लें?
डॉ. अरविंद के अनुसार, अगर आंखों में पानी लगातार आता रहता है, स्क्रीन का इस्तेमाल न करने पर भी आता है या इसके साथ आंखों में दर्द, ज्यादा रेडनेस, डिस्चार्ज, रोशनी के प्रति सेंसिटिविटी या दृष्टि में बदलाव जैसे लक्षण भी हों, तो किसी ऑप्थोलॉजिस्ट यानी आंखों के डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।
निष्कर्ष
मोबाइल इस्तेमाल करते समय आंखों से पानी आना कई बार आंखों में ड्राईनेस, कम पलक झपकाने और लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होने वाली थकान से जुड़ा हो सकता है। आंखों में ड्राईनेस होने पर शरीर की प्रतिक्रिया के रूप में ज्यादा आंसू भी निकल सकते हैं। स्क्रीन की ब्राइटनेस, मोबाइल को बहुत पास से देखना और ड्राई या धूल-धुएं वाला वातावरण परेशानी को बढ़ा सकता है।
ऐसे में ध्यान रहे, मोबाइल का इस्तेमाल करते समय सावधानियां बरतें। अगर आंखों से पानी आने की समस्या लगातार बनी रहे या इसके साथ दर्द, रेडनेस और नजर में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो आंखों के डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
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FAQ
ज्यादा मोबाइल चलाने से आंखों पर क्या असर होता है?
मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करने से आंखों में ड्राईनेस होने, धुंधला दिखने, सिरदर्द, आंखों में दर्द, देखने में परेशानी, डिजिटल आई स्ट्रेस, आंखों में जलन और रेडनेस होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।ज्यादा स्क्रीन देखने से क्या होता है?
ज्यादा स्क्रीन टाइम के कारण व्यक्ति को आंखों में थकान, नजर कमजोर होने, सिरदर्द, गर्दन दर्द, फिजिकल एक्टिविटीज की कमी, नींद आने में परेशानी और मेंटल स्ट्रेस जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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Current Version
Aug 31, 2026 20:31 IST
Modified By : Priyanka Sharma Aug 31, 2026 20:31 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr. Aravinda S N