Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Bharath Kumar Surisetti , Consultant Neurologist | MD, DM (Neurology), PDF Movement Disorders (NIMHANS)

अचानक पैरों में लकवा क्यों मार सकता है? डॉक्टर से जानें इसके कारण

अक्सर लोग पैरों में अचानक आई कमजोरी, सुन्नपन या चलने-फिरने में परेशानी को सामान्य थकान या नस दबने की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन ये पैरों में लकवा होने का संकेत हो सकता है।

हमारे शरीर में पैरों की ताकत अचानक खत्म हो जाना या एकदम से चलने-फिरने में समस्या होना एक ऐसी स्थिति है, जिसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई बार लोग इसे थकान, नस दबने या कुछ समय की कमजोरी समझकर घर पर आराम करने लगते हैं, लेकिन यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के मुताबिक यह लक्षण किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत हो सकता है। यदि समय रहते इसका सही कारण पता न लगाया जाए और इलाज शुरू न किया जाए, तो यह स्थायी विकलांगता तक का कारण बन सकता है। इसलिए पैरों में अचानक लकवा या कमजोरी महसूस होने पर तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।

अचानक पैरों में लकवा क्यों मार सकता है?

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, पैरों में अचानक लकवा आने का मतलब हमेशा स्ट्रोक नहीं होता। इसके पीछे मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी यानी स्पाइनल कॉर्ड, नसों या मांसपेशियों से जुड़ी कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। सही कारण का पता केवल डॉक्टर की जांच और जरूरी टेस्ट के बाद ही लगाया जा सकता है। इसलिए घर पर इंतजार करने या घरेलू उपाय अपनाने की बजाय तुरंत मेडिकल सहायता लेना जरूरी है।

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  • डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि कई गंभीर बीमारियां अचानक पैरों की ताकत खत्म कर सकती हैं। इनमें सबसे प्रमुख कारण स्ट्रोक है, जिसमें मस्तिष्क तक ब्लड फ्लो प्रभावित हो जाता है।
  • इसके अलावा स्पाइनल कॉर्ड में चोट लगना, रीढ़ की नसों पर दबाव पड़ना, स्लिप डिस्क के कारण स्पाइनल कॉर्ड का दब जाना, गिलियन-बैरे सिंड्रोम (Guillain-Barré Syndrome), नसों से जुड़ी बीमारियां और कुछ न्यूरोलॉजिकल विकार भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
  • शरीर में पोटैशियम की ज्यादा कमी जैसे गंभीर इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन भी अचानक पैरों को कमजोर बना सकता है। कुछ मामलों में स्पाइनल इंफेक्शन, रीढ़ में ब्लीडिंग या अन्य इंफेक्शन भी इस समस्या की वजह बनते हैं।

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sudden paralysis in legs

लकवा की पहचान कैसे होती है और इलाज?

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि पैरों में अचानक लकवा आने का वास्तविक कारण जानने के लिए न्यूरोलॉजिकल जांच की जाती है। इसके साथ जरूरत के अनुसार एमआरआई (MRI), सीटी स्कैन (CT Scan), ब्लड टेस्ट और अन्य जांचें कराई जाती हैं। इलाज पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या किस वजह से हुई है। यदि स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव है, तो इमरजेंसी सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। वहीं गिलियन-बैरे सिंड्रोम जैसी स्थितियों में इम्यूनोथेरेपी और दवाओं से उपचार किया जाता है। इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन होने पर उसे तुरंत ठीक किया जाता है, जबकि कई मरीजों को रिकवरी के लिए फिजियोथेरेपी की भी जरूरत पड़ती है।

निष्कर्ष

पैरों में अचानक लकवा या गंभीर कमजोरी कभी भी सामान्य समस्या नहीं मानी जानी चाहिए। यह शरीर का ऐसा संकेत है जो किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी की ओर इशारा कर सकता है। डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, समय पर अस्पताल पहुंचना, सही जांच कराना और कारण के अनुसार तुरंत इलाज शुरू करना ही मरीज को स्थायी नुकसान और विकलांगता से बचा सकता है। इसलिए यदि पैरों की ताकत अचानक खत्म होने लगे, तो बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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FAQ

  • पैरों में अचानक कमजोरी महसूस होने पर क्या करना चाहिए?

    ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल या इमरजेंसी विभाग में जाना चाहिए। घर पर इंतजार करना या घरेलू इलाज करना नुकसानदायक हो सकता है।
  • क्या पैरों का लकवा पूरी तरह ठीक हो सकता है?

    यदि समय पर सही कारण का पता चल जाए और तुरंत इलाज शुरू हो जाए, तो कई मरीजों में अच्छी रिकवरी संभव होती है।
  • क्या लकवा के इलाज के बाद फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ती है?

    कई मरीजों में दवाओं या सर्जरी के बाद मांसपेशियों की ताकत और चलने-फिरने की क्षमता वापस लाने के लिए फिजियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन की जरूरत होती है।

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Akanksha Tiwari

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आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jun 30, 2026 21:29 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Jun 30, 2026 21:29 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Bharath Kumar Surisetti

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