Fri Sep 11, 2026 | 07:29 PM IST

Medically Reviewed by Dr Kamalesh A , Senior Consultant Physician - Internal Medicine

थोड़ी देर चलने पर होने लगता है पैरों में दर्द? डॉक्टर से जानें कारण

कुछ लोगोंं को थोड़ा चलने पर ही पैरों में दर्द होने लगता है। कई बार लोग इसे थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेक‍िन यह क‍िसी बीमारी का संकेत हो सकता है। जानें दर्द के कारण और बचाव के उपाय।

थोड़ी दूर चलते ही पैरों में दर्द होना सामान्‍य नहीं है। इसके पीछे कारण खराब ब्‍लड सर्कुलेशन हो सकता है। जब पैरों तक पर्याप्‍त ब्‍लड और ऑक्‍सीजन नहीं पहुंच पाता है, तो चलने के दौरान पैरों में ऐंठन और दर्द महसूस होता है। यह समस्‍या हाई बीपी, डायब‍िटीज और हाई कोलेस्‍ट्रॉल के मरीजों में ज्‍यादा देखी जाती है। हालांक‍ि, कम चलने पर पैरों में दर्द की समस्‍या के पीछे और भी कई कारण हो सकते हैं। पैरों में दर्द का कारण समझने के ल‍िए हमने Dr. Kamalesh A, Senior Consultant Physician At Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।

1. गलत फुटव‍ियर पहनना

अगर आपने ऐसा फुटव‍ियर पहना है, ज‍िनसे पैरों को सपोर्ट नहीं म‍िल रहा है, तो पैरों में दर्द हो सकता है। ज्‍यादा टाइट या गलत शू साइज के कारण भी पैरों में दर्द हो सकता है इसल‍िए अगर कम चलने पर भी पैर दर्द हो रहा है, तो सबसे पहले अपने फुटव‍ियर चेक करें।

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2. व‍िटाम‍िन और म‍िनरल की कमी तो नहीं?

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कई बार व‍िटाम‍िन डी, बी12, कैल्‍श‍ियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे म‍िनरल्‍स की कमी के कारण पैरों में दर्द हो सकता है। इन पोषक तत्‍वों की कमी से मांसपेश‍ियां जल्‍दी थकने लगती हैं और आगे चलकर पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट और कमजोरी महसूस हो सकती है। Foundation For Peripheral Neuropathy के मुताब‍िक, कॉपर, व‍िटाम‍िन बी1, बी6, बी9, बी12, व‍िटाम‍िन ई जैसे पोषक तत्‍वोंं की कमी से नसों को नुकसान हो सकता है। नर्व डैमेज भी पैरों में दर्द का एक कारण हो सकता है।

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3. मोटापा बन सकता है दर्द का कारण

ज‍िन लोगों का वजन ज्‍यादा होता है या जो लोग मोटापे का श‍िकार होते हैं, उन्‍हें कुछ देर चलने या खड़े रहने पर ही दर्द और पैरों में सूजन जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। ज्‍यादा वजन के कारण जोड़ोंं में घ‍िसाव बढ़ता है और आगे चलकर गठ‍िया रोग हो सकता है।

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4. फि‍ज‍िकल एक्‍ट‍िव‍िटी की कमी

अगर आप शारीर‍िक रूप से ज्‍यादा एक्‍ट‍िव नहीं हैं और अचानक वॉक करना शुरू कर देंगे, तो पैरोंं में दर्द हो सकता है। इससे पैरों में ख‍िंचाव होता है और मसल्‍स जल्‍दी थक जाती हैं। जो लोग लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं या न‍ियम‍ित एक्‍सरसाइज नहींं करते उनके भी पैरोंं में दर्द हो सकता है।

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5. जोड़ों या नसों की समस्‍या

चलने पर अगर घुटनोंं, टखनोंं या एड़ि‍यों में ज्‍यादा दर्द हो, तो इसके पीछे गठ‍िया रोग हो सकता है। इससे जोड़ों में सूजन हो सकती है। उम्र बढ़ने के साथ यह समस्‍या और बढ़ सकती है। इसके अलावा नसोंं की समस्‍या न्‍यूरोपैथी में भी पैर दर्द हो सकते हैं। डायब‍िटीज के मरीजोंं को इसका ज्‍यादा खतरा रहता है।

न‍िष्‍कर्ष:

थोड़ी देर चलने पर ही पैर दर्द होते हैं, तो इसके पीछे जोड़ों या नसों की समस्‍या जैसे गठ‍िया या न्‍यूरोपैथी हो सकती है। इसके अलावा, फि‍ज‍िकल एक्‍ट‍िव‍िटी की कमी, मोटापा, व‍िटाम‍िन और म‍िनरल की कमी या गलत फुटव‍ियर पहनने के कारण भी कम चलने पर भी पैरों में दर्द हो सकता है।

FAQ

  • पैरों का दर्द दूर करने के घरेलू उपाय क्‍या हैं?

    पैरों का दर्द दूर करने के ल‍िए नीलग‍िरी के तेल को बादाम या नार‍ियल तेल के साथ म‍िलाकर पैरों की माल‍िश करें, गुनगुने पानी से स‍िंकाई करें, हल्‍दी वाला दूध प‍िएं और ज्‍यादा से ज्‍यादा पैरों को आराम दें।
  • पैरोंं में दर्द होने पर डॉक्‍टर को कब द‍िखाएं?

    अगर पैरों का दर्द एक हफ्ते के भीतर ठीक न हो, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें। इसके अलावा पैरों में दर्द के साथ-साथ सूजन, सुन्नपन, कमजोरी या चलने में कठ‍िनाई हो, तो भी इसे नजरअंदाज न करें। 

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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