Fri Sep 18, 2026 | 04:46 PM IST

Medically Reviewed by Dr Rajeev Chowdry , General Physician & Internal Medicine Specialist, Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad | 23 Years of Clinical Experience

पैरों में अचानक आई कमजोरी को न करें नजरअंदाज, डॉक्‍टर से जानें इसका कारण और कब है यह मेडि‍कल इमरजेंसी?

पैरों में अचानक आई कमजोरी कई बार व‍िटाम‍िन की कमी या ज्‍यादा चलने से हो सकती है। वहीं कुछ मामलों में स्‍थ‍ित‍ि इतनी गंभीर हो सकती है क‍ि पैरों की कमजोरी स्‍थायी बन जाती है। डॉक्‍टर से जानें पैरों में कमजोरी के कारण और समझें क‍ि इमरजेंसी की स्‍थ‍िति‍ कब होती है?

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पैरों में कमजाेरी महसूस होने के पीछे ज्‍यादा काम का दबाव हो सकता है या स्‍ट्रेस के कारण भी कुछ लोगों को पैरों में कमजोरी होती है। ड‍िहाइड्रेशन के कारण भी यह समस्‍या हो सकती है। कई बार ज्‍यादा एक्‍सरसाइज करने के बाद भी पैरों में दर्द या कमजोरी महसूस होती है, लेक‍िन यह दर्द आराम करने से ठीक हो जाता है। कई बार जब शरीर में व‍िटाम‍िन्‍स और म‍िनरल्‍स की कमी होती है, तो भी पैरों में कमजोरी महसूस होती है। व‍िटाम‍िन बी12 की कमी के कारण पैरों में झुनझुनी, सुन्नपन और कमजोरी महसूस हो सकती है। व‍िटाम‍िन डी की कमी से भी मांसपेश‍ियों में कमजोरी हो सकती है। इससे चलने-फ‍िरने में परेशानी हो सकती है। मैग्नीशियम, पोटैशियम और आयरन की कमी से भी थकान और पैरों में कमजोरी हो सकती है। पैरों की कमजोरी के ये कारण समय के साथ ठीक हो जाते हैं, लेक‍िन कई ऐसे कारण हैं जो बीमार‍ियों से संबंध‍ित हो सकते हैं। ऐसे कुछ कारणों के बारे में व‍िस्‍तार से जानने के ल‍िए हमने Dr. Rajeev Chowdry, Internal Medicine Specialist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

पैरों की नस दबना

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अगर रीढ़ की हड्डी में कोई नस दब जाए, तो पैरों में कमजोरी हो सकती है। नस दबने के कारण्‍ पैरों में दर्द, झुनझुनी या कमजोरी हो सकती है। सायटिक नस पर दबाव पड़ने से भी कमर से पैर तक दर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है। Mayo Clinic में प्रकाश‍ित एक लेख के मुताब‍िक, जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक कम चलता-फिरता है, तो मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। इससे चलने की क्षमता और कम हो सकती है।

ज्‍यादा वजन भी बन सकता है कारण

साल 2021 में BMC Sports Science, Medicine And Rehabilitation में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, ज्‍यादा वजन भी मांसपेश‍ियों में कमजोरी का एक कारण हो सकता है खासकर बुजुर्गों में। स्‍टडी में देखा गया क‍ि एक अधिक वजन वाले व्यक्ति में मांसपेशियों की ताकत पर असर पड़ता है और शरीर का वजन ज्यादा होने के कारण द‍िनचर्या प्रभाव‍ित हो सकती है।

डायबिटिक न्यूरोपैथी

क्रॉन‍िक डायब‍िटीज के मरीजों में अक्‍सर डायब‍िट‍िक न्‍यूरोपैथी की समस्‍या देखी गई है ज‍िसमें पैरों की नसें प्रभाव‍ित होती हैं। इस वजह से जलन, सुन्नपन, झुनझुनी या कमजोरी होती है।

स्लि‍प ड‍िस्‍क

स्‍पाइन के बीच में मौजूद कुशन जैसी ड‍िस्‍क बाहर की ओर न‍िकलकर नस पर दबाव डालती है, इस स्‍थ‍ित‍ि को स्‍ल‍िप ड‍िस्‍क कहा जाता है। इससे कमर में दर्द होता है, कमर या पैरों में दर्द होता है, पैर में सुन्नपन या कमजोरी महसूस होती है।

स्पाइनल स्टेनोसिस

जब रीढ़ की हड्डी की नलिका संकरी हो जाती है, तो नसों पर दबाव बढ़ जाता है। स्‍पाइनल स्‍टेनोस‍िस के कारण दोनों पैरों में कमजोरी, थोड़ी दूर चलने पर दर्द जैसे लक्षण महसूस होते हैं।

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पैरों की कमजोरी कब बन सकती है इमरजेंसी?

  • अगर पैरों में कमजोरी अचानक शुरू हो जाए।
  • एक या दोनों पैरों में तेजी से ताकत कम होने लगे।
  • आराम करने के बाद भी कमजोरी बनी रहे।
  • चलना या खड़ा होना मुश्किल हो जाए।

स्‍ट्रोक

स्‍ट्रोक के कारण अचानक एक पैर में कमजोरी महसूस होती है। इस दौरान हाथों में भी कमजोरी होती है, बोलने में परेशानी होती है और चेहरा ढेढ़ा हो जाता है। यह एक इमरजेंसी स्‍थ‍िति‍ है। ऐसे में तुरंत हॉस्‍प‍िटल जाना चाह‍िए।

कॉडा इक्वाइना सिंड्रोम

कॉडा इक्वाइना सिंड्रोम (Cauda Equina Syndrome) एक दुर्लभ मेड‍िकल इमरजेंसी है। यह तब होती है जब स्‍पाइन के न‍िचले ह‍िस्‍से में मौजूद नसों के गुच्‍छे पर ज्‍यादा दबाव पड़ता है। स्‍पाइन में चोट लगने के कारण यह समस्‍या हो सकती है। इसमें पेशाब करने में दर्द होता है, कमर में तेज दर्द होता है और पैरों में अचानक कमजोरी हो सकती है। यह मेड‍िकल इमरजेंसी की स्‍थ‍िति‍ इसल‍िए है क्‍योंक‍ि अगर समय पर इलाज न मिले, तो नसों को स्थायी नुकसान हो सकता है।

गंभीर इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन

जब शरीर में पोटैशियम की मात्रा बहुत कम या बहुत ज्यादा हो जाती है तब अचानक मांसपेशियों की कमजोरी हो सकती है। इस पर ध्‍यान न देने से लकवा जैसी स्थिति हो सकती है।

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डॉक्टर के पास कब जाएं?

  • पैरों के साथ-साथ हाथों में भी कमजोरी महसूस होना।
  • बोलने या समझने में द‍िक्‍कत होना।
  • ब्‍लैडर कंट्रोल खोना।
  • चलने में परेशानी होना।

पैरों की कमजोरी की जांच कैसे होती है?

  • डॉक्‍टर पहले लक्षणों और मेड‍िकल ह‍िस्‍ट्री की जानकारी लेते हैं।
  • इसके बाद ब्‍लड टेस्‍ट और ब्‍लड शुगर टेस्‍ट क‍िया जा सकता है।
  • व‍िटाम‍िन बी12, डी, थायराइड प्रोफाइल टेस्‍ट भी क‍िया जाता है।
  • एमआरआई, सीटी स्‍कैन जैसी जांच भी की जाती है।

पैरों की कमजोरी का इलाज कैसे किया जाता है?

अगर सामान्‍य कारण हैं, तो संतुल‍ित आहार, सप्‍लीमेंट्स, पर्याप्‍त पानी का सेवन, फ‍िज‍ियोथेरेपी, एक्‍सरसाइज, शुगर कंट्रोल, वेट मैनेजमेंट जैसे उपायों से आराम म‍िलता है। नसों पर अध‍िक दबाव होने पर सर्जरी, दवाएं, इम्‍यूनोथेरेपी की मदद ली जाती है।

न‍िष्‍कर्ष:

पैरों की कमजोरी के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे पैरों की नस दबना, डायब‍िट‍िक न्‍यूरोपैथी, स्‍ल‍िप ड‍िस्‍क, स्पाइनल स्टेनोसिस वगैरह। स्‍ट्रोक, कॉडा इक्वाइना सिंड्रोम या गंभीर इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन जैसी गंभीर स्‍थि‍त‍ियों में तुरंत मेड‍िकल हेल्‍प लेना चाह‍िए, यह मेड‍िकल इमरजेंसी होती है। पैरों में कमजोरी के पीछे व‍िटाम‍िन की कमी, ड‍िहाइड्रेशन, ज्‍यादा एक्‍सरसाइज जैसे सामान्‍य कारण भी हो सकते हैं जो आराम करने से ठीक हो जाते हैं।

FAQ

  • पैरों को मजबूत बनाने के ल‍िए क्‍या करें?

    पैरों को मजबूत बनाने के ल‍िए रोजाना 30 म‍िनट टहलें, संतुल‍ित प्रोटीन आहार लें, व‍िटामि‍न बी12, डी और आयरन की कमी से बचें। शुगर लेवल कंट्रोल करें और लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठने से बचें।
  • क्या ज्यादा देर तक बैठने से पैरों में कमजोरी हो सकती है?

    लंबे समय तक एक ही जगह बैठने से पैरों का ब्‍लड सर्कुलेशन प्रभाव‍ित हो सकता है ज‍िससे पैरों में भारीपन और कमजोरी हो सकती है। 

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 03, 2026 21:36 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Rajeev Chowdry

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