Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Rajeev Chowdry , General Physician & Internal Medicine Specialist, Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad | 23 Years of Clinical Experience

बुजुर्गों में पैरों की सूजन के पीछे हो सकते हैं ये 5 कारण, डॉक्‍टर से जानें कैसे करें बचाव?

जब पैर और पेट के न‍िचले ह‍िस्‍से में फ्लूड की ज्‍यादा मात्रा इकट्ठा हो जाती है, तब पैरों में सूजन आती है। इस स्‍थ‍िति‍ को लेग एडिमा (Leg Edema) कहा जाता है। बुजुर्गों को भी यह समस्‍या परेशान करती है। जानें उनमें पैरों की सूजन के पीछे क्‍या कारण हो सकते हैं और कैसे बचाव करें?

बुजुर्गों में कई तरह की शारीर‍िक समस्‍याएं होती हैं ज‍िनमें से एक है पैरों की सूजन। इस स्‍थ‍िति‍ को लेग एडिमा (Leg Edema) कहा जाता है। बुजुर्गों में जूते टाइट होना या एंकल के पास मोजे से न‍िशान पड़ना, पैरों में सूजन का संकेत हो सकते हैं। यह एक या दोनों पैरों को प्रभाव‍ित कर सकता है। पैरों में सूजन की समस्‍या वैसे, तो क‍िसी भी उम्र में हो सकती है, लेक‍िन यह बुजुर्गों में ज्‍यादा देखने को म‍िलती है। अगर आपके भी घर में कोई बुजुर्ग है ज‍िसे यह समस्‍या है, तो लक्षणों पर गौर करें। पैरों में भारीपन, एक पैर का दूसरे से ज्‍यादा भारी लगना, वजन में बदलाव होना वगैरह लेग एड‍िमा के लक्षण हो सकते हैं। आगे जानेंगे बुजुर्गों में यह समस्‍या क्‍यों होती है और इससे कैसे बचें? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Rajeev Chowdry, Internal Medicine Specialist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

लेग एड‍िमा के लक्षण क्‍या हैं?

  • पैरों में सूजन, भारीपन या जकड़न होना।
  • चलने-उठने में परेशानी होना।
  • हल्की ऐंठन महसून होना।
  • रेडनेस या गर्माहट होना।
  • त्वचा पर दबाने से गड्ढा पड़ जाना।

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बुजुर्गों में पैरों की सूजन के पीछे ये कारण हो सकते हैं

  • साल 2023 में Annals Of Vascular Diseases नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, बुजुर्गों में लेग एड‍िमा का कारण उम्र का प्रभाव नहीं बल्‍क‍ि सेडेंटरी लाइफस्‍टाइल है। कम चल‍ने के कारण बुजुर्गों में यह समस्‍या द‍िखाई दी। स्‍टडी में 74 प्रत‍िशत मरीज मह‍िलाएं शाम‍िल थीं।
  • उम्र बढ़ने के साथ नसों के अंदर मौजूद छोटे-छोटे वॉल्व कमजोर होने लगते हैं। इससे पैरों से ब्‍लड, हार्ट तक वापस पहुंचना मुश्किल हो जाता है ज‍िससे पैरों में फ्लूड जमने लगता है और सूजन द‍िखती है।
  • बीपी या दर्द की दवा लेने वाले लोगों में यह समस्‍या ज्‍यादा देखने को म‍िलती है।
  • बुजुर्ग अगर हेल्‍दी डाइट नहीं लेंगे या सोड‍ियम का ज्‍यादा सेवन करेंगे, तो फ्लूड र‍िटेंशन की समस्‍या हो सकती है ज‍िससे पैरों में सूजन बढ़ सकती है।
  • बुजुर्गों की इम्‍यून‍िटी कमजोर होती है ज‍िसके कारण एलर्जी, इंफेक्‍शन वगैरह लेग एड‍िमा की संभावना को बढ़ा सकते हैं।
  • बुजुर्गों में ल‍िवर सि‍रोस‍िस, लंग ड‍िजीज या हार्ट ड‍िजीज भी पैरों में सूजन के कारण बन सकते हैं।

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पैरों की सूजन के पीछे हो सकती हैं ये बीमार‍ियां

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Mayo Clinic के मुताब‍िक, पैरों में सूजन हमेशा हार्ट या सर्कुलेशन से संबंधि‍त समस्‍या नहीं होती है। इसके पीछे ज्‍यादा वजन, एक्‍ट‍िव न रहना, लंबे समय तक एक ही पोजीशन में रहना, टाइट कपड़े या मोजे पहनने जैसे कारण भी हो सकते हैं। हालांक‍ि, पैरों की सूजन के पीछे कुछ गंभीर बीमार‍ियां भी होती हैं जैसे-

  • एक्‍यूट क‍िडनी इंजरी, कार्डियोमायोपैथी, क्रॉन‍िक क‍िडनी ड‍िजीज
  • डीप वेन थ्रोम्बोसिस
  • हार्ट फेलियर
  • लिम्फेडेमा
  • नेफ्रोटिक सिंड्रोम
  • मोटापा या पल्मोनरी हाइपरटेंशन
  • थ्रोम्बोफ्लेबिटिस
  • बेकर स‍िस्‍ट
  • सेल्युलाइटिस (एक तरह का स्‍क‍िन इंफेक्‍शन)
  • ऑस्टियोअर्थराइटिस
  • रुमेटाइड अर्थराइटिस

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लेड एड‍िमा की जांच कैसे होती है?

साल 2010 में European Geriatric Medicine नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताबि‍क, बुजुर्गों में लेग एड‍िमा की पहचान के ल‍िए मेड‍िकल ह‍िस्‍ट्री, फ‍िजि‍कल चेकअप, इमेजि‍ंग और लैब टेस्‍ट‍िंग का सुझाव द‍िया है। इसके अलावा स्‍टडी में यह भी बताया गया है क‍ि लेग एड‍िमा के ल‍िए केवल डाययूरेटिक (मूत्रवर्धक) दवा देना काफी नहीं है।

लेग एड‍िमा की पुष्‍ट‍ि के ल‍िए डॉक्‍टर ये जांच करने की सलाह दे सकते हैं-

  • पेशाब में प्रोटीन की जांच के लिए यूरिन एनालिसिस
  • किडनी की कार्यक्षमता चेक करने के ल‍िए सीरम क्रिएटिनिन टेस्ट
  • थायराइड की जांच के ल‍िए TSH टेस्‍ट
  • ब्‍लड ग्‍लूकोज टेस्‍ट और सीरम एल्ब्यूमिन टेस्‍ट
  • ल‍िवर फंक्‍शन टेस्‍ट
  • एक्‍स-रे, इको टेस्‍ट
  • ब्‍लड क्‍लॉट की संभावना जांचने के ल‍िए डी-डिमर टेस्ट

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क्‍या लेग एडि‍मा से कैसे बचें बुजुर्ग?

  • लेग एड‍िमा से बचने का केवल एक ही तरीका है क‍ि इसके पीछे का कारण पता लगाकर उसका इलाज करें। Harvard Medical School द्वारा प्रकाश‍ित एक लेख के मुताब‍िक, बुजुर्गों में पैरों की सूजन के पीछे ज्‍यादा मामलों में क्रॉनिक वेनस इंसफिशिएंसी (Chronic Venous Insufficiency) को कारण बताया गया है ज‍िसमें पैरों की नसें, ब्‍लड को सही ढंग से हार्ट तक पहुंचने नहीं देती हैं। इसके कारण पैरों की नसों में ब्‍लड जमने लगता है और सूजन द‍िखने लगती है।
  • लेग एड‍िमा से बचने के ल‍िए रोजाना एक्‍सरसाइज करें, हेल्‍दी वजन बनाए रखें, धूम्रपान न करें और लंबे समय तक बैठने या एक ही पोजीशन में रहने से बचें।
  • पैरों की सूजन केवल एक लक्षण नहीं बल्‍क‍ि बीमारी है ज‍िससे नसों की समस्‍या बढ़ सकती है। बचाव के ल‍िए वजन कंट्रोल करें ज‍िससे मांसपेश‍ियों और नसों पर दबाव कम होगा।

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पैरों की सूजन कम करने के ल‍िए ये उपाय अपनाएं

  • हल्‍के मूवमेंट जैसे छोटी वॉक से पैरों की सूजन को कम करने में मदद म‍िलती है और ब्‍लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।
  • पैरों को द‍िन में तीन से चार बार 15 से 20 म‍िनट के ल‍िए ऊपर उठाएं। इससे शरीर के न‍िचले ह‍िस्‍से में जमा फ्लूड कम होता है।
  • कंप्रेशन सॉक्‍स पहनकर भी ब्‍लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद म‍िलती है।
  • फ्लूड र‍िटेंशन कम करने के ल‍िए खाने में नमक की मात्रा कम करें। हाई सोड‍ियम डाइट लेने से सूजन बढ़ सकती है।
  • ऊपर की द‍िशा में पैरों की माल‍िश करें और जरूरत पड़ने पर गठंडी स‍िंकाई करें।
  • हाइड्रेशन का ख्‍याल रखें और आरामदायक फुटव‍ियर पहनें।

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डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • जब पैरों में दर्द ज्‍यादा तेज हो जाए।
  • जब दर्द अचानक होने लगे।
  • दर्द केवल एक पैर में बढ़ने लगे।
  • पैर में दर्द के साथ बुखार, रेडनेस और स्‍क‍िन में टाइटनेस महसूस हो।
  • सांस लेने में तकलीफ हो।
  • सूजन ठीक न हो।
  • ब्‍लड क्‍लॉट की स्‍थ‍िति‍ में तुरंत मेड‍िकल अटेंशन की जरूरत होती है इसल‍िए लापरवाही न करें।

न‍िष्‍कर्ष:

बुजुर्गों में लेग एड‍िमा या पैरों की सूजन के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे ज्‍यादा सोड‍ियम लेना, ल‍िवर स‍िरोस‍िस, लंग ड‍िजीज या हार्ट ड‍िजीज होना, एलर्जी या इंफेक्‍शन भी इसकी आशंका को बढ़ा सकते हैं। नसों के अंदर मौजूद वॉल्‍व का कमजोर होना, सेडेंटरी लाइफस्‍टाइल के कारण भी यह समस्‍या हो सकती है। इसके पीछे कुछ गंभीर बीमार‍ियां भी हो सकती हैं जैसे क्रॉनिक वेनस इंसफिशिएंसी, ऑस्टियोअर्थराइटिस, रुमेटाइड अर्थराइटिस, डीप वेन थ्रोम्बोसिस, हार्ट फेलियर, लिम्फेडेमा, क्रॉन‍िक क‍िडनी ड‍िजीज वगैरह।

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FAQ

  • वैर‍िकोज वेन्‍स और लेग एड‍िमा में क्‍या अंतर है?

    वैर‍िकोज वेन्‍स में नसें खराब होकर फूल जाती हैं और नीले रंग की द‍िखने लगती हैं। वहीं लेग एड‍िमा में पैरों में फ्लूइड भरने से सूजन आती है। क्रॉनिक वेनस इंसफिशिएंसी में वैरिकोज वेन्स और लेग एडिमा दोनों एक साथ भी हो सकते हैं।
  • क्‍या वैरिकोज वेन्स के कारण भी पैरों में सूजन होती है?

    हां, वैरि‍कोज वेन्‍स में पैरों की सूजन द‍िख सकती है। इसमें वेन वॉल्‍व ठीक से काम नहीं कर पाती है ज‍िसके कारण ब्‍लड पैरों में जमा हो जाता है और नसें नीली द‍िखने लगती हैं और पैरों में दर्द भी हो सकता है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 17, 2026 13:09 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Rajeev Chowdry

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