बुजुर्गों में कई तरह की शारीरिक समस्याएं होती हैं जिनमें से एक है पैरों की सूजन। इस स्थिति को लेग एडिमा (Leg Edema) कहा जाता है। बुजुर्गों में जूते टाइट होना या एंकल के पास मोजे से निशान पड़ना, पैरों में सूजन का संकेत हो सकते हैं। यह एक या दोनों पैरों को प्रभावित कर सकता है। पैरों में सूजन की समस्या वैसे, तो किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन यह बुजुर्गों में ज्यादा देखने को मिलती है। अगर आपके भी घर में कोई बुजुर्ग है जिसे यह समस्या है, तो लक्षणों पर गौर करें। पैरों में भारीपन, एक पैर का दूसरे से ज्यादा भारी लगना, वजन में बदलाव होना वगैरह लेग एडिमा के लक्षण हो सकते हैं। आगे जानेंगे बुजुर्गों में यह समस्या क्यों होती है और इससे कैसे बचें? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Rajeev Chowdry, Internal Medicine Specialist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।
लेग एडिमा के लक्षण क्या हैं?
- पैरों में सूजन, भारीपन या जकड़न होना।
- चलने-उठने में परेशानी होना।
- हल्की ऐंठन महसून होना।
- रेडनेस या गर्माहट होना।
- त्वचा पर दबाने से गड्ढा पड़ जाना।
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बुजुर्गों में पैरों की सूजन के पीछे ये कारण हो सकते हैं
- साल 2023 में Annals Of Vascular Diseases नामक जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, बुजुर्गों में लेग एडिमा का कारण उम्र का प्रभाव नहीं बल्कि सेडेंटरी लाइफस्टाइल है। कम चलने के कारण बुजुर्गों में यह समस्या दिखाई दी। स्टडी में 74 प्रतिशत मरीज महिलाएं शामिल थीं।
- उम्र बढ़ने के साथ नसों के अंदर मौजूद छोटे-छोटे वॉल्व कमजोर होने लगते हैं। इससे पैरों से ब्लड, हार्ट तक वापस पहुंचना मुश्किल हो जाता है जिससे पैरों में फ्लूड जमने लगता है और सूजन दिखती है।
- बीपी या दर्द की दवा लेने वाले लोगों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है।
- बुजुर्ग अगर हेल्दी डाइट नहीं लेंगे या सोडियम का ज्यादा सेवन करेंगे, तो फ्लूड रिटेंशन की समस्या हो सकती है जिससे पैरों में सूजन बढ़ सकती है।
- बुजुर्गों की इम्यूनिटी कमजोर होती है जिसके कारण एलर्जी, इंफेक्शन वगैरह लेग एडिमा की संभावना को बढ़ा सकते हैं।
- बुजुर्गों में लिवर सिरोसिस, लंग डिजीज या हार्ट डिजीज भी पैरों में सूजन के कारण बन सकते हैं।
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पैरों की सूजन के पीछे हो सकती हैं ये बीमारियां

Mayo Clinic के मुताबिक, पैरों में सूजन हमेशा हार्ट या सर्कुलेशन से संबंधित समस्या नहीं होती है। इसके पीछे ज्यादा वजन, एक्टिव न रहना, लंबे समय तक एक ही पोजीशन में रहना, टाइट कपड़े या मोजे पहनने जैसे कारण भी हो सकते हैं। हालांकि, पैरों की सूजन के पीछे कुछ गंभीर बीमारियां भी होती हैं जैसे-
- एक्यूट किडनी इंजरी, कार्डियोमायोपैथी, क्रॉनिक किडनी डिजीज
- डीप वेन थ्रोम्बोसिस
- हार्ट फेलियर
- लिम्फेडेमा
- नेफ्रोटिक सिंड्रोम
- मोटापा या पल्मोनरी हाइपरटेंशन
- थ्रोम्बोफ्लेबिटिस
- बेकर सिस्ट
- सेल्युलाइटिस (एक तरह का स्किन इंफेक्शन)
- ऑस्टियोअर्थराइटिस
- रुमेटाइड अर्थराइटिस
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लेड एडिमा की जांच कैसे होती है?
साल 2010 में European Geriatric Medicine नामक जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, बुजुर्गों में लेग एडिमा की पहचान के लिए मेडिकल हिस्ट्री, फिजिकल चेकअप, इमेजिंग और लैब टेस्टिंग का सुझाव दिया है। इसके अलावा स्टडी में यह भी बताया गया है कि लेग एडिमा के लिए केवल डाययूरेटिक (मूत्रवर्धक) दवा देना काफी नहीं है।
लेग एडिमा की पुष्टि के लिए डॉक्टर ये जांच करने की सलाह दे सकते हैं-
- पेशाब में प्रोटीन की जांच के लिए यूरिन एनालिसिस
- किडनी की कार्यक्षमता चेक करने के लिए सीरम क्रिएटिनिन टेस्ट
- थायराइड की जांच के लिए TSH टेस्ट
- ब्लड ग्लूकोज टेस्ट और सीरम एल्ब्यूमिन टेस्ट
- लिवर फंक्शन टेस्ट
- एक्स-रे, इको टेस्ट
- ब्लड क्लॉट की संभावना जांचने के लिए डी-डिमर टेस्ट
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क्या लेग एडिमा से कैसे बचें बुजुर्ग?
- लेग एडिमा से बचने का केवल एक ही तरीका है कि इसके पीछे का कारण पता लगाकर उसका इलाज करें। Harvard Medical School द्वारा प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, बुजुर्गों में पैरों की सूजन के पीछे ज्यादा मामलों में क्रॉनिक वेनस इंसफिशिएंसी (Chronic Venous Insufficiency) को कारण बताया गया है जिसमें पैरों की नसें, ब्लड को सही ढंग से हार्ट तक पहुंचने नहीं देती हैं। इसके कारण पैरों की नसों में ब्लड जमने लगता है और सूजन दिखने लगती है।
- लेग एडिमा से बचने के लिए रोजाना एक्सरसाइज करें, हेल्दी वजन बनाए रखें, धूम्रपान न करें और लंबे समय तक बैठने या एक ही पोजीशन में रहने से बचें।
- पैरों की सूजन केवल एक लक्षण नहीं बल्कि बीमारी है जिससे नसों की समस्या बढ़ सकती है। बचाव के लिए वजन कंट्रोल करें जिससे मांसपेशियों और नसों पर दबाव कम होगा।
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पैरों की सूजन कम करने के लिए ये उपाय अपनाएं
- हल्के मूवमेंट जैसे छोटी वॉक से पैरों की सूजन को कम करने में मदद मिलती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।
- पैरों को दिन में तीन से चार बार 15 से 20 मिनट के लिए ऊपर उठाएं। इससे शरीर के निचले हिस्से में जमा फ्लूड कम होता है।
- कंप्रेशन सॉक्स पहनकर भी ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
- फ्लूड रिटेंशन कम करने के लिए खाने में नमक की मात्रा कम करें। हाई सोडियम डाइट लेने से सूजन बढ़ सकती है।
- ऊपर की दिशा में पैरों की मालिश करें और जरूरत पड़ने पर गठंडी सिंकाई करें।
- हाइड्रेशन का ख्याल रखें और आरामदायक फुटवियर पहनें।
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डॉक्टर से संपर्क कब करें?
- जब पैरों में दर्द ज्यादा तेज हो जाए।
- जब दर्द अचानक होने लगे।
- दर्द केवल एक पैर में बढ़ने लगे।
- पैर में दर्द के साथ बुखार, रेडनेस और स्किन में टाइटनेस महसूस हो।
- सांस लेने में तकलीफ हो।
- सूजन ठीक न हो।
- ब्लड क्लॉट की स्थिति में तुरंत मेडिकल अटेंशन की जरूरत होती है इसलिए लापरवाही न करें।
निष्कर्ष:
बुजुर्गों में लेग एडिमा या पैरों की सूजन के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे ज्यादा सोडियम लेना, लिवर सिरोसिस, लंग डिजीज या हार्ट डिजीज होना, एलर्जी या इंफेक्शन भी इसकी आशंका को बढ़ा सकते हैं। नसों के अंदर मौजूद वॉल्व का कमजोर होना, सेडेंटरी लाइफस्टाइल के कारण भी यह समस्या हो सकती है। इसके पीछे कुछ गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं जैसे क्रॉनिक वेनस इंसफिशिएंसी, ऑस्टियोअर्थराइटिस, रुमेटाइड अर्थराइटिस, डीप वेन थ्रोम्बोसिस, हार्ट फेलियर, लिम्फेडेमा, क्रॉनिक किडनी डिजीज वगैरह।
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FAQ
वैरिकोज वेन्स और लेग एडिमा में क्या अंतर है?
वैरिकोज वेन्स में नसें खराब होकर फूल जाती हैं और नीले रंग की दिखने लगती हैं। वहीं लेग एडिमा में पैरों में फ्लूइड भरने से सूजन आती है। क्रॉनिक वेनस इंसफिशिएंसी में वैरिकोज वेन्स और लेग एडिमा दोनों एक साथ भी हो सकते हैं।क्या वैरिकोज वेन्स के कारण भी पैरों में सूजन होती है?
हां, वैरिकोज वेन्स में पैरों की सूजन दिख सकती है। इसमें वेन वॉल्व ठीक से काम नहीं कर पाती है जिसके कारण ब्लड पैरों में जमा हो जाता है और नसें नीली दिखने लगती हैं और पैरों में दर्द भी हो सकता है।
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Jul 17, 2026 13:09 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Rajeev Chowdry