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पैर की नसों को र‍िलैक्‍स करने के ल‍िए इन 5 हर्बल ऑयल्‍स से करें माल‍िश, जकड़न-थकान से भी म‍िलेगी राहत

थकी हुई पैरों की नसों को र‍िलैक्‍स करने के लिए ब्राह्मी, अश्वगंधा, तिल, देवदार के तेल वगैरह से माल‍िश करें, इससे जल्‍द आराम मिलेगा।

लंबे समय तक खड़े रहना, बहुत चलना या एक ही जगह पर बैठ कर काम करना, ये सभी कारण हमारे पैरों की नसों में थकान और जकड़न ला सकते हैं। अकसर लोग इसे मामूली दर्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह संकेत है कि आपके शरीर में असंतुलन है। शरीर में 'वात दोष' बढ़ने से नसों में तनाव, सूजन और ऐंठन बढ़ जाती है। ऐसे में हर्बल ऑयल से मालिश करना न केवल नसों को राहत देता है, बल्क‍ि मानसिक तनाव को भी कम करता है। आयुर्वेद‍िक दृष्टिकोण से देख‍ें, तो कुछ विशिष्ट जड़ी-बूटियों से बने तेल नसों को पोषण देने के साथ-साथ वात को शांत करते हैं। इस लेख में हम आपको बताएंगे 5 ऐसे हर्बल ऑयल्स के बारे में जो खास तौर पर पैरों की नसों की थकान, जकड़न और सूजन को दूर करने में मदद करते हैं। माल‍िश का सही तरीका, समय और कितनी बार करें, इन सभी बातों पर आगे बात करेंगे। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने लखनऊ के व‍िकास नगर में स्‍थित प्रांजल आयुर्वेद‍िक क्‍लीन‍िक के डॉ मनीष स‍िंह से बात की।

1. कर्पूरादि तैलम- Karpooradi Thailam

कपूरादि तेल में मुख्य रूप से कपूर, नारियल तेल और अन्य ठंडक देने वाले तत्व होते हैं। यह नसों को तुरंत ठंडक पहुंचाता है और पैरों की सूजन या जलन में तुरंत आराम देता है। यह उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिन्हें पैरों में गर्माहट, सूजन या दिनभर की थकान के बाद भारीपन महसूस होता है। कपूर की तासीर ठंडी होती है, जिससे नसें शांत होती हैं और ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है।

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2. ब्राह्मी तेल- Brahmi Oil

ब्राह्मी को मानसिक तनाव कम करने और तंत्रिका तंत्र को मजबूत करने वाली जड़ी-बूटी माना गया है। जब पैर थकान से भारी हो जाते हैं, तो ब्राह्मी तेल से की गई मालिश नसों को शांत करती है और द‍िमाग को भी रिलैक्स करती है। यह खास तौर पर उन लोगों के लिए सही है जो ऑफिस वर्क या मानसिक दबाव के कारण थकान के लक्षण महसूस करते हैं।

3. देवदार का तेल- Cedar Oil

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देवदार पेड़ की लकड़ी से बना यह तेल आयुर्वेद में एक अच्‍छा दर्द निवारक तेल माना जाता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और रिलैक्सिंग गुण होते हैं जो नसों की सूजन और खिंचाव को कम करते हैं। अगर आपके पैरों में हल्का-हल्का दर्द, ऐंठन या भारीपन लगातार रहता है, तो देवदार के तेल से नियमित मालिश राहत देती है। इसकी सुगंध भी बहुत सुकून भरी होती है, जो मानसिक थकान को भी दूर करती है।

4. अश्वगंधा तेल- Ashwagandha Oil

अश्वगंधा को आयुर्वेद में ताकत देने वाली जड़ी-बूटी माना गया है। अश्वगंधा तेल से मालिश करने से मांसपेश‍ियों और नसों को गहराई से पोषण मिलता है। यह वात को संतुलित करता है, जिससे नसों की अकड़न कम होती है और थकान दूर होती है। यह ऑयल विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो दिनभर खड़े रहते हैं या जिन्हें बार-बार पैरों में झुनझुनाहट महसूस होती है।

5. अर्जुन तेल- Arjun Oil

अर्जुन छाल से बना तेल, नसों और ब्‍लड वैसल्‍स को मजबूत करता है। इसका इस्‍तेमाल, विशेष रूप से उन लोगों के लिए होता है जिन्हें ब्लड सर्कुलेशन की समस्या होती है। अर्जुन तेल से मालिश नसों को मजबूती देता है और पैरों में हल्कापन महसूस होता है।

पैरों की नसों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए नियमित मालिश जरूरी है। ऊपर बताए गए हर्बल ऑयल्स आयुर्वेद के अनुसार नसों को प्राकृतिक ढंग से पोषण देते हैं और वात दोष को शांत करते हैं। हफ्ते में 2 से 3 बार, सोने से पहले हल्के गर्म तेल से 10 मिनट तक पैरों की मालिश करें। यह न केवल थकान और जकड़न को दूर करेगा, बल्कि नींद भी बेहतर होगी और अगली सुबह शरीर ज्यादा एनर्जेट‍िक महसूस करेगा।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Nov 05, 2025 06:30 IST

    Modified By : Anurag Gupta
  • Nov 05, 2025 06:30 IST

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  • Nov 05, 2025 06:30 IST

    Published By : Yashaswi Mathur

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