Fri Sep 18, 2026 | 01:43 PM IST

Medically Reviewed by Dr Sharad Malhotra , Senior Consultant & Director – Gastroenterology, Hepatology & Therapeutic Endoscopy

IBS जीवनभर रहने वाली बीमारी है या इसे ठीक किया जा सकता है? गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से जानें

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) एक लंबे समय तक रहने वाली डाइजेशन संबंधी स्थिति हो सकती है, लेकिन सही डाइट, लाइफस्टाइल और इलाज से इसके लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

क्या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) का नाम सुनते ही आपके मन में यह सवाल आता है कि क्या अब यह समस्या जिंदगीभर रहेगी? आईबीएस से परेशान कई लोगों के लिए यह चिंता आम होती है, क्योंकि इसमें पेट दर्द, गैस, ब्लोटिंग, कब्ज या दस्त जैसी समस्याएं बार-बार दिखाई दे सकती हैं लेकिन इरिटेबल बाउल सिंड्रोम को समझना जरूरी है कि यह एक ऐसी स्थिति है जिसे सही तरीके से मैनेज किया जा सकता है।

आकाश हेल्थकेयर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं थेराप्यूटिक एंडोस्कोपी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और डायरेक्टर, डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति हमेशा बीमार रहेगा। सही जानकारी, ट्रिगर फूड्स की पहचान, बैलेंस डाइट और हेल्दी आदतों के जरिए इसके लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

क्या आईबीएस पूरी तरह से ठीक हो सकता है?

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम एक लंबे समय तक रहने वाली क्रॉनिक स्थिति हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मरीज को हमेशा परेशानी महसूस होती रहेगी। सही डाइट, लाइफस्टाइल में बदलाव, तनाव को कंट्रोल करना और डॉक्टर की सलाह से इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के लक्षणों को काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है।

  • डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं कि आईबीएस के लक्षण हमेशा एक जैसे नहीं रहते। कुछ लोगों में लंबे समय तक लक्षण बने रह सकते हैं, जबकि कुछ लोगों में समय के साथ लक्षण काफी कम हो जाते हैं।
  • इरिटेबल बाउल सिंड्रोम में अक्सर लक्षणों बदलाव देखने लगते हैं। कुछ समय मरीज को पेट दर्द, गैस या मल त्याग में परेशानी हो सकती है, जबकि कुछ समय वह पूरी तरह सामान्य महसूस कर सकता है।
  • इसलिए इरिटेबल बाउल सिंड्रोम को ऐसी बीमारी के रूप में समझना चाहिए जिसे सही तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है, न कि ऐसी समस्या के रूप में जिसमें हमेशा परेशानी बनी रहे।

साल 2020 में The American Journal of Gastroenterology में प्रकाशित स्टडी से यह स्पष्ट होता है कि इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) से पीड़ित मरीजों में मृत्यु का जोखिम नहीं बढ़ता है। हालांकि IBS के लक्षण मरीजों के लिए काफी तनावपूर्ण हो सकते हैं और वे अक्सर गंभीर बीमारी की चिंता में रहते हैं, लेकिन आंकड़ों से साफ है कि यह समस्या जानलेवा नहीं है।

कौन-सी चीजें IBS के लक्षण बढ़ा सकती हैं?

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं कि इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के लक्षण कई कारणों से बढ़ सकते हैं। कुछ सामान्य ट्रिगर हैं-

  • अगर व्यक्ति आईबीएस की समस्या से जूझ रहा है और तला-भुना या फैट वाला भोजन करता है तो इससे इरिटेबल बाउल सिंड्रोम ट्रिगर हो सकता है।
  • कुछ हाई-FODMAP फूड्स का सेवन भी आईबीएस मरीजों में ट्रिगर का काम कर सकते हैं।
  • बहुत ज्यादा मसालेदार खाना खाने से भी कुछ मरीजों में आईबीएस ट्रिगर हो सकता है।
  • अनियमित खानपान भी इरिटेबल बाउल सिंड्रोम को ट्रिगर कर सकता है।
  • कुछ लोगों में तनाव और चिंता भी इरिटेबल बाउल सिंड्रोम को ट्रिगर करता है।
  • नींद की कमी के कारण भी इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के लक्षण बढ़ सकते हैं।

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. शरद मल्होत्रा का कहना है कि हर इरिटेबल बाउल सिंड्रोम मरीज में ट्रिगर अलग हो सकते हैं। किसी एक व्यक्ति को जिस भोजन से समस्या होती है, जरूरी नहीं कि वही दूसरे व्यक्ति में भी परेशानी बढ़ाए।

Is IBS Lifelong Condition

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम से कैंसर का खतरा?

साल 2022 में The American Journal of Gastroenterology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) से पीड़ित लोगों में सामान्य आबादी की तुलना में कैंसर का जोखिम बिल्कुल नहीं बढ़ता है। लगभग 12 वर्षों तक चले इस शोध में पाया गया कि आईबीएस के मरीजों में कैंसर से होने वाली मृत्यु की संभावना 17% तक कम थी। इसके अलावा, IBS रोगियों में डाइजेस्टिव सिस्टम के कैंसर, खासतौर से कोलन और मलाशय यानी रेक्टम के कैंसर का खतरा काफी कम देखा गया।

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इरिटेबल बाउल सिंड्रोम कंट्रोल करने के तरीके

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं कि इरिटेबल बाउल सिंड्रोम का इलाज केवल दवाओं तक सीमित नहीं होता। लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव लक्षणों को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

1. बैलेंस डाइट

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम वाले मरीजों को ऐसे फूड्स की पहचान करनी चाहिए जो लक्षण बढ़ाते हैं। फूड डायरी बनाकर ट्रिगर फूड्स को समझने में मदद मिल सकती है। अपनी बैलेंस डाइट से आप ट्रिगर फूड्स को अलग कर सकते हैं, इसके लिए आप डाइटीशियन की सलाह भी ले सकते हैं।

2. तनाव कंट्रोल

तनाव और चिंता इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। योग, मेडिटेशन और नियमित एक्सरसाइज कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

3. डेली रूटीन सुधारें

समय पर भोजन करना, पर्याप्त नींद लेना और फिजिकली एक्टिव रहना डाइजेस्टिव हेल्थ के लिए जरूरी है।

निष्कर्ष

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम एक लंबे समय तक रहने वाली डाइजेशन संबंधी स्थिति हो सकती है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि इसके लक्षण हमेशा परेशान करते रहें। सही डाइट, स्ट्रेस मैनेजमेंट, हेल्दी लाइफस्टाइल और डॉक्टर की सलाह से इरिटेबल बाउल सिंड्रोम को प्रभावी तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है। इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के साथ भी व्यक्ति सामान्य और हेल्दी जीवन जी सकता है, बस अपने शरीर के संकेतों को समझना और सही मैनेजमेंट अपनाना जरूरी है।

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FAQ

  • क्या IBS के मरीज बाहर का खाना नहीं खा सकते?

    कुछ लोगों में बाहर का तला-भुना या ज्यादा मसालेदार भोजन लक्षण बढ़ा सकता है। अपनी सहन क्षमता के अनुसार भोजन चुनना बेहतर होता है।
  • क्या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के लिए हमेशा दवाएं लेनी पड़ती हैं?

    इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के लिए हमेशा दवाएं लेनी जरूरी नहीं होती हैं। कई लोगों में डाइट और लाइफस्टाइल बदलाव से काफी सुधार हो सकता है। दवाओं की जरूरत लक्षणों और मरीज की स्थिति के अनुसार तय की जाती है।

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Akanksha Tiwari

Akanksha Tiwari

Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 03, 2026 18:40 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Sharad Malhotra

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