Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr Naveen Polavarapu , Gastroenterologist

कब्ज वाला IBS या दस्त वाला IBS? डॉक्टर से जानें दोनों में क्या है फर्क?

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) में कुछ लोगों को कब्ज की समस्या होती है, जबकि कुछ को बार-बार दस्त आते हैं। दोनों प्रकार के IBS के लक्षण और मैनेजमेंट अलग हो सकते हैं।

क्या आपको कभी कब्ज की समस्या रहती है और कभी अचानक दस्त की परेशानी शुरू हो जाती है? या फिर बार-बार पेट दर्द, गैस और ब्लोटिंग के साथ मल त्याग की आदतों में बदलाव महसूस होता है? ये लक्षण इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) से जुड़े हो सकते हैं। इरिटेबल बाउल सिंड्रोम एक आम डाइजेशन संबंधी समस्या है, लेकिन इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग दिखाई दे सकते हैं।

यशोदा हॉस्पिटल्स, हाईटेक सिटी, हैदराबाद के सीनियर कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, लिवर स्पेशलिस्ट और एडवांस्ड थेराप्यूटिक एंडोस्कोपिस्ट व एंडोसोनोलॉजिस्ट, Dr. Naveen Polavarapu के अनुसार, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम का कोई एक कारण नहीं होता। खान-पान, तनाव, आंतों की सेंसिटिविटी, नींद की कमी और लाइफस्टाइल जैसे कई कारक इसके लक्षणों को प्रभावित कर सकते हैं। आइए जानते हैं कब्ज वाले IBS और दस्त वाले IBS के बीच अंतर कैसे समझें?

कब्ज वाला IBS Vs दस्त वाला IBS?

डॉ. नवीन के अनुसार, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के अलग-अलग प्रकार होते हैं और सबसे सामान्य प्रकार हैं IBS-C (IBS with Constipation) और IBS-D (IBS with Diarrhea) दोनों में कुछ लक्षण समान हो सकते हैं, लेकिन इनके प्रमुख लक्षण, ट्रिगर और मैनेजमेंट अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए सही प्रकार की पहचान करना इलाज के लिए बेहद जरूरी है।

तुलना का आधार IBS-C (कब्ज वाला IBS) IBS-D (दस्त वाला IBS)
IBS-C और IBS-D क्या हैं? IBS-C यानी ऐसा IBS जिसमें कब्ज प्रमुख समस्या होती है। मल त्याग कम हो सकता है और मल सख्त या सूखा हो सकता है। IBS-D यानी ऐसा IBS जिसमें दस्त प्रमुख समस्या होती है। मरीज को बार-बार पतला या ढीला मल आ सकता है।
मल त्याग की समस्या सप्ताह में कम बार मल त्याग हो सकता है। शौच के दौरान जोर लगाना पड़ सकता है। दिन में कई बार शौच की जरूरत पड़ सकती है और मल ढीला या पानी जैसा हो सकता है।
पेट दर्द पेट में दर्द, ऐंठन या भारीपन महसूस हो सकता है। कई बार शौच के बाद कुछ राहत मिलती है। पेट में ऐंठन या दर्द हो सकता है, जो कई बार मल त्याग के बाद कम हो जाता है।
पेट फूलना और गैस कब्ज के साथ पेट फूलना, गैस और पेट भारी लगना आम हो सकता है। दस्त के साथ भी गैस और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है।
शौच की इच्छा शौच की इच्छा होने के बावजूद मल त्याग करने में परेशानी हो सकती है। अचानक और तेज शौच की इच्छा हो सकती है। कई लोगों को तुरंत टॉयलेट की जरूरत महसूस होती है।
पेट पूरी तरह साफ होने का एहसास शौच के बाद भी ऐसा लग सकता है कि पेट पूरी तरह साफ नहीं हुआ। मल त्याग के बाद अक्सर कुछ राहत महसूस हो सकती है, लेकिन दोबारा शौच की इच्छा जल्दी हो सकती है।
खाने के बाद परेशानी कुछ खास फूड्स कब्ज, गैस या ब्लोटिंग को बढ़ा सकते हैं। कुछ खास फूड्स दस्त, गैस या अचानक शौच की इच्छा को बढ़ा सकते हैं।
तनाव का असर तनाव और चिंता के दौरान कब्ज, पेट दर्द या ब्लोटिंग बढ़ सकती है। तनाव के दौरान दस्त, पेट दर्द और बार-बार शौच की इच्छा बढ़ सकती है।
डाइट में ध्यान पर्याप्त पानी और डॉक्टर की सलाह के अनुसार फाइबर लेना मददगार हो सकता है लेकिन बहुत ज्यादा फाइबर अचानक बढ़ाने से गैस बढ़ सकती है। पर्याप्त लिक्विड लेना जरूरी है। जिन चीजों से दस्त बढ़ते हैं, उन्हें पहचानकर उनसे बचना उपयोगी हो सकता है।
इलाज लक्षणों के अनुसार डाइट, शारीरिक गतिविधि और जरूरत पड़ने पर कब्ज की दवाएं दी जा सकती हैं। लक्षणों के अनुसार डाइट में बदलाव, अलग-अलग तरह के लिक्विड का सेवन और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।

साल 2023 में Nutrients जर्नल में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, आईबीएस (IBS-C) और भोजन के बीच का संबंध बेहद जटिल है। वर्तमान में इसके लिए कोई एक निश्चित डाइट मौजूद नहीं है, लेकिन खान-पान में बदलाव ही इसके लक्षणों को सुधारने का पहला कदम है।

  • आईबीएस के मैनेजमेंट के लिए Low-FODMAP डाइट सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती है, लेकिन यह कब्ज वाले आईबीएस की तुलना में दस्त वाले आईबीएस वाले मरीजों पर ज्यादा असरदार होती है।
  • चूंकि कोई आदर्श डाइट नहीं है, इसलिए डॉक्टर अक्सर सामान्य पोषण संबंधी सलाह और प्रोबायोटिक्स के सेवन की सलाह देते हैं, जो मल त्याग में सुधार करते हैं।
  • भले ही खान-पान की आदतें पेट के दर्द को पूरी तरह से ठीक न करती हों, लेकिन एक हेल्दी लाइफस्टाइल और बैलेंस डाइट निश्चित रूप से दर्द को कम करके मरीजों की जिंदगी को बेहतर बनाते हैं।

क्या IBS का प्रकार बदल सकता है?

डॉ. नवीन का कहना है कि कुछ लोगों में समय के साथ इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के लक्षण बदल सकते हैं। पहले कब्ज रहने वाले व्यक्ति को बाद में दस्त की समस्या हो सकती है या दोनों समस्याएं बारी-बारी से हो सकती हैं। ऐसी स्थिति को IBS-M (Mixed IBS) कहा जाता है, यदि लक्षणों में बदलाव हो रहा है, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी देना जरूरी है ताकि IBS के इलाज में जरूरी बदलाव किए जा सकें।

IBS with Constipation vs IBS with Diarrhea

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कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

डॉ. नवीन सलाह देते हैं कि अगर मल में खून आता दिखे, तेजी से वजन घटने लगे, दस्त के कारण रात में बार-बार नींद से जागना पड़े, लगातार तेज पेट दर्द हो या बुखार के साथ दस्त जैसी दिक्कत हो तो ये किसी अन्य गंभीर बीमारी के संकेत भी हो सकते हैं और जांच की जरूरत होती है ऐसे में तुरंत डॉक्टर की सलाह लें और उचित इलाज को फॉलो करें।

निष्कर्ष

IBS-C और IBS-D दोनों इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के अलग-अलग प्रकार हैं। एक में कब्ज प्रमुख समस्या होती है, जबकि दूसरे में बार-बार दस्त आते हैं। दोनों में पेट दर्द, गैस और ब्लोटिंग जैसे लक्षण समान हो सकते हैं, लेकिन इनके मैनेजमेंट और इलाज के तरीके अलग-अलग होते हैं।

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FAQ

  • क्या IBS के मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं?

    सही डाइट, लाइफस्टाइल में बदलाव और डॉक्टर की सलाह से अधिकांश लोग IBS के लक्षणों को कंट्रोल करके सामान्य जीवन जी सकते हैं।
  • क्या आईबीएस पूरी तरह से ठीक हो सकता है?

    आईबीएस के लक्षण समय के साथ कम या ज्यादा हो सकते हैं। सही मैनेजमेंट से इन्हें कंट्रोल किया जा सकता है।

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Akanksha Tiwari

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Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 11, 2026 13:27 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Aug 11, 2026 13:27 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Naveen Polavarapu

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