इरिटेबल बाउल सिंड्रोम एक ऐसी डाइजेशन संबंधी समस्या है जो आजकल कई लोगों में देखी जा रही है और इसका असर केवल पेट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी, काम और मेंटल हेल्थ को भी प्रभावित कर सकती है।
आकाश हेल्थकेयर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं थेराप्यूटिक एंडोस्कोपी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और डायरेक्टर, डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम को कंट्रोल करने में सिर्फ दवाओं की ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदतों की भी बड़ी भूमिका होती है। खानपान का तरीका, भोजन का समय, नींद, तनाव और कम फिजिकल एक्टिविटी जैसी चीजें इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के लक्षणों को प्रभावित कर सकती हैं।
IBS के लक्षणों को कंट्रोल रखने के लिए अपनाएं ये 5 आदतें
डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम को पूरी तरह खत्म करना हर मामले में संभव नहीं होता, लेकिन सही आदतों और लाइफस्टाइल बदलावों से IBS के लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। सही डेली रूटीन, बैलेंस डाइट और स्ट्रेस मैनेजमेंट इरिटेबल बाउल सिंड्रोम मैनेजमेंट का जरूरी हिस्सा हैं।
1. समय पर भोजन करें
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. शरद मल्होत्रा सलाह देते हैं कि इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के मरीजों के लिए अनियमित खानपान परेशानी बढ़ा सकता है। लंबे समय तक खाली पेट रहना या अचानक बहुत ज्यादा खाना पेट पर दबाव डाल सकता है। कोशिश करें कि रोज एक निश्चित समय पर भोजन करें। छोटे-छोटे अंतराल में संतुलित मात्रा में खाना कुछ लोगों में पेट की परेशानी को कम करने में मदद कर सकता है।
2. ट्रिगर फूड्स को पहचानें
डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं कि हर मरीज के लिए IBS ट्रिगर फूड्स अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों में मसालेदार भोजन, ज्यादा तला हुआ खाना, कैफीन, कुछ डेयरी प्रोडक्ट्स या कुछ हाई-FODMAP फूड्स लक्षण बढ़ा सकते हैं। डॉक्टर शरद मल्होत्रा के अनुसार, बिना सोचे-समझे कई फूड्स को पूरी तरह बंद करने की बजाय यह समझना जरूरी है कि कौन-सा भोजन आपकी समस्या बढ़ा रहा है। इसके लिए फूड डायरी मेंटेन करना फायदेमंद हो सकता है।
3. पर्याप्त पानी पिएं
शरीर में पानी की कमी से कब्ज की समस्या बढ़ सकती है, जबकि दस्त वाले IBS मरीजों में ज्यादा पानी और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की आदत डाइजेस्टिव सिस्टम को बेहतर तरीके से काम करने में मदद कर सकती है।

4. तनाव कंट्रोल करें
इरिटेबल बाउल सिंड्रोम और तनाव के बीच संबंध देखा जाता है। तनाव और चिंता आंतों की एक्टिविटीज को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे पेट दर्द, गैस और मल त्याग से जुड़ी समस्या बढ़ सकती है।
- योग, मेडिटेशन, गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज और नियमित फिजिकल एक्टिविटी तनाव कम करने में मदद कर सकती हैं।
- नियमित एक्सरसाइज डाइजेस्टिव सिस्टम के लिए फायदेमंद हो सकता है।
- हल्की वॉक, योग या अन्य एक्सरसाइज आंतों की एक्टिविटी को बेहतर बनाने और तनाव कम करने में मदद कर सकती हैं।
5. पर्याप्त नींद लें
नींद की कमी शरीर के हार्मोन और तनाव के लेवल को प्रभावित कर सकती है, जिसका असर डाइजेशन पर भी पड़ सकता है। रोज 7-8 घंटे की अच्छी नींद लेने की कोशिश करें और सोने-जागने का समय नियमित रखें।
साल 2011 में Healthcare जर्नल में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार,इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के लक्षण और उनका असर हर व्यक्ति की लाइफस्टाइल के अनुसार अलग-अलग होता है। इसलिए इसका समाधान भी सभी के लिए एक जैसा नहीं हो सकता। हालांकि, इंटरनेशनल रिसर्च से यह स्पष्ट होता है कि 'लो-FODMAP' आहार और घुलनशील फाइबर (Soluble Dietary Fibre) का सेवन IBS के लक्षणों को कम करने में काफी प्रभावी है।
- इसके अलावा, डेली रूटीन में सुधार करना इस बीमारी से राहत पाने का सबसे मुख्य माध्यम है। तनाव कम करना, पर्याप्त नींद लेना, शारीरिक रूप से एक्टिव रहना और प्रतिदिन समय पर संतुलित भोजन करना बेहद जरूरी है।
- खासतौर से रात में ज्यादा भोजन करने से बचना चाहिए। मसालेदार खाना, ज्यादा तेल-चिकनाई वाली चीजें और शराब लक्षणों को और बिगाड़ सकती हैं, इसलिए इनसे परहेज करना चाहिए।
- कुल मिलाकर, सही खान-पान, तनावमुक्त जीवन और अच्छा डेली रूटीन अपनाकर पेट दर्द और मल त्याग से जुड़ी समस्याओं पर आसानी से कंट्रोल पाया जा सकता है।
IBS में कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
डॉ. शरद मल्होत्रा का कहना है कि कुछ लक्षण गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं। अगर आपको मल में खून दिखाई दे, बिना कारण वजन कम हो रहा हो, लगातार तेज पेट दर्द हो, रात में नींद से उठाने वाले लक्षण हों, लंबे समय तक दस्त या कब्ज बनी रहे तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
निष्कर्ष
इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के लक्षणों को कंट्रोल करने में दवाओं के साथ-साथ रोजमर्रा की आदतों की भी अहम भूमिका होती है। समय पर भोजन करना, ट्रिगर फूड्स पहचानना, पर्याप्त पानी पीना, तनाव कम करना, अच्छी नींद और नियमित एक्सरसाइज जैसी आदतें पेट की सेहत को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं। इरिटेबल बाउल सिंड्रोम से परेशान लोगों को अपनी बॉडी के संकेतों को समझते हुए डॉक्टर की सलाह के अनुसार सही लाइफस्टाइल अपनानी चाहिए।
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FAQ
प्रोबायोटिक आईबीएस के लिए अच्छा है?
कुछ लोगों में प्रोबायोटिक्स से आंतों के बैक्टीरिया का संतुलन बेहतर हो सकता है, लेकिन इसका असर व्यक्ति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।क्या IBS के कारण थकान महसूस होती है?
कुछ लोगों में लगातार पेट की परेशानी, खराब नींद और तनाव के कारण थकान महसूस हो सकती है।
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Aug 04, 2026 16:59 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Sharad Malhotra