Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Sharad Malhotra , Senior Consultant & Director – Gastroenterology, Hepatology & Therapeutic Endoscopy

फूड एलर्जी या फूड इनटॉलरेंस? गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से समझें दोनों में कैसे पहचानें अंतर

फूड एलर्जी और फूड इनटॉलरेंस की समस्या एक जैसी नहीं हैं, दोनों के कारण, लक्षण और गंभीरता अलग-अलग होती है। समय पर सही पहचान और इलाज से इस समस्या को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है।

क्या कभी कोई खास खाना खाने के बाद आपको पेट दर्द, गैस, खुजली, सूजन या बेचैनी महसूस हुई है? कई लोग ऐसी स्थिति को तुरंत फूड एलर्जी मान लेते हैं, लेकिन हर बार ऐसा होना जरूरी नहीं है। कई बार इसके पीछे फूड इनटॉलरेंस भी जिम्मेदार हो सकता है। दोनों समस्याओं के लक्षण कुछ हद तक एक जैसे दिखाई दे सकते हैं, लेकिन शरीर में होने वाले रिएक्शन और इनके कारण पूरी तरह अलग होते हैं।

आकाश हेल्थकेयर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं थेराप्यूटिक एंडोस्कोपी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और डायरेक्टर, डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, खाने के बाद होने वाले लक्षणों को नोट करना, सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेना और बिना वजह फूड्स को पूरी तरह बंद न करना बेहतर तरीका है।

आइए जानते हैं फूड एलर्जी और फूड इनटॉलरेंस में क्या अंतर है, इनके लक्षण कैसे पहचानें, कौन-से फूड्स ज्यादा समस्या पैदा कर सकते हैं और कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी हो जाता है।

फूड एलर्जी Vs फूड इनटॉलरेंस?

डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, फूड एलर्जी में शरीर का इम्यून सिस्टम किसी खास फूड को नुकसानदायक समझकर रिएक्शन देता है, जबकि फूड इनटॉलरेंस में शरीर किसी भोजन को पचाने या सहन करने में परेशानी महसूस करता है। सही अंतर समझना जरूरी है ताकि जरूरी बचाव और इलाज समय पर किया जा सके।

फूड एलर्जी फूड इनटॉलरेंस
फूड एलर्जी में शरीर का इम्यून सिस्टम किसी खास भोजन में मौजूद प्रोटीन को खतरा मानकर रिएक्ट करना शुरू कर देता है। फूड इनटॉलरेंस में शरीर किसी फूड को सही तरीके से पचा नहीं पाता या उसे सहन नहीं कर पाता है।
इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम सीधे तौर पर शामिल होता है। इसमें इम्यून सिस्टम की सीधी भूमिका नहीं होती, यह मुख्य रूप से पाचन से जुड़ी समस्या होती है।
फूड एलर्जी के लक्षण अक्सर भोजन खाने के कुछ मिनटों या घंटों के अंदर दिखाई दे सकते हैं। फूड इनटॉलरेंस के लक्षण कई बार भोजन की मात्रा और शरीर की सहन करने की क्षमता पर निर्भर करते हैं।
कम मात्रा में भी एलर्जी पैदा करने वाला भोजन लेने से रिएक्शन हो सकता है। कई लोग थोड़ी मात्रा में उस भोजन को बिना परेशानी के सहन कर सकते हैं।
इसके सामान्य कारणों में मूंगफली, नट्स, दूध, अंडा, मछली, सी फूड, सोया और गेहूं शामिल हो सकते हैं। इसका सामान्य उदाहरण लैक्टोज इनटॉलरेंस है, जिसमें शरीर दूध में मौजूद लैक्टोज को पचाने में परेशानी महसूस करता है।
इसके लक्षणों में स्किन पर लाल चकत्ते, खुजली, होंठ या गले में सूजन, सांस लेने में परेशानी, उल्टी और चक्कर आना शामिल हो सकते हैं। इसके लक्षणों में गैस, पेट फूलना, पेट दर्द, दस्त, मतली और भोजन के बाद भारीपन महसूस होना शामिल हैं।
कुछ गंभीर मामलों में फूड एलर्जी जानलेवा स्थिति पैदा कर सकती है, जिसमें तुरंत इलाज की जरूरत होती है। फूड इनटॉलरेंस आमतौर पर जानलेवा नहीं होता, लेकिन बार-बार होने वाले लक्षण जीवन की क्वालिटी को प्रभावित कर सकते हैं।
फूड एलर्जी में स्किन, सांस और पूरे शरीर से जुड़े लक्षण दिखाई दे सकते हैं। फूड इनटॉलरेंस में ज्यादातर डाइजेस्टिव सिस्टम से जुड़े लक्षण दिखाई देते हैं।

फूड एलर्जी है या फूड इनटॉलरेंस कैसे पहचानें?

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं कि यदि किसी भोजन के बाद बार-बार परेशानी होती है, तो अपने लक्षणों को नोट करना किसी भी व्यक्ति के लिए फायदेमंद हो सकता है। कौन-सा भोजन करने के बाद समस्या हुई, कितनी मात्रा में खाया और कितनी देर बाद लक्षण शुरू हुए, इसकी जानकारी डॉक्टर को कारण समझने में मदद कर सकती है।

फूड एलर्जी और फूड इनटॉलरेंस दोनों के लिए सही पहचान जरूरी है। बिना डॉक्टर की सलाह के कई फूड्स को अपनी डाइट से हटाना सही नहीं होता, क्योंकि इससे शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।

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Food Allergy vs Food Intolerance

National Institute of Allergy and Infectious Diseases में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार-

  • एनआईएआईडी (NIAID) अमेरिका में फूड एलर्जी पर शोध करने वाला प्रमुख संस्थान है, जहां लगभग 8% बच्चे और 11% वयस्क इससे पीड़ित हैं।
  • फूड एलर्जी में हमारा इम्यून सिस्टम भोजन के किसी तत्व को गलती से हानिकारक मान लेता है, जिसके कारण शरीर असामान्य रिएक्शन देने लगता है।
  • यह स्थिति कई बार बेहद गंभीर और जानलेवा भी हो सकती है। इसलिए, फूड एलर्जी को सही समय पर पहचानना, इसके लक्षणों को समझना और सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

साल 2019 में Nutrients जर्नल में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, फूड इनटॉलरेंस एक आम समस्या है, जो दुनिया की लगभग 20% आबादी को प्रभावित करती है। हालांकि, इसे सही तरीके से समझना, इसकी पहचान करना और इसका इलाज करना काफी मुश्किल है। इसका मुख्य कारण यह है कि इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं और यह समस्या इम्यून सिस्टम से जुड़ी नहीं होती है।

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कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

यदि खाना खाने के बाद सांस लेने में परेशानी, चेहरे या गले में सूजन, एलर्जी के तेज लक्षण, बार-बार उल्टी या गंभीर पेट की समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। वहीं, अगर किसी भोजन के बाद लगातार गैस, पेट दर्द या दस्त की समस्या रहती है, तो भी इसकी जांच कराना जरूरी है।

निष्कर्ष

फूड एलर्जी और फूड इनटॉलरेंस दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं, लेकिन इनके लक्षण कई बार एक जैसे लग सकते हैं। फूड एलर्जी में शरीर का इम्यून सिस्टम रिएक्शन देता है, जबकि फूड इनटॉलरेंस डाइजेशन से जुड़ी समस्या होती है। सही पहचान के बाद ही उचित खानपान और इलाज का तरीका अपनाया जा सकता है। अगर किसी भोजन के बाद बार-बार परेशानी होती है, तो उसे नजरअंदाज करने की बजाय एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर है।

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FAQ

  • क्या फूड एलर्जी बचपन से ही होती है?

    फूड एलर्जी किसी भी उम्र में विकसित हो सकती है। कुछ एलर्जी बचपन में शुरू होती हैं, जबकि कुछ लोगों में यह वयस्क होने के बाद भी दिखाई दे सकती हैं।
  • क्या फूड इनटॉलरेंस हमेशा के लिए रहता है?

    यह कारण पर निर्भर करता है। कुछ इनटॉलरेंस लंबे समय तक रह सकते हैं, जबकि कुछ स्थितियों में खानपान और सेहत में सुधार के साथ लक्षण कम हो सकते हैं।
  • क्या फूड एलर्जी का इलाज पूरी तरह संभव है?

    कई मामलों में एलर्जी को कंट्रोल किया जा सकता है। इसका सबसे प्रभावी तरीका ट्रिगर फूड की पहचान करके उससे बचना होता है।

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Akanksha Tiwari

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Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 04, 2026 16:01 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Aug 04, 2026 16:01 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Sharad Malhotra

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