Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Naveen Polavarapu , Gastroenterologist

फूड इनटॉलरेंस का पता कैसे चलता है? गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से जानिए किन टेस्ट्स से होती है इसकी पहचान

फूड इनटॉलरेंस की जांच के लिए डॉक्टर ज्यादातर व्यक्ति में मौजूद लक्षणों और फूड डायरी की मदद लेते हैं। कुछ मामलों में लैक्टोज इनटॉलरेंस जैसे कारणों की पुष्टि के लिए खास टेस्ट भी किए जाते हैं।

क्या खाना खाने के बाद आपका पेट बार-बार फूल जाता है? कभी गैस, पेट दर्द या दस्त की समस्या होती है और आपको समझ नहीं आता कि आखिर इसकी वजह क्या है? अगर किसी खास चीज को खाने के बाद बार-बार ऐसी परेशानी होती है, तो हो सकता है आपका शरीर उस भोजन को ठीक से सहन नहीं कर पा रहा हो। इसे फूड इनटॉलरेंस कहा जाता है।

यशोदा हॉस्पिटल्स, हाईटेक सिटी, हैदराबाद के सीनियर कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, लिवर स्पेशलिस्ट और एडवांस्ड थेराप्यूटिक एंडोस्कोपिस्ट व एंडोसोनोलॉजिस्ट, Dr. Naveen Polavarapu बताते हैं कि फूड इनटॉलरेंस की पहचान करते समय डॉक्टर केवल एक लक्षण या एक टेस्ट पर निर्भर नहीं करते। मरीज की खाने की आदतें, लक्षण कब शुरू होते हैं, कितनी देर रहते हैं और कौन-सा भोजन इन्हें ट्रिगर करता है, जैसी कई बातों को ध्यान में रखा जाता है।

फूड इनटॉलरेंस की जांच कैसे होती है?

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर नवीन बताते हैं कि डॉक्टर सबसे पहले मरीज से उसके लक्षणों के बारे में डिटेल में पूछते हैं। जैसे कि किस भोजन को खाने के कितनी देर बाद परेशानी शुरू होती है, कौन-कौन से लक्षण होते हैं और वे कितनी देर तक रहते हैं। अगर हर बार दूध पीने के बाद गैस, पेट फूलना या दस्त की समस्या होती है, तो डॉक्टर लैक्टोज इनटॉलरेंस की संभावना के बारे में सोच सकते हैं। इसी तरह किसी खास भोजन के बाद बार-बार एक जैसी परेशानी होना भी अहम संकेत हो सकता है। 

1. फूड डायरी

फूड इनटॉलरेंस की पहचान में फूड डायरी यानी भोजन की डायरी बनानी फायदेमंद हो सकती है। इसमें मरीज कुछ समय तक यह लिखता है कि उसने क्या खाया और उसके बाद कोई लक्षण हुए या नहीं। इससे डॉक्टर को भोजन और लक्षणों के बीच संभावित संबंध समझने में मदद मिलती है। हालांकि, केवल डायरी के आधार पर खुद से किसी फूड्स को हमेशा के लिए बंद करना सही नहीं है।

2. एलिमिनेशन डाइट

कुछ मामलों में डॉक्टर Elimination Diet यानी डाइट से कुछ चीजों को हटाने की सलाह दे सकते हैं।

  • इसमें संदिग्ध फूड्स को कुछ समय के लिए डाइट से हटाया जाता है और देखा जाता है कि लक्षणों में सुधार होता है या नहीं।
  • इसके बाद डॉक्टर की सलाह से उस भोजन को दोबारा डाइट में शामिल करके शरीर का रिएक्शन देखा जा सकता है।
  • गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर नवीन कहते हैं कि इस प्रक्रिया को सही तरीके से करना जरूरी है, क्योंकि कई फूड्स को बिना वजह लंबे समय तक छोड़ने से पोषण की कमी हो सकती है।

3. कुछ मामलों में टेस्ट

फूड इनटॉलरेंस के कारण के आधार पर अलग-अलग जांच की जरूरत पड़ सकती है। डॉक्टर नवीन बताते हैं कि लैक्टोज इनटॉलरेंस की जांच के लिए Hydrogen Breath Test किया जा सकता है। इसमें लैक्टोज लेने के बाद सांस में हाइड्रोजन की मात्रा को मापा जाता है। अगर डॉक्टर को किसी दूसरी बीमारी की संभावना लगती है, तो वे उसके अनुसार अन्य चेकअप भी करा सकते हैं। इसलिए हर व्यक्ति में एक जैसा टेस्ट जरूरी नहीं होता।

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How Food Intolerance Diagnosed

साल 2023 में Nutrients जर्नल में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार-

  • लैक्टोज इनटॉलरेंस का पता लगाने के कई तरीके हैं जैसे जेनेटिक टेस्टिंग, एंजाइम टेस्ट और सांस की जांच।
  • हालांकि, छोटी आंत की बायोप्सी द्वारा लैक्टेज एंजाइम की एक्टिविटी को मापना सबसे सटीक तरीका माना जाता है, लेकिन यह प्रक्रिया काफी जटिल है।
  • इसलिए, लैक्टोज सांस की हाइड्रोजन जांच को बेहतर तरीका माना जाता है, जिससे लैक्टोज पचने की क्षमता और उससे जुड़े लक्षणों का आसानी से देखा जा सकता है।

कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर नवीन का कहना है कि अगर किसी खास भोजन के बाद बार-बार पेट दर्द, गैस, दस्त, पेट फूलना या अन्य परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। खासतौर पर अगर लक्षण लगातार बने रहें, वजन कम हो रहा हो, मल में खून आए या खाना खाने के बाद गंभीर रिएक्शन हो, तो जांच जरूरी हो सकती है।

निष्कर्ष

फूड इनटॉलरेंस का पता लगाने के लिए केवल किसी एक टेस्ट पर निर्भर नहीं किया जाता। डॉक्टर आमतौर पर लक्षणों की हिस्ट्री, फूड डायरी, एलिमिनेशन डाइट और जरूरत पड़ने पर खास टेस्ट की मदद से कारण समझने की कोशिश करते हैं। इसलिए बार-बार किसी भोजन के बाद परेशानी होने पर खुद से कई फूड्स को डाइट से हटाने के बजाय डॉक्टर से सही कारण की जांच कराना बेहतर है।

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FAQ

  • क्या फूड इनटॉलरेंस की वजह से वजन बढ़ सकता है?

    फूड इनटॉलरेंस और वजन बढ़ने के बीच सीधा संबंध साबित नहीं होता है। वजन में बदलाव कई कारकों पर निर्भर करता है, इसलिए केवल वजन बढ़ने को इसका संकेत नहीं माना जाना चाहिए।
  • क्या फूड इनटॉलरेंस ठीक हो सकता है?

    कुछ प्रकार के फूड इनटॉलरेंस में लक्षण समय के साथ कम हो सकते हैं, जबकि कुछ स्थितियों में लंबे समय तक खानपान में सावधानी रखनी पड़ सकती है।
  • दूध न पचने के क्या लक्षण हैं?

    दूध न पचने पर व्यक्ति को दूध पीने के 2 घंटे के भीतर पेट में भारीपन, गैस, ऐंठन, सूजन और दस्त जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

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Akanksha Tiwari

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Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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