क्या आपके पेट में जलन या दर्द होने पर आप हर बार इसे सिर्फ एसिडिटी समझकर एंटासिड ले लेते हैं? अगर हां, तो यह आदत कई बार भारी पड़ सकती है। दरअसल, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, जलन और बेचैनी जैसी समस्याएं केवल एसिडिटी की वजह से ही नहीं होतीं, बल्कि पेट के अल्सर का संकेत भी हो सकती हैं। चूंकि दोनों स्थितियों के शुरुआती लक्षण काफी हद तक एक जैसे दिखाई देते हैं, इसलिए लोग अक्सर इनके बीच अंतर नहीं समझ पाते।
आकाश हेल्थकेयर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं थेराप्यूटिक एंडोस्कोपी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और डायरेक्टर, डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, यदि बार-बार पेट दर्द हो रहा है, दर्द रात में जगाने लगे, खाना खाने के बाद भी राहत न मिले या लगातार एंटासिड लेने के बावजूद परेशानी बनी रहे, तो इसे केवल सामान्य एसिडिटी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर सही जांच कराने से अल्सर जैसी गंभीर स्थिति का पता लगाया जा सकता है और समस्याओं से बचा जा सकता है।
अल्सर का दर्द या एसिडिटी?
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डायरेक्टर, डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं कि एसिडिटी तब होती है जब पेट में बनने वाला एसिड जरूरत से ज्यादा हो जाता है या एसिड भोजन नली की ओर वापस आने लगता है। इससे सीने में जलन, खट्टी डकार और गले में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं पेट का अल्सर पेट या छोटी आंत की अंदरूनी परत पर बनने वाला घाव है। यह अक्सर H. pylori इंफेक्शन या लंबे समय तक पेन किलर दवाओं के सेवन के कारण होता है।
National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases की रिपोर्ट के अनुसार, H. pylori इंफेक्शन के फैलने के सटीक तरीकों पर रिसर्च जारी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह जीवाणु मुख्य रूप से दूषित भोजन और पानी के माध्यम से शरीर में पहुंचता है। इसके अलावा, संक्रमित व्यक्ति की लार, उल्टी या मल के संपर्क में आने से भी यह आसानी से फैल सकता है।
इसलिए, H. pylori के जोखिम को कम करने के लिए पर्सनल हाईजीन का ध्यान रखना, साफ पानी पीना, भोजन से पहले हाथ धोना और स्वच्छ खान-पान की आदतें अपनाना बेहद जरूरी है।
| विषय | एसिडिटी | अल्सर |
| क्या होता है? | पेट में बनने वाला एसिड भोजन नली तक पहुंच जाता है, जिससे जलन होती है। | पेट या छोटी आंत की अंदरूनी परत पर घाव बन जाता है, जिसे अल्सर कहते हैं। |
| दर्द कहां होता है? | सीने में जलन और कभी-कभी गले तक जलन महसूस होती है। | अल्सर की समस्या होने पर दर्द पेट के ऊपरी हिस्से में होता है। |
| दर्द का प्रकार | जलन, खट्टी डकार और भारीपन महसूस होता है। | जलन, चुभन या लगातार दर्द हो सकता है। |
| दर्द कब बढ़ता है? | मसालेदार भोजन, अधिक खाना खाने या लेटने के बाद परेशानी बढ़ जाती है। | कई लोगों में खाली पेट दर्द बढ़ता है, जबकि कुछ में खाना खाने के बाद दर्द बढ़ सकता है। |
| राहत कब मिलती है? | एंटासिड दवा लेने पर अक्सर जल्दी आराम मिल जाता है। | केवल एंटासिड से पूरी राहत नहीं मिलती, सही इलाज जरूरी होता है। |
| अन्य लक्षण | खट्टी डकार, मुंह में खट्टा स्वाद, पेट फूलना। | मतली, उल्टी, भूख कम लगना और लंबे समय तक दर्द रहना। |
| कारण | ज्यादा मसालेदार भोजन, चाय-कॉफी, तनाव, धूम्रपान और अनियमित खानपान। | Helicobacter pylori बैक्टीरिया का इंफेक्शन, लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं का सेवन और धूम्रपान। |
| क्या खतरा है? | सामान्यतौर पर गंभीर नहीं होती, लेकिन बार-बार होने पर चेकअप जरूरी है। | इलाज न होने पर खून बहना, छेद होना या गंभीर इंफेक्शन हो सकता है। |
| कब डॉक्टर से मिलें? | यदि एसिडिटी बार-बार हो या दवा से भी राहत न मिले। | तुरंत डॉक्टर से मिलें यदि दर्द के साथ खून की उल्टी, काले रंग का मल, तेजी से वजन कम होना, बार-बार उल्टी, भूख कम लगना, कमजोरी या एनीमिया हो। |
हर पेट दर्द एसिडिटी नहीं होता। यदि दर्द बार-बार हो, लंबे समय तक बना रहे या ऊपर बताए गए गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज न करें। सही समय पर जांच और इलाज कराने से अल्सर जैसी गंभीर समस्या का इलाज किया जा सकता है। हेल्दी खानपान, हेल्दी डेली रूटीन और डॉक्टर की सलाह का पालन करने से एसिडिटी और अल्सर दोनों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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अल्सर और एसिडिटी की पहचान कैसे होती है?
सिर्फ लक्षणों के आधार पर दोनों में अंतर करना हमेशा संभव नहीं होता। डॉक्टर मरीज के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और जरूरत पड़ने पर कुछ जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इनमें शामिल हो सकते हैं-
- अपर जीआई एंडोस्कोपी (Upper GI Endoscopy), जिससे पेट और भोजन नली की अंदरूनी परत को देखा जाता है।
- H. pylori इंफेक्शन की जांच, जो सांस, मल या बायोप्सी के जरिए की जा सकती है।
- जरूरत पड़ने पर अन्य ब्लड या पाचन संबंधी चेकअप।
बचाव के लिए क्या करें?
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डायरेक्टर, डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, कुछ हेल्दी आदतें अपनाकर दोनों समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है-
- समय पर बैलेंस भोजन करें।
- पेन किलर दवाओं का लंबे समय तक बिना सलाह सेवन न करें।
- धूम्रपान और ज्यादा शराब से बचें।
- वजन को कंट्रोल रखें।
- बहुत देर तक खाली पेट न रहें।
- तनाव कम करने के लिए नियमित एक्सरसाइज, योग या मेडिटेशन करें।
- यदि कोई फूड बार-बार परेशानी बढ़ाता है, तो डॉक्टर की सलाह से उसकी मात्रा सीमित करें।
निष्कर्ष
अल्सर और एसिडिटी के कुछ लक्षण एक जैसे हो सकते हैं, लेकिन दोनों की वजह, दर्द का पैटर्न और इलाज अलग होते हैं। एसिडिटी में आमतौर पर सीने में जलन और खट्टी डकार प्रमुख होती है, जबकि अल्सर में पेट के ऊपरी हिस्से में लगातार दर्द, जलन या चुभन महसूस हो सकती है। यदि लक्षण बार-बार हों, लंबे समय तक बने रहें या गंभीर संकेत दिखाई दें, तो स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना सबसे जरूरी है।
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FAQ
क्या तनाव से अल्सर हो जाता है?
तनाव अकेले अल्सर का मुख्य कारण नहीं माना जाता, लेकिन यह अल्सर या एसिडिटी के लक्षणों को बढ़ा सकता है और रिकवरी को प्रभावित कर सकता है।क्या एंटासिड्स पेट के अल्सर में मदद करते हैं?
एंटासिड अस्थायी रूप से जलन कम कर सकते हैं, लेकिन यदि अल्सर का कारण H. pylori इंफेक्शन या अन्य वजह है, तो खास इलाज की जरूरत होती है।
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Aug 03, 2026 18:30 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Sharad Malhotra