क्या खाना खाने के बाद आपको बार-बार पेट फूलने, गैस, पेट दर्द या अचानक टॉयलेट जाने की जरूरत महसूस होती है? अगर हां, तो यह इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) से जुड़ी समस्या हो सकती है। इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम की समस्या में कुछ फूड्स इसके लक्षणों को ट्रिगर कर सकते हैं। आकाश हेल्थकेयर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं थेराप्यूटिक एंडोस्कोपी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और डायरेक्टर, डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम में सभी लोगों के लिए एक जैसी डाइट काम नहीं करती।
किसी एक व्यक्ति के लिए जो फूड समस्या पैदा कर रहा है, जरूरी नहीं कि वही दूसरे व्यक्ति के लिए भी परेशानी का कारण बने। इसलिए अपने शरीर के संकेतों को समझना और ट्रिगर फूड्स की पहचान करना बेहद जरूरी होता है।
कौन से फूड्स आईबीएस की समस्या बढ़ा सकते हैं?
1. हाई-FODMAP फूड्स
डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के कई मरीजों में High-FODMAP फूड्स लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। इनमें ऐसे कार्बोहाइड्रेट होते हैं जो छोटी आंत में पूरी तरह अवशोषित नहीं हो पाते और बड़ी आंत में पहुंचकर गैस व ब्लोटिंग बढ़ा सकते हैं।
- गेहूं से बने कुछ फूड्स
- प्याज और लहसुन
- सेब और नाशपाती
- कुछ प्रकार की दालें और बीन्स
- कुछ कृत्रिम मिठास
हालांकि, इन सभी फूड्स से हर मरीज को समस्या नहीं होती। इन्हें पूरी तरह बंद करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह लेना जरूरी है।
साल 2021 में The American Society for Clinical Investigation में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, FODMAPs ऐसे कार्बोहाइड्रेट हैं जो इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम से पीड़ित लोगों में पेट की समस्याएं बढ़ाते हैं। इस स्टडी से पता चलता है कि हाई FODMAP वाले भोजन के सेवन से पाचन संबंधी लक्षण और ज्यादा बिगड़ जाते हैं।
दूसरी ओर, कम FODMAP वाली डाइट लेने से IBS के मरीजों को बहुत राहत मिलती है। लगभग 60% तक मरीजों को इस तरह की डाइट अपनाने से अपने लक्षणों में काफी सुधार देखने को मिलता है। इसलिए, सही खान-पान की पहचान करके और कम FODMAP वाली डाइट अपनाकर IBS के लक्षणों को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है और पेट की हेल्थ को बेहतर बनाया जा सकता है।

2. तला-भुना और ज्यादा फैट वाला भोजन
डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं कि ज्यादा तेल, घी या मक्खन से बने भोजन कुछ लोगों में इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। ऐसे भोजन के बाद पेट भारी लगना, मरोड़ या दस्त की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए हल्का, बैलेंस और कम तेल वाला भोजन कई मरीजों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।
3. मसालेदार भोजन
डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं, ''बहुत ज्यादा मिर्च-मसाले वाला खाना कुछ लोगों में पेट दर्द, जलन और दस्त जैसी शिकायतों को बढ़ा सकता है। यदि मसालेदार भोजन खाने के बाद बार-बार परेशानी होती है, तो खाने में मसालों की मात्रा को कंट्रोल करना चाहिए।''
4. कैफीन और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स
डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक्स और कोल्ड ड्रिंक्स में मौजूद कैफीन या गैस कुछ इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम मरीजों में आंतों की एक्टिविटी को प्रभावित कर सकती है। इससे ब्लोटिंग, गैस या बार-बार टॉयलेट जाने की समस्या बढ़ सकती है। यदि किसी व्यक्ति में इन ड्रिंक्स से लक्षण बढ़ते हैं, तो इनका सेवन सीमित करना फायदेमंद हो सकता है।
साल 2021 में Frontiers in Nutrition जर्नल में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, कैफीन का ज्यादा सेवन इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के खतरे को बढ़ा सकता है। रिजल्ट से पता चलता है कि सामान्य आबादी, खासकर महिलाओं और ज्यादा वजन वाले लोगों में कैफीन का सेवन इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम की संभावना से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
इसके अलावा, ज्यादा वजन या मोटापे से ग्रस्त लोगों में कैफीन की वजह से इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के लक्षण और भी गंभीर हो जाते हैं। यदि आप इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम से पीड़ित हैं या आपका वजन ज्यादा है, तो कैफीन और कॉफी की मात्रा सीमित करने से पेट की दिक्कतों और लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है।
5. क्रूसिफेरस सब्जियां
डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं कि कुछ लोगों में ब्रोकली, फूलगोभी, पत्तागोभी जैसी सब्जियों को खाने के बाद इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो इन सब्जियों से परहेज करना बेहतर रहेगा।
डॉक्टर की सलाह
डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, IBS का इलाज केवल दवाओं पर निर्भर नहीं करता। हर मरीज के ट्रिगर अलग होते हैं, इसलिए फूड डायरी बनाना फायदेमंद हो सकता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि कौन-से फूड्स खाने के बाद लक्षण बढ़ते हैं। बिना एक्सपर्ट की सलाह के बहुत ज्यादा फूड्स को डाइट से हटाने से पोषण संबंधी कमी हो सकती है। इसलिए डाइट में बदलाव हमेशा डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह के साथ ही करना चाहिए।
- IBS के मरीज छोटे-छोटे अंतराल में भोजन करें
- एक साथ बहुत ज्यादा खाना खाने से बचें।
- तनाव कम करने की कोशिश करें।
- फिजिकली एक्टिव रहें।
- अपने ट्रिगर फूड्स की पहचान करें और उन्हें सीमित करें।
निष्कर्ष
इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम में कुछ फूड्स पेट दर्द, गैस, ब्लोटिंग और दस्त जैसे लक्षणों को बढ़ा सकते हैं, लेकिन हर व्यक्ति के ट्रिगर अलग होते हैं। इसलिए बिना सोचे-समझे किसी भी फूड को पूरी तरह छोड़ने के बजाय अपने लक्षणों का रिकॉर्ड रखें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार डाइट में बदलाव करें। सही खानपान और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
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FAQ
क्या IBS हमेशा के लिए ठीक हो सकता है?
IBS एक क्रॉनिक स्थिति हो सकती है, लेकिन सही डाइट, लाइफस्टाइल में बदलाव और डॉक्टर की सलाह से इसके लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।क्या तनाव IBS के लक्षणों को बढ़ा सकता है?
तनाव और चिंता आंतों की एक्टिविटी को प्रभावित कर सकते हैं और कई लोगों में IBS के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं।
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Jul 31, 2026 21:32 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Sharad Malhotra