Mon Sep 21, 2026 | 08:19 PM IST

Medically Reviewed by Dr Sharad Malhotra , Senior Consultant & Director – Gastroenterology, Hepatology & Therapeutic Endoscopy

बार-बार कब्ज को न समझें सामान्य, कारण हो सकती हैं ये 5 बीमारियां

कहीं आपकी कब्ज के पीछे थायराइड या डायबिटीज तो नहीं? कई मामलों में कब्ज होने का कारण बीमारियां हो सकती है और ये डाइजेशन सिस्टम को प्रभावित करती हैं। डॉ. शरद मल्होत्रा से जानें कैसे कब्ज को मैनेज किया जा सकता है।
बार-बार कब्ज को न समझें सामान्य, कारण हो सकती हैं ये 5 बीमारियांबार-बार कब्ज को न समझें सामान्य, कारण हो सकती हैं ये 5 बीमारियां

कब्ज की समस्या को लोग गंभीर नहीं होते, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह परेशानी कुछ दिन की है और फिर ठीक हो जाएगी। कई बार लोग तुरंत राहत पाने के लिए ज्यादा पानी पीते हैं, ईसबगोल लेने लगते हैं या घरेलू नुस्खे अपनाने लगते हैं। अगर किसी को लगातार कई हफ्तों से कब्ज की समस्या हो रही है और इसके साथ दूसरे भी कई लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो कब्ज को हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई बार कब्ज होने का कारण बीमारियां भी हो सकती है। इसलिए हमने Dr. Sharad Malhotra, Senior Consultant & Director, Gastroenterology, Hepatology & Therapeutic Endoscopy, Aakash Healthcare, Delhi से बात की।

उन्होंने बताया कि कब्ज की समस्या सिर्फ कम पानी पीने या डाइट की वजह से नहीं होती, बल्कि कई बार इसका कारण गंभीर बीमारियां भी हो सकती है। इसलिए कब्ज होने पर कुछ बीमारियों की जांच कराना जरूरी होता है।

बार-बार कब्ज होने कारण ये 5 बीमारियां

Dr. Sharad Malhotra ने कहा, “वैसे तो टॉयलेट जाने की आदत हर किसी की अलग होती है। कुछ लोग रोजाना टॉयलेट जाते हैं, तो कुछ लोग एक दिन छोड़कर जाते हैं। अगर कोई हफ्ते में तीन बार से कम मल त्याग करता है, मल बहुत सख्त आता है, मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाना पड़ता है या पेट पूरी तरह साफ न होने का एहसास हो, तो इसे कब्ज माना जाता है। अगर कब्ज की समस्या बार-बार हो रही हो, तो मरीज को इन बीमारियों का चेकअप कराने के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।”

1. हाइपोथायरॉयडिज्म

Dr. Sharad Malhotra ने बताया कि थायराइड ग्लैंड शरीर के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करने में मदद करती है। जब थायराइड हार्मोन पर्याप्त मात्रा में नहीं बना पाता, तो शरीर की कई प्रक्रियाएं धीमी पड़ जाती हैं। हाइपोथायरॉयडिज्म का असर डाइजेशन सिस्टम पर भी पड़ता है और आंतों की गति कम होने लगती है। इस कारण मरीज को कब्ज की समस्या हो सकती है।

अगर कब्ज के साथ ये समस्याएं महसूस हो, तो थायराइड जरूर चेक कराना चाहिए। कई बार थायराइड मैनेज करने से कब्ज की समस्या काफी हद तक ठीक हो जाती है।

  • लगातार थकान महसूस होना
  • वजन बढ़ना
  • ठंड ज्यादा लगना,
  • ड्राई स्किन
  • बाल झड़ना

2. डायबिटीज

Dr. Sharad Malhotra कहते हैं, “डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर की बीमारी नहीं है, बल्कि इस वजह से पाचन तंत्र को नियंत्रित करने वाली नसों पर भी असर पड़ सकता है। जब डाइजेशन सिस्टम प्रभावित होता है, तो आंतों का फंक्शन भी धीमा पड़ सकता है। इससे कब्ज, पेट फूलना और गैस जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। अगर कब्ज के साथ बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, धुंधला दिखाई देना या बिना वजह वजन कम होने लगे, तो ब्लड शुगर की जांच करवाना जरूरी है।”

3. इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS)

Dr. Sharad Malhotra के अनुसार, जिन लोगों को इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम यानी IBS की समस्या होती है। इस कंडीशन से पीड़ित मरीजों में कब्ज की समस्या देखी जा सकती है या फिर कुछ लोगों को दस्त और कब्ज दोनों की समस्या बारी-बारी से होती रहती है। अगर किसी को कब्ज के साथ पेट में दर्द, गैस, पेट फूलना और शौच के बाद भी पेट पूरी तरह साफ न होने का एहसास बना रहे, तो यह IBS का संकेत हो सकता है। अगर IBS की समस्या है, तो इसे सही डाइट और डॉक्टर की सलाह से काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है।

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4. बड़ी आंत का कैंसर

Dr. Sharad Malhotra कहते हैं, “हालांकि, हर कब्ज को कैंसर से जोड़कर नहीं देखा जा सकता, लेकिन अगर किसी की उम्र 45 साल से ज्यादा है, परिवार में कोलोरेक्टल कैंसर की हिस्ट्री हो और इसके साथ लंबे समय तक कब्ज के साथ ये लक्षण भी दिखें, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

  • मल में खून आना
  • बिना किसी कारण तेजी से वजन घटना
  • लगातार पेट दर्द रहना
  • मल का आकार पहले की तुलना में पतला होना
  • बार-बार पेट साफ न होने का एहसास
  • एनीमिया

5. पार्किंसन रोग और न्यूरोलॉजिकल बीमारियां

Dr. Sharad Malhotra के मुताबिक, “डाइजेशन सिस्टम सिर्फ खाना पचाने के लिए नहीं होता, बल्कि यह दिमाग से भी जुड़ा होता है। अगर दिमाग से जुड़ी कोई बीमारी हो जाए, तो उसका असर आंतों की स्पीड पर भी पड़ सकता है। पार्किंसन रोग, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, रीढ़ की हड्डी की कुछ बीमारियां और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं में कब्ज शुरुआती लक्षणों में से एक हो सकती है। कई मरीजों में हाथ कांपने या चलने में दिक्कत शुरू होने से पहले ही लंबे समय तक कब्ज की शिकायत रहती है।”

Cleveland Clinic के मुताबिक, बार-बार कब्ज होने का कारण हाइपोथायरायडिज्म, डायबिटीज, इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) , आंतों में रुकावट और कोलोरेक्टल कैंसर होने का रिस्क हो सकता है।

StatPearls Publishing में भी यही बताया गया है कि कब्ज होने का कारण IBS, हाइपोथायरायडिज्म, पार्किंसंस रोग, मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं और कोलोरेक्टल कैंसर हो सकता है।
रिसर्च क्या कहती है?

कब्ज से बचाव के उपाय

Dr. Sharad Malhotra ने लोगों को सलाह दी है कि कब्ज की समस्या को आसान आदतें अपनाकर काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है।

  • रोजाना 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं।
  • भोजन में हरी सब्जियां, फल, सलाद, दालें और साबुत अनाज शामिल करें।
  • फाइबर युक्त डाइट लें।
  • रोज कम से कम 30 मिनट टहलें या एक्सरसाइज करें।
  • अगर टॉयलेट जाने की इच्छा हो, तो उसे कभी न रोकें।
  • देर रात तक जागने से बचें।
  • स्ट्रेस कम करने के लिए योग, प्राणायाम या मेडिटेशन करें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक कब्ज की दवाएं न लें।

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निष्कर्ष
Dr. Sharad Malhotra कहते हैं कि कभी-कभार कब्ज होना सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर यह बार-बार होने लगे या हफ्तों तक बनी रहे, तो इसे डाइट या लाइफस्टाइल की समस्या न मानें, क्योंकि यह शरीर में हो रही गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकता है। इसलिए कब्ज के साथ अगर अन्य लक्षण भी दिखे, तो घरेलू नुस्खे अपनाने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।

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FAQ

  • क्या लंबे समय तक पेट साफ करने वाली दवाइयां लेना सुरक्षित है?

    डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक किसी भी तरह की दवाएं न लें। इससे आंतों की अपनी प्राकृतिक सिकुड़ने की क्षमता खत्म होने लगती है और दवा के बिना पेट साफ होना पूरी तरह बंद हो जाता है।
  • कब्ज के मरीजों को किस पोजीशन में मल त्याग करना चाहिए?

    वेस्टर्न टॉयलेट इस्तेमाल करते समय पैरों के नीचे 6-8 इंच का छोटा स्टूल रखकर बैठना सबसे बेहतर माना जाता है। इससे शरीर स्क्वैटिंग पोजीशन में आ जाता है, जिससे मलाशय का कोण सीधा हो जाता है और मल बिना जोर लगाए आसानी से बाहर निकल जाता है।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 06, 2026 19:25 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Sharad Malhotra

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