जिन लोगों को कब्ज की समस्या होती है या मल त्याग में दिक्कत होती है, तो वे टॉयलेट में बैठकर जरूरत से ज्यादा ही जोर लगाने लगते हैं, ताकि पेट साफ हो सके। कभी-कभार ऐसा करने से कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन जो लोग रोजाना यही करते हैं, उनके लिए नुकसान हो सकता है। पॉटी करते समय बहुत ज्यादा प्रेशर लगाने से न सिर्फ डाइजेशन बल्कि एनस, पेट, पेल्विक फ्लोर और हार्ट पर भी इसका असर पड़ सकता है। इस बारे में हमने Dr. Vineet Malhotra, Head of Urology at VNA Hospital, Delhi से बात की।
टॉयलेट में जोर लगाने पर शरीर में पांच नुकसान होना
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाने पर शरीर को कई नुकसान हो सकते हैं। बार-बार जोर लगाने का कारण कब्ज हो सकता है, इसलिए ऐसे लोगों को डॉक्टर से मिलकर कब्ज का इलाज कराना चाहिए। अगर रोजाना जोर लगाकर स्टूल (मल त्याग) करते हैं, तो लोगों को ये नुकसान हो सकते हैं।”
बवासीर का खतरा
Dr. Vineet Malhotra के मुताबिक, “अगर लोग रोजाना जोर लगाकर टॉयलेट करते हैं, तो उन्हें बवासीर यानी पाइल्स होने का रिस्क बढ़ सकता है। रोजाना प्रेशर लगाने से एनस और मलाशय के आसपास की नसों पर लगातार दबाव पड़ता है, तो उनमें सूजन आ सकती है। इससे दर्द, खुजली, जलन और मल के साथ खून आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जिन लोगों को लंबे समय से कब्ज की समस्या होती है, उन्हें पाइल्स होने का रिस्क बढ़ सकता है।”

यह भी पढ़ें- क्या आप भी करते हैं टॉयलेट में ये गलतियां? संभल जाएं, वरना घेर सकते हैं ये 5 जिद्दी स्किन इंफेक्शन
एनल फिशर की समस्या होना
Dr. Vineet Malhotra ने बताया कि लगातार जोर लगाकर टॉयलेट करने से कठोर मल बाहर आता है, जो एनस की नसों और स्किन को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे एनस के आसपास दरार आ सकती है। इसे एनल फिशर कहते हैं। इसमें मरीज को पॉटी करते समय तेज दर्द, जलन और ब्लीडिंग भी हो सकती है। कई बार यह समस्या इतनी तकलीफदेह हो जाती है कि व्यक्ति टॉयलेट जाने से भी घबराने लगता है।
हर्निया का रिस्क
Dr. Vineet Malhotra ने कहा, “बार-बार जोर लगाने से पेट के अंदर प्रेशर बढ़ जाता है और प्रेशर पेट की कमजोर मांसपेशियों पर दबाव डालकर हर्निया का रिस्क बढ़ा सकता है। हर्निया में शरीर का कोई अंदर का अंग या टिश्यू कमजोर मांसपेशियों के हिस्से से बाहर की ओर उभरने लगता है। कुछ मामलों में इसके इलाज के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।”
पेल्विक फ्लोर का कमजोर होना
Dr. Vineet Malhotra के अनुसार, पेल्विक फ्लोर मूत्राशय, आंतों और रिप्रोडक्टिव अंगों को सहारा देने का काम करता है। अगर लगातार प्रेशर बनाया जाए, तो इन सभी अंगों की मांसपेशियों पर भार पड़ने लग सकता है। अगर लगातार काफी समय से जोर लगाकर टॉयलेट किया जाए, तो पेशाब को कंट्रोल करने की क्षमता, यूरिन लीकेज, महिलाओं में पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स और पेल्विक से जुड़ी समस्याएं हो सकती है।
हार्ट और ब्लड प्रेशर पर असर
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “टॉयलेट के दौरान कुछ लोग सांस रोककर जोर लगाते हैं। इस दौरान कुछ समय के लिए ब्लड प्रेशर बढ़ना और हार्ट बीट में बदलाव हो सकता है। जो लोग हेल्दी है, उनपर तो यह असर कुछ समय के लिए हो सकता है, लेकिन हार्ट से जुड़ी बीमारियों वाले मरीजों या बढ़ती उम्र के लोगों के लिए रिस्क हो सकता है।”
यह भी पढ़ें- क्या ज्यादा बैठने से बवासीर हो सकती है? डॉक्टर से जानें
निष्कर्ष
Dr. Vineet Malhotra ने लोगों को सलाह दी है कि रोजाना जोर लगाने के बजाय कब्ज का इलाज कराना चाहिए। इसके अलावा, प्रचुर मात्रा में पानी पिएं, फाइबर वाली डाइट लें, रेगुलर एक्सरसाइज और जब भी स्टूल आए, तो उसे रोकने के बजाय कर लें। इसके अलावा, लोगों को टॉयलेट में लंबे समय तक नहीं बैठना चाहिए। अगर पॉटी के साथ खून आए, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
FAQ
क्या ज्यादा जोर लगाने से मलाशय बाहर आ सकता है?
इस गंभीर स्थिति को रेक्टल प्रोलैप्स कहा जाता है। लगातार और सालों तक टॉयलेट में अत्यधिक जोर लगाने के कारण मलाशय को सहारा देने वाली मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे बड़ी आंत का आखिरी हिस्सा गुदा मार्ग से बाहर खिसक जाता है।कमोड पर बैठने का कौन सा तरीका जोर लगाने की मजबूरी को कम करता है?
वेस्टर्न टॉयलेट का उपयोग करते समय पैरों के नीचे एक छोटा स्टूल रखें। इससे पैर ऊपर उठ जाते हैं और शरीर 35 डिग्री के कोण (Squatting Position) में आ जाता है। यह पोजीशन मलाशय की नसों को सीधा कर देती है, जिससे बिना जोर लगाए पेट आसानी से साफ हो जाता है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jun 16, 2026 17:15 IST
Modified By : Aneesh Rawat Jun 16, 2026 17:15 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Vineet Malhotra