Sat Oct 17, 2026 | 08:56 PM IST

Medically Reviewed by Archana Jain , Nutritionist

बवासीर में सुबह क्या खाना चाहिए ताकि कब्ज न बढ़े? डाइटीशियन से जानें

बवासीर में कब्ज और जोर लगाकर मल त्याग करने से परेशानी बढ़ सकती है। यहां डॉक्टर से जानिए, सुबह के नाश्ते में कौन-से फाइबर से भरपूर विकल्प शामिल करने से कब्ज से बचने में मदद मिल सकती है।
बवासीर में सुबह क्या खाना चाहिए ताकि कब्ज न बढ़े? डाइटीशियन से जानेंबवासीर में सुबह क्या खाना चाहिए ताकि कब्ज न बढ़े? डाइटीशियन से जानें

बवासीर यानी पाइल्स की समस्या में सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है, जब इसके साथ कब्ज की समस्या भी हो जाए। कठोर मल, मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाना और लंबे समय तक टॉयलेट में बैठे रहना बवासीर की तकलीफ को बढ़ा सकता है। ऐसे में दिन की शुरुआत से ही खान-पान पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है। जयपुर स्थित Angelcare-A Nutrition and Wellness Center की निदेशक, डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, बवासीर में डाइट का मकसद सिर्फ पेट भरना नहीं, बल्कि मल को नरम रखने और कब्ज से बचने में मदद करना है। इसके लिए फाइबर युक्त फूड्स के साथ पर्याप्त पानी लेना भी जरूरी होता है।

बवासीर में सुबह क्या खाना चाहिए ताकि कब्ज न बढ़े?

डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, बवासीर से परेशान लोगों को अपने नाश्ते में फाइबर युक्त फूड्स को प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे मल को नरम रखने और कब्ज से बचने में मदद मिल सकती है लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि फाइबर बढ़ाते समय पानी की पर्याप्त मात्रा लेना भी जरूरी है।

  • बवासीर में ऐसा नाश्ता बेहतर माना जाता है जिसमें फाइबर, पोषक तत्व और पर्याप्त लिक्विड शामिल हों। सुबह की शुरुआत पानी से करना फायदेमंद हो सकता है। इसके बाद ऐसा नाश्ता लें जो आसानी से पच सके और लंबे समय तक पेट को भरा रखे।
  • ओट्स, दलिया, मल्टीग्रेन या साबुत अनाज से बनी चीजें अच्छे विकल्प हो सकते हैं। इनमें मौजूद फाइबर मल त्याग को आसान बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति की पाचन क्षमता अलग होती है, इसलिए डाइट में फाइबर धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर है।
  • ओट्स और दलिया में फाइबर होता है, जो कब्ज की समस्या को मैनेज करने में मदद कर सकता है। इन्हें दूध या दही के साथ लेने के बजाय व्यक्ति अपनी सहनशीलता के अनुसार फल और अन्य चीजों के साथ भी लिया जा सकता है।
  • नाश्ते में बहुत ज्यादा मीठा या घी-तेल से बना खाना खाने से बचना बेहतर है। संतुलित मात्रा में फल और सीड्स शामिल करने से नाश्ते की पौष्टिकता बढ़ सकती है।
  • पपीता, नाशपाती, सेब और अमरूद जैसे फल बवासीर में डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। फल खाते समय उनकी मात्रा और पाचन शक्ति का ध्यान रखना जरूरी है।
  • अगर किसी फल से गैस, पेट फूलना या दस्त की समस्या होती है तो उसे जबरदस्ती खाने की जरूरत नहीं है। फलों के साथ पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है।

बवासीर में इसबगोल ले सकते हैं?

डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन बताती हैं कि कब्ज की समस्या में इसबगोल की भूसी कुछ लोगों के लिए फाइबर का अच्छा सोर्स हो सकती है लेकिन इसे लेते समय पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। अगर किसी व्यक्ति को निगलने में परेशानी, आंतों में रुकावट या कोई अन्य गंभीर पाचन संबंधी समस्या है, तो बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए। डाइट में अचानक बहुत ज्यादा फाइबर शामिल करने के बजाय धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाना बेहतर होता है।

Breakfast In Piles To Prevent ConstipationBreakfast In Piles To Prevent Constipation

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बवासीर में सुबह किन चीजों से बचें?

डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन सलाह देती हैं कि नाश्ते में बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार और कम फाइबर वाला भोजन लेने से बचना चाहिए। मैदा से बनी चीजें, ज्यादा प्रोसेस्ड फूड और बहुत ज्यादा मीठे फूड्स रोजाना नाश्ते में नहीं खाना चाहिए। इसके अलावा सिर्फ चाय-बिस्किट को नाश्ता मानने की आदत भी बदलनी चाहिए। ऐसा नाश्ता चुनें जिसमें साबुत अनाज, फल या अन्य फाइबर युक्त फूड्स शामिल हों।

National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, अगर आपको बवासीर की समस्या है और इसका कारण पुराना कब्ज है, तो आपको फाइबर रहित या कम फाइबर वाले फूड्स से परहेज करना चाहिए।

  • चिप्स, फास्ट फूड, आइसक्रीम, मांस और फ्रोजन या डिब्बाबंद फूड्स से दूर रहें।
  • इसके अलावा, हॉट डॉग और माइक्रोवेव में गर्म किए जाने वाले रेडीमेड या प्रोसेस्ड फूड का सेवन भी कम से कम करें।
  • ऐसे फूड्स से कब्ज की समस्या बढ़ सकती है, जिससे बवासीर के लक्षण भी गंभीर हो सकते हैं।
  • इसके बजाय अपने खान-पान में ज्यादा से ज्यादा फाइबर युक्त चीजें शामिल करें।

डाइटीशियन की सलाह

बवासीर में कब्ज से बचने के लिए सिर्फ फाइबर बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, शरीर को पर्याप्त लिक्विड मिलना भी जरूरी है। फाइबर पानी को अवशोषित करके मल को नरम बनाने में मदद करता है, इसलिए फाइबर बढ़ाते समय पानी की मात्रा भी पर्याप्त रखनी चाहिए। हालांकि, अगर किसी व्यक्ति को किडनी, हार्ट या अन्य बीमारी के कारण पानी सीमित करने की सलाह दी गई है, तो लिक्विड की मात्रा डॉक्टर के अनुसार ही रखें।

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निष्कर्ष

बवासीर में सुबह का नाश्ता फाइबर से भरपूर और बैलेंस रखना कब्ज को मैनेज करने में मदद कर सकता है। ओट्स, दलिया, साबुत अनाज और फाइबर युक्त फल नाश्ते के अच्छे विकल्प हो सकते हैं। डाइटीशियन अर्चना जैन के अनुसार, फाइबर के साथ पर्याप्त पानी लेना और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड, तला-भुना व कम फाइबर वाला भोजन सीमित करना जरूरी है। अगर बवासीर में लगातार खून आ रहा है, तेज दर्द है या कब्ज लंबे समय से बना हुआ है, तो केवल डाइट पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर सही इलाज कराना चाहिए।

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FAQ

  • क्या बवासीर में ड्राई फ्रूट्स खा सकते हैं?

    कुछ ड्राई फ्रूट्स में फाइबर होता है और इन्हें सीमित मात्रा में डाइट में शामिल किया जा सकता है लेकिन ज्यादा मात्रा में खाने से कैलोरी बढ़ सकती है और कुछ लोगों को पेट फूलने की समस्या हो सकती है।
  • क्या बवासीर में केला खाना चाहिए?

    केला फाइबर और अन्य पोषक तत्वों का सोर्स है, लेकिन इसका असर व्यक्ति की पाचन क्षमता पर निर्भर कर सकता है। कब्ज की समस्या होने पर अपनी डाइट के अनुसार इसका सेवन करें।
  • क्या बवासीर में ब्रेड खाना ठीक है?

    बहुत ज्यादा रिफाइंड मैदा वाली ब्रेड में फाइबर कम हो सकता है। अगर ब्रेड लेनी हो तो साबुत अनाज विकल्प को प्राथमिकता देना बेहतर हो सकता है।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 08, 2026 18:34 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Archana Jain