आजकल बच्चे पिज्जा-बर्गर जैसे जंक फूड को खाने के बाद कब्ज, अपच जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं। इससे बचने के लिए बच्चों की डाइट में फाइबर को शामिल कर सकते हैं। फाइबर का सेवन करने से कब्ज और पाचन समस्याएं, तो दूर होती ही हैं साथ ही पेट भी लंंबे समय तक भरा रहता है। पेट के लिए फाइबर फायदेमंंद है, लेकिन अचानक से इसकी मात्रा को बढ़ाना ठीक नहीं है। इससे कब्ज, अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों की डाइट में फाइबर की मात्रा को बढ़ाने का सही तरीका जानने के लिए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।
मुलायम चीजों से शुरू करें
- बच्चों की डाइट में फाइबर बढ़ाने जा रहे हैं, तो ध्यान रखें धीरे-धीरे मात्रा को बढ़ाएं।
- पांच साल से कम उम्र में बच्चे को मुलायम फल खाने के लिए दें जैसे मैश किया हुआ सेब या केला।
- पका हुआ गाजर, पंपकिन और स्वीट पोटैटो भी दे सकते हैंं।
- ओटमील को दूध में भिगाकर भी दे सकते हैं।
- बच्चों को ज्यादा कच्चा सलाद देने से बचें।
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फाइबर को पानी के साथ दें
- फाइबर को पानी के साथ दें। अगर बच्चे को केवल फाइबर देंगे और पर्याप्त पानी नहीं देंगे, तो कब्ज की समस्या हो सकती है।
- दिनभर में बच्चे को थोड़ा-थोड़ा करके पानी दें।
फाइबर को अन्य चीजों के साथ मिक्स करके दें

- बच्चोंं को केवल फाइबर देंगे, तो पाचन समस्याएं हो सकती हैं इसलिए फाइबर को अन्य पोषक तत्वों के साथ मिक्स करके दें।
- जैसे दही के साथ फल दे सकते हैं या पैनकेक के साथ केला या सेब मिक्स करके खिलाएं।
- गर्मियों में खीरे और टमाटर जैसी ताजी सब्जियों को सैंडविच या पराठे में मिक्स करके बच्चोंं को खिला सकते हैं।
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फाइबर को तय रूटीन पर बच्चोंं को खिलाएं
- फाइबर को खिलाने का समय फिक्स करेंगे, तो पाचन बेहतर रहेगा और फाइबर खाने की आदत बनेगी।
- फाइबर की मात्रा बढ़ाने पर शुरू में हल्की गैस हो सकती है।
- अगर बच्चे को ब्लोटिंग, पेट दर्द जैसे लक्षण महसूस हों, तो फाइबर की मात्रा घटा दें या कुछ समय के लिए बंद कर दें।
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एक साथ ज्यादा फाइबर न दें और वैरायटी मिक्स करें
- बच्चों को अचानक से ज्यादा फाइबर न दें। फाइबर पाचन के लिए फायदेमंद होता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा फाइबर पेट दर्द या अन्य पाचन समस्या का कारण बन सकता है। इसलिए धीरे-धीरे करके उम्र के मुताबिक, फाइबर की मात्रा को बढ़ाना चाहिए।
- इसके साथ ही फाइबर की मात्रा को बढ़ाने का यह मतलब नहीं है कि केवल फल-सब्जी या कोई एक प्रकार का फाइबर देना है। बच्चों को फाइबर के अलग-अलग प्रकार दें ताकि पेट सभी प्रकार के फाइबर को डाइजेस्ट करने का आदी हो।
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बच्चों को किस उम्र में कितना फाइबर दें?
- 11 साल और उससे ज्यादा उम्र- करीब 25 से 30 ग्राम फाइबर
- 5 से 11 साल- करीब 20 ग्राम फाइबर
- 2 से 5 साल- करीब 15 ग्राम फाइबर
- 6 से 12 महीने- करीब 5 ग्राम फाइबर
निष्कर्ष:
बच्चों की उम्र के मुताबिक धीरे-धीरे उनकी डाइट में फाइबर की मात्रा बढ़ा सकते हैं। अचानक से मात्रा ज्यादा होने पर पाचन की समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों को तय समय पर अलग-अलग वैरायटी का फाइबर दें। साथ ही ब्लोटिंंग या पेट दर्द जैसे लक्षण नजर आने पर फाइबर की मात्रा घटा दें।
FAQ
फाइबर का सेवन कब नहीं करना चाहिए?
डायरिया, पहले से गैस या ब्लोटिंग होने पर, पेट में इंफेक्शन जैसी स्थितियों में फाइबर का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।शरीर में फाइबर की कमी से क्या होता है?
फाइबर की कमी से कब्ज, आंतों की खराब सेहत, ब्लोटिंग, अपच, असंतुलित शुगर लेवल जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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Current Version
Apr 30, 2026 15:05 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Apr 30, 2026 15:05 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Neha Mohan Sinha