आज की लाइफस्टाइल में लोग प्रोसेस्ड फूड्स, झटपट बन जाने वाले इंस्टेंट फूड्स वगैरह का ज्यादा सेवन करने लगे हैं। इसका नतीजा आप देख ही रहे हैं, तरह-तरह की बीमारियां। किसी को डायबिटीज, तो किसी को मोटापा। बचपन में फाइबर रिच फूड्स के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, मैं भी फाइबर ज्यादा नहीं लेती थी पर मेरी मां हमेशा मुझे सलाद और फल खिलाती रहती थीं ताकि शरीर को फाइबर मिले, मेडिकल फील्ड में होने के कारण मां को न्यूट्रिशन की जानकारी है और वो मुझे हमेशा फाइबर का सेवन बढ़ाने पर जोर देती हैं। पुराने समय में लोग फल और सब्जियों का ज्यादा सेवन करते थे। इनमें फाइबर होता है। फाइबर डाइट लेने से लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है। साबुत अनाज, दाल, बीजों में भी फाइबर पाया जाता है। जब शरीर में फाइबर कम हो जाता है, तो सेहत पर बुरा असर पड़ता है। फाइबर आंतों में गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है और शरीर के अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। इस लेख में जानेंगे लो फाइबर डाइट लेने से शरीर के कौन से फंक्शन प्रभावित हो सकते हैं?
1. ब्लड शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव हो सकता है- It Disturbs Sugar Level
अगर आप लो फाइबर डाइट लेंगे, तो खाने के बाद शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है। अगर बार-बार ऐसा होगा, तो इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ेगा। Medline Plus के मुताबिक, डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए फाइबर को शामिल करना जरूरी है। होल ग्रेन्स, फाइबर का एक फॉर्म है, इसे डाइट का हिस्सा बनाएं। फाइबर का सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ने से रोका जा सकता है।
यह भी पढ़ें- एक हफ्ते तक फाइबर न खाएं तो क्या होगा? डायटिशियन से जानें सेहत पर इसका असर
2. बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ना- Low Fiber Diet Increase Bad Cholesterol
फाइबर की कमी से बैड कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ सकता है और लंबे टाइम तक अगर कोलेस्ट्रॉल का लेवल ज्यादा होगा, तो ह्रदय रोगों का खतरा बढ़ेगा। फाइबर आंत में बाइल एसिड (पित्त अम्ल) से मिलकर उसे बाहर निकालने में मदद करता है। इससे शरीर को नया बाइल एसिड बनाने के लिए कोलेस्ट्रॉल का इस्तेमाल करना पड़ता है जिससे बैड कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होता है। Indian Council Of Medical Research & National Institute Of Nutrition के मुताबिक, ताजे फल और सब्जियों से फाइबर मिलता है। फाइबर से बैड कोलेस्ट्रॉल के शरीर में अब्जॉर्ब होने की प्रक्रिया कम होती है जिससे कोरोनरी हार्ट डिजीज, डायबिटीज और मोटापे को कम करने में मदद मिलती है।
यह भी पढ़ें- सब्जियां नहीं पसंद तो फाइबर के लिए खा सकते हैं ये 10 फूड्स
3. गट माइक्रोबायोम का असंतुलन- It Causes Microbiome Imbalance
आंत में मौजूद गुड बैक्टीरिया को गट माइक्रोबायोम कहा जाता है। फाइबर इन बैक्टीरिया के लिए भोजन की तरह काम करता है जिससे इनकी मात्रा बढ़ती है। Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow ने बताया कि जब हम लो फाइबर डाइट लेते हैं, तो गुड बैक्टीरिया की संख्या कम हो जाती है और बैड बैक्टीरिया हावी हो जाते हैं। इससे माइक्रोबायोम का असंतुलन हो जाता है जिससे कमजोर इम्यूनिटी और मेटाबॉलिक समस्याएं हो सकती हैं।
यह भी पढ़ें- ब्रेकफास्ट में फाइबर की कमी से शरीर में बढ़ सकती हैं ये 5 समस्याएं, रहें सावधान
4. पाचन समस्याएं- Digestive Issues

अगर लो फाइबर डाइट लेंगे, तो स्टूल सख्त हो सकता है और मल त्याग में मुश्किल होगी। लंबे समय तक रहने वाले कब्ज से आंतों की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। फाइबर की कमी से कब्ज, गैस, पेट फूलना, अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं। Medline Plus के मुताबिक, डाइटरी फाइबर की मदद से कब्ज की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है। इससे गैस, ब्लोटिंग और क्रैम्प्स की समस्या दूर होती है। होल ग्रेन्स, नट्स एवं सीड्स, फ्रूट्स और सब्जियां, डाइटरी फाइबर का अच्छा स्रोत हैं।
यह भी पढ़ें- फाइबर या प्रोटीन: डिनर के लिए क्या है ज्यादा जरूरी? एक्सपर्ट ने खुद बताई सच्चाई
5. वजन और मेटाबॉलिज्म पर असर- It Affects Weight And Metabolism
फाइबर रिच फूड्स का सेवन करने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और ओवरईटिंग की संभावना कम होती है। अगर आप लो फाइबर डाइट लेंगे, तो उसमें पोषण कम होगा जिससे वेट गेन और स्लो मेटाबॉलिज्म का खतरा रहेगा। वेट गेन के कारण हाई बीपी, डायबिटीज और ह्रदय रोग जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
निष्कर्ष:
लो फाइबर डाइट शरीर के मेटाबॉलिक रेट, वजन, डाइजेस्टिव सिस्टम, गट माइक्रोबायोम, कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल को प्रभावित कर सकती है। इसलिए डॉक्टर की सलाह पर पर्याप्त मात्रा में फाइबर को डाइट में शामिल करें।
उम्मीद करते हैं कि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। इस लेख को ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर करें। सेहत से संबंधित अन्य जानकारी के लिए ओनलीमायहेल्थ के साथ बने रहें।
FAQ
शरीर में फाइबर की कमी से क्या होता है?
शरीर में फाइबर की कमी से कब्ज, पेट में गैस, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं। फाइबर की कमी से शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है और कोलेस्ट्रॉल लेवल प्रभावित होता है।फाइबर रिच फूड्स कौन से हैं?
ओट्स, दाल, राजमा, अलसी, चिया सीड्स, हरी सब्जियां, साबुत अनाज फाइबर से भरपूर होते हैं। इसके अलावा सेब, नाशपाती जैसे फल भी फाइबर का अच्छा स्रोत माने जाते हैं।मुझे कैसे पता चलेगा कि फाइबर की कमी है?
बार-बार कब्ज, मल त्याग करने में कठिनाई, पेट भारी लगना, जल्दी भूख लगना या शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव फाइबर की कमी के संकेत हैं।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Mar 03, 2026 15:59 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Mar 03, 2026 15:59 IST
Modified By : Yashaswi MathurMar 03, 2026 15:59 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Smita Singh