Fri Sep 11, 2026 | 07:34 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

लो फाइबर डाइट से शरीर के ये 5 फंक्‍शन हो सकते हैं प्रभाव‍ित, शुगर लेवल से डाइजेशन तक द‍िखता है असर

अक्‍सर हम प्रोटीन या फैट के सेवन पर तो ध्‍यान देते हैं, लेक‍िन फाइबर को नजरअंदाज कर देते हैं। फाइबर डाइजेशन और आंतों की सेहत को बेहतर बनाने में मदद करता है। डाइजेशन, शुगर लेवल कंट्रोल जैसे जरूरी फंक्‍शन में फाइबर अहम भूम‍िका न‍िभाता है। जानते हैं, लो फाइबर डाइट शरीर के क‍िन फंक्‍शन को प्रभाव‍ित कर सकती है?

आज की लाइफस्‍टाइल में लोग प्रोसेस्‍ड फूड्स, झटपट बन जाने वाले इंस्‍टेंट फूड्स वगैरह का ज्‍यादा सेवन करने लगे हैं। इसका नतीजा आप देख ही रहे हैं, तरह-तरह की बीमार‍ियां। क‍िसी को डायब‍िटीज, तो क‍िसी को मोटापा। बचपन में फाइबर र‍िच फूड्स के बारे में ज्‍यादा जानकारी नहीं थी, मैं भी फाइबर ज्‍यादा नहीं लेती थी पर मेरी मां हमेशा मुझे सलाद और फल ख‍िलाती रहती थीं ताक‍ि शरीर को फाइबर म‍िले, मेड‍िकल फील्‍ड में होने के कारण मां को न्‍यूट्र‍ि‍शन की जानकारी है और वो मुझे हमेशा फाइबर का सेवन बढ़ाने पर जोर देती हैं। पुराने समय में लोग फल और सब्‍ज‍ियों का ज्‍यादा सेवन करते थे। इनमें फाइबर होता है। फाइबर डाइट लेने से लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है। साबुत अनाज, दाल, बीजों में भी फाइबर पाया जाता है। जब शरीर में फाइबर कम हो जाता है, तो सेहत पर बुरा असर पड़ता है। फाइबर आंतों में गुड बैक्‍टीर‍िया को बढ़ावा देता है और शरीर के अपश‍िष्‍ट पदार्थों को बाहर न‍िकालने में मदद करता है। इस लेख में जानेंगे लो फाइबर डाइट लेने से शरीर के कौन से फंक्‍शन प्रभाव‍ित हो सकते हैं?

1. ब्लड शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव हो सकता है- It Disturbs Sugar Level

अगर आप लो फाइबर डाइट लेंगे, तो खाने के बाद शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है। अगर बार-बार ऐसा होगा, तो इंसुलि‍न रेज‍िस्‍टेंस का खतरा बढ़ेगा। Medline Plus के मुताब‍िक, डायब‍िटीज को कंट्रोल करने के ल‍िए फाइबर को शाम‍िल करना जरूरी है। होल ग्रेन्‍स, फाइबर का एक फॉर्म है, इसे डाइट का ह‍िस्‍सा बनाएं। फाइबर का सेवन करने से ब्‍लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ने से रोका जा सकता है।

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2. बैड कोलेस्‍ट्रॉल बढ़ना- Low Fiber Diet Increase Bad Cholesterol

फाइबर की कमी से बैड कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल बढ़ सकता है और लंबे टाइम तक अगर कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल ज्‍यादा होगा, तो ह्रदय रोगों का खतरा बढ़ेगा। फाइबर आंत में बाइल एस‍िड (पित्त अम्ल) से म‍िलकर उसे बाहर न‍िकालने में मदद करता है। इससे शरीर को नया बाइल एस‍िड बनाने के ल‍िए कोलेस्‍ट्रॉल का इस्‍तेमाल करना पड़ता है ज‍िससे बैड कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल कम होता है। Indian Council Of Medical Research & National Institute Of Nutrition के मुताब‍िक, ताजे फल और सब्‍ज‍ियों से फाइबर म‍िलता है। फाइबर से बैड कोलेस्‍ट्रॉल के शरीर में अब्‍जॉर्ब होने की प्रक्र‍िया कम होती है ज‍िससे कोरोनरी हार्ट ड‍िजीज, डायब‍िटीज और मोटापे को कम करने में मदद म‍िलती है।

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3. गट माइक्रोबायोम का असंतुलन- It Causes Microbiome Imbalance

आंत में मौजूद गुड बैक्‍टीर‍िया को गट माइक्रोबायोम कहा जाता है। फाइबर इन बैक्‍टीर‍िया के ल‍िए भोजन की तरह काम करता है ज‍िससे इनकी मात्रा बढ़ती है। Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow ने बताया क‍ि जब हम लो फाइबर डाइट लेते हैं, तो गुड बैक्‍टीर‍िया की संख्‍या कम हो जाती है और बैड बैक्‍टीर‍िया हावी हो जाते हैं। इससे माइक्रोबायोम का असंतुलन हो जाता है ज‍िससे कमजोर इम्‍यून‍िटी और मेटाबॉल‍िक समस्‍याएं हो सकती हैं।

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4. पाचन समस्याएं- Digestive Issues

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अगर लो फाइबर डाइट लेंगे, तो स्‍टूल सख्‍त हो सकता है और मल त्‍याग में मुश्‍क‍िल होगी। लंबे समय तक रहने वाले कब्‍ज से आंतों की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। फाइबर की कमी से कब्‍ज, गैस, पेट फूलना, अपच जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। Medline Plus के मुताब‍िक, डाइटरी फाइबर की मदद से कब्‍ज की समस्‍या को दूर करने में मदद म‍िलती है। इससे गैस, ब्‍लोट‍िंग और क्रैम्‍प्‍स की समस्‍या दूर होती है। होल ग्रेन्‍स, नट्स एवं सीड्स, फ्रूट्स और सब्‍ज‍ियां, डाइटरी फाइबर का अच्‍छा स्रोत हैं।

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5. वजन और मेटाबॉलिज्म पर असर- It Affects Weight And Metabolism

फाइबर र‍िच फूड्स का सेवन करने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और ओवरईट‍िंग की संभावना कम होती है। अगर आप लो फाइबर डाइट लेंगे, तो उसमें पोषण कम होगा ज‍िससे वेट गेन और स्‍लो मेटाबॉल‍िज्‍म का खतरा रहेगा। वेट गेन के कारण हाई बीपी, डायब‍िटीज और ह्रदय रोग जैसी समस्‍याएं भी हो सकती हैं।

न‍िष्‍कर्ष:

लो फाइबर डाइट शरीर के मेटाबॉल‍िक रेट, वजन, डाइजेस्‍ट‍िव स‍िस्‍टम, गट माइक्रोबायोम, कोलेस्‍ट्रॉल और शुगर लेवल को प्रभाव‍ित कर सकती है। इसल‍िए डॉक्‍टर की सलाह पर पर्याप्‍त मात्रा में फाइबर को डाइट में शाम‍िल करें।

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FAQ

  • शरीर में फाइबर की कमी से क्‍या होता है?

    शरीर में फाइबर की कमी से कब्‍ज, पेट में गैस, पेट फूलना और अपच जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। फाइबर की कमी से शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है और कोलेस्‍ट्रॉल लेवल प्रभाव‍ित होता है।
  • फाइबर र‍िच फूड्स कौन से हैं?

    ओट्स, दाल, राजमा, अलसी, च‍िया सीड्स, हरी सब्‍ज‍ियां, साबुत अनाज फाइबर से भरपूर होते हैं। इसके अलावा सेब, नाशपाती जैसे फल भी फाइबर का अच्‍छा स्रोत माने जाते हैं।
  • मुझे कैसे पता चलेगा कि फाइबर की कमी है?

    बार-बार कब्‍ज, मल त्‍याग करने में कठ‍िनाई, पेट भारी लगना, जल्‍दी भूख लगना या शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव फाइबर की कमी के संकेत हैं। 

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Mar 03, 2026 15:59 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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