Fri Sep 11, 2026 | 09:18 PM IST

Medically Reviewed by Dt Divya Gandhi , Therapeutic Diet (Diabetes & PCOD)

एक हफ्ते तक फाइबर न खाएं तो क्या होगा? डायटिशियन से जानें सेहत पर इसका असर

फाइबर को एक सप्ताह के लिए डाइट से हटा देना सही नहीं है। इससे पाचन संबंधी कई परेशानियां हो सकती हैं और गट बैक्टीरिया भी प्रभावित होती हैं, जानें इनके बारे में।

यह कहने की जरूरत नहीं है कि फाइबर हमारी बॉडी के लिए कितना जरूरी है। फाइबर को बैलेंस्ड डाइट का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए। इसकी वजह से पाचन क्षमता में सुधार होता है, मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और कई तरह की क्रॉनिक डिजीज का रिस्क भी कम होता है। यही नहीं, फाइबर की मदद से वजन को संतुलित रखने में भी मदद मिलती है। बहरहाल, ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो समय-समय पर अपनी डाइट में जरूरी बदलाव करते हैं। कई लोग फाइबर सप्ताह भर के लिए डाइट से निकाल देते हैं। ऐसे में यह सवाल जरूर उठता है कि क्या हफ्ते भर के लिए फाइबर नहीं खाना सही होता है और इससे किस तरह की परेशानियां हो सकती हैं? आइए, जानते हैं Divya Gandhi's Diet & Nutrition Clinic की डायटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी से।

एक हफ्ते तक फाइबर नहीं खाने से क्या होता है

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फाइबर हमारी डाइट का हिस्सा जरूर होना चाहिए। एनसीबीआई की रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि अगर आप एक हफ्ते तक फाइबर नहीं लेते हैं, तो इसकी वजह से एक्यूट कब्ज की दिक्कत हो सकती है और गट हेल्थ बिगड़ सकती है। इस संबंध में न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी बताती हैं, "फाइबर डाइट से रिमूव करना समझदारी नहीं है। फाइबर का सेवन करने से पाचन क्षमता बेहतर होती है और गट के बैक्टीरिया भी बैलेंस्ड रहते हैं।"

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एक हफ्ते तक फाइबर नहीं खाने के नुकसान

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1. पाचन में परेशानीः एक हफ्ते तक फाइबर नहीं लेने से पाचन क्षमता धीमी हो जाती है, जो धीरे-धीरे कब्ज का मुख्य कारण बन कसता है। यहां तक कि फाइबर की कमी के कारण मल अंदर सूख जाता है, जिसे पास होने में काफी मुश्किल आती है।

2. गट बैक्टीरिया पर असरः फाइबर की मौजूदगी गट बैक्टीरिया को संतुलित बनाए रखने में मदद करते हैं। फाइबर की कमी से गट बैक्टीरिया बढ़ नहीं पाते हैं, जिससे कोलन को बचाने वाले हेल्दी कंपाउंड बनने में रुकावट आ सकती है।

3. भूख बढ़नाः फाइबर एक ऐसा पोषक तत्व है, जिसका सेवन करने से लंबे समय तक भूख का एहसास नहीं होता है। अगर आप फाइबर का सेवन सप्ताह भर नहीं करते हैं, तो हर समय भूख महसूस होती रहेगी और संभवतः आप ओवर ईटिंग कर बैठें।

4. मेटाबॉलिज्म पर असरः फाइबर की कमी के कारण शरीर में शुगर का स्तर प्रभावित हो सकता है। असल में, फाइबर ब्लडस्ट्रीम में शुगर के रिलीज होने की स्पीड को रेगुलेट करने के लिए जरूरी होता है।

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एक्सपर्ट की सलाह

Harvard T.H. Chan School of Public Health में प्रकाशित एक लेख की मानें, तो बच्चों और वयस्कों को एक दिन में 25 से 35 ग्राम फाइबर रोजाना लेना चाहिए।’ न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी बताती हैं कि आप फाइबर को किस तरह अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं-

  • व्हाइट ब्रेड या सफेद चावल की जगह साबुत अनाज और ब्राउन राइस को डाइट का हिस्सा बनाएं।
  • नाश्ते में तरह-तरह की दालें, ओटमील जैसी चीजें शामिल करें। ये सभी चीजें फाइबर का अच्छा स्रोत हैं।
  • फाइबर के लिए जूस की तुलना में साबुत फलों का सेवन किया जाना चाहिए। ध्यान रखें कि फलों के जूस में फाइबर नहीं होता है।
  • अपनी डाइट में तरह-तरह के फलों और सब्जियों, जैसे ब्रोकली को शामिल करें।
  • स्नैक्स में कच्ची सब्जियां, सलाद या नट्स खाएं। ये भी फाइबर का अच्छा स्रोत होते हैं।
  • हमेशा धीरे-धीरे फाइबर की मात्रा में अपनी डाइट में बढ़ानी चाहिए।

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निष्कर्ष

किसी भी व्यक्ति को अपने बैलेंस्ड डाइट से फाइबर कभी भी रिमूव नहीं करना चाहिए। फाइबर का सेवन कम मात्रा में करने से पाचन संबंधी समस्याएं ट्रिगर हो सकती हैं। गट बैक्टीरिया भी प्रभावित होते हैं। वहीं, जब आप नियमित रूप से फाइबर का सेवन करते हैं, तो इससे सेहत में सुधार होता है और पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है और इसका आपके समग्र स्वास्थ्य पर अच्छा असर पड़ता है।

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FAQ

  • क्या पर्याप्त फाइबर नहीं खाने से कब्ज हो सकती है?

    फाइबर हमारी डाइट का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। अगर आप इसका सेवन नहीं करते हैं, तो कब्ज की समस्या हो सकती है। यहां तक कि पाचन संबंधी अन्य परेशानियां भी ट्रिगर हो सकती हैं।
  • पर्याप्त फाइबर नहीं होने के लक्षण क्या हैं?

    Better Health Channel के अनुसार शरीर में पर्याप्त फाइबर नहीं होने पर कब्ज, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस), डायवर्टीकुलिटिस, हृदय रोग और कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ जाता हैै।
  • पेट न साफ होने से कौन सी बीमारी होती है?

    पेट न साफ होने से बवासीर, फिशर, पेट में दर्द, सूजन, गैस, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, आंतों में अल्सर जैसी कई बीमारियां हो सकती हैं।

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Disclaimer

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Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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