Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dt Rakshita Mehra , Consultant Dietetics

पेट के अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा सकती हैं ये 6 आदतें, न करें नजरअंदाज

गट में हेल्दी बैक्टीरिया का होना हमारे बेहतर पचान तंत्र के लिए बहुत जरूरी माना जाता है। हालांकि रोजाना की कुछ आदतें हमारे आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए, खाने का सही समय न होना, कम फाइबर वाले फूड्स का सेवन आदि जैसी आदतों से बचना चाहिए।

पाचन क्रिया को बेहतर रखने के लिए जरूरी है कि हमारे गट में अच्छे बैक्टीरिया सही मात्रा में बने रहे और बुर बैक्टीरिया को बढ़ने से रोका जाए। हमारी आंतों में कई बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जिन्हें गट माइक्रोबायोम के रूप में जाना जाता है। इनमें मौजूद अच्छे बैक्टीरिया पाचन, इम्यून सिस्टम की क्षमता, पोषक तत्वों के अवशोषण और संपूर्ण स्वास्थ्य को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि, हमारी रोजाना की कुछ आदतें इन हेल्दी बैक्टीरिया का संतुलन बिगाड़ सकती हैं। इसलिए, आइए दिल्ली की क्लिनिकल डाइटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट रक्षिता मेहरा से जानते हैं कि रोजाना की किन आदतों से बचना चाहिए, जो आंतों के बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा सकते हैं?

रोजाना की आदतें जो अच्छे गट बैक्टीरिया को पहुंचा रहे हैं नुकसान

न्यूट्रिशनिस्ट रक्षिता मेहरा के अनुसार, रोजाना की हमारी कुछ आदतें ऐसी होती है, जो अनजाने में हमारे गट के अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिनमें शामिल हैं-

1. अनियमित समय पर भोजन करना

ब्रेकफास्ट छोड़ना, देर रात भोजन करना या रोज अलग-अलग समय पर भोजन करना पाचन तंत्र के नेचुरल लय को प्रभावित कर सकता है। अनियमित खानपान की आदतों के कारण आंथों के अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ सकता है और पाचन से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए, रोजाना लगभग एक ही समय पर भोजन करने की कोशिश करनी चाहिए।

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2. फाइबर की कमी

फाइबर गुड बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करता है। अगर डाइट में साबुत अनाज, दालें, फल, सलाद और सब्जियों की मात्रा कम होगी तो हेल्दी बैक्टीरिया को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता है। इससे उनका संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसलिए, रोजाना अपनी डाइट में पर्याप्त मात्रा में फाइबर से भरपूर फूड्स को अपनी डाइट में शामिल करें।

3. पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना

शरीर में पानी की कमी सिर्फ डिहाइड्रेशन की समस्या का कारण नहीं बनता है, बल्कि पाचन क्रिया को भी प्रभावित कर सकती है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से कब्ज की समस्या हो सकती है, जिससे आंतों का वातावरण भी प्रभावित होता है। पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीना पाचन तंत्र और गट हेल्थ दोनों के लिए जरूरी होता है।

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4. ज्यादा प्रोसेस्ड फूड का सेवन

चिप्स, पैकेज्ड स्नैक्स, इंस्टेंट नूडल्स, प्रोसेस्ड मीट, बर्गर, पिज्जा और ज्यादा चीनी वाले फूड्स का सेवन करने से भी गट बैक्टीरिया पर बुरा असर पड़ सकता है। इन फूड्स में फाइबर कम और नमक, चीनी और अनहेल्दी फैट ज्यादा होती है। इनका बार-बार सेवन फायदेमंद बैक्टीरिया की संख्या कम कर सकता है। साथ ही हानिकारक बैक्टीरिया को बढ़ावा दे सकता है। गट हेल्थ को बेहतर रखने के लिए ताजे और कम प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन करना चाहिए।

5. ज्यादा शराब का सेवन

ज्यादा मात्रा में शराब पीने से भी आंतों की परत को नुकसान पहुंच सकता है और गुड बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ सकता है। इसके कारण पाचन से जुड़ी समस्याएं, ब्लोटिंग और पोषक तत्वों के अवशोषण को भी दिक्कत हो सकती है। अगर आप शराब का सेवन करते हैं तो इसे सीमित मात्रा में रखने की कोशिश करें।

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6. तनाव और नींद की कमी

लगातार तनाव और पर्याप्त मात्रा में नींद न लेना सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य और सेहत पर बुरा असर नहीं डालता है, बल्कि आंतों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। तनाव के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव गट माइक्रोबायोम के संतुलन पर असर डाल सकते हैं। वहीं, रोजाना 7 से 9 घंटे की अच्छी नींद लेने से शरीर और पाचन तंत्र दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

निष्कर्ष

हमारी छोटी-छोटी रोजाना की आदतें गट हेल्थ पर बड़ा असर डाल सकती हैं। खाना छोड़ना, प्रोसेस्ड फूड्स का ज्यादा सेवन, फाइबर की कमी और पानी कम पीना, तनाव और नींद की कमी जैसी आदतें गट के अच्छे बैक्टीरिया को बिगाड़ सकते हैं। इसलिए, इन आदतों को बदलने की कोशिश करें, ताकि पाचन से जुड़ी समस्याओं से राहत मिल सके।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • आंतों में गुड बैक्टीरिया को कैसे बढ़ाएं?

    आंतों में गुड बैक्टीरिया बढ़ाने के लिए फाइबर और प्रीबायोटिक से भरपूर फूड्स को शामिल कर सकते हैं। इसके साथ ही, दही, किमची जैसे प्रोबायोटिक्स फूड्स भी शामिल कर सकते हैं।
  • गट हेल्थ सुधारने के लिए क्या खाएं?

    गट हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए अपनी डाइट में प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स को शामिल कर सकते हैं।

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Disclaimer

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jun 30, 2026 22:21 IST

    Modified By : Katyayani Tiwari
  • Jun 30, 2026 22:21 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dt Rakshita Mehra

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