Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr Anupama N K , Consultant – Medical Gastroenterology

क्या आंतों के बैक्टीरिया भी हो सकते हैं शुगर क्रेविंग का कारण? बता रहे हैं डॉक्टर

हमारे पेट के बैक्टीरिया पाचन के साथ-साथ खाने की क्रेविंग को भी प्रभावित करते हैं। गट माइक्रोबायोम में गुड और बैड बैक्टीरिया में गड़बड़ी मीठा खाने की क्रेविंग बढ़ा सकते हैं। 

हमारे पेट के अंदर सैकड़ों सूक्ष्म बैक्टीरिया होते हैं, जिन्हें हम गट माइक्रोबायोम के रूप में जानते हैं। पेट के अंदर रहने वाले ये छोटे-छोटे बैक्टीरिया सिर्फ पाचन में ही मदद नहीं करते हैं, बल्कि यह भी तय करते हैं कि आपका किस तरह की चीजें खाने का मन करेगा। जब पेट में अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है तो हानिकारक बैक्टीरिया ज्यादा मीठा खाने की क्रेविंग को बढ़ा सकते हैं। क्रेविंग पर कंट्रोल न कर पाने के कारण ज्यादा मात्रा में चीनी खाने से गट के अच्छे बैक्टीरिया कमजोर होने लगते हैं, जिससे पाचन और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए, आइए Dr. Anupama N K, Senior Consultant - Medical Gastroenterology, Aster CMI Hospital, Bengaluru से जानते हैं कि आंतों के बैक्टीरिया और शुगर क्रेविंग में क्या कनेक्शन है?

पेट के बैक्टीरिया और मीठा खाने की क्रेविंग में कनेक्शन

Dr. Anupama N K बताते हैं कि आपकी आंतों में रहने वाले बैक्टीरिया, जिन्हें गट माइक्रोबायोम कहा जाता है, पाचन, मेटाबॉलिज्म, इम्यूनिटी और यहां तक कि भूख को कंट्रोल करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। गट बैक्टीरिया का असंतुलित होना मीठा खाने की क्रेविंग को बढ़ा सकता है। गट के कुछ हानिकारक बैक्टीरिया और यीस्ट शुगर पर पनपते हैं और शरीर को और ज्यादा मीठा खाने के लिए बढ़ावा दे सकते हैं। साथ ही, ज्यादा शुगर वाली डाइट फायदेमंद बैक्टीरिया की संख्या को कम कर सकती है, जिससे एक अनहेल्दी साइकिल बन जाता है।

क्या कहती है स्टडी?

साल 2021 में International Journal of Environmental Research and Public Health में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, जब आंतों के अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है तो इससे फूड एडिक्शन या खाने की क्रेविंग जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इस स्टडी में यह भी बताया गया है कि, हम जो भी खाते हैं, वह आंतों के बैक्टीरिया का भोजन बनता है। वेस्टर्न खानपान, जिसमें चीनी और फैट ज्यादा और फाइबर कम होता है, खास तरह के बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है। ये बैक्टीरिया फिर दिमाग को संकेत भेजते हैं, ताकि हमें उसी तरह के फूड्स जैसे मीठे या फैट से भरपूर फूड्स खाने की ज्यादा क्रेविंग होने लगती है।

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अच्छे बैक्टीरिया और हमारी जीवनशैली का असर

Dr. Anupama N K ने बताया कि "अच्छे गट बैक्टीरिया शॉर्ट-चेन फैटी एसिड नाम के पदार्थ बनाने में मदद करते हैं, जो गट हेल्थ को बेहतर बनाते हैं। ये चीजें पेट भरने का एहसास कराने वाले हार्मोन के रिलीज को भी बेहतर करते हैं। जब गट माइक्रोबायोम संतुलित होता है, तो लोगों को खाना खाने के बाद संतुष्टि महसूस हो सकती है और मीठे स्नैक्स की क्रेविंग कम हो सकती है। खराब नींद, तनाव और प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा सेवन भी गट बैक्टीरिया पर असर डाल सकता है और मीठा खाने की इच्छा को बढ़ा सकता है।

साल 2025 में Current Clinical Microbiology Reports में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, आधुनिक लाइफस्टाइल जैसे सर्केडियन रिदम में गड़बड़ी, पूरी नींद न लेना, एक्सरसाइज न करना और तनाव जैसे कारक, हमारे पेट के अंदर रहने वाले अच्छे और बुरे बैक्टीरिया यानी माइक्रोबायोटा को बिगाड़ सकते हैं। इससे गट बैक्टीरिया का काम करने का तरीका बदल जाता है, जिसका सीधा और बुरा असर हमारी सेहत पर पड़ता है।

Gut Bacteria-And-Sugar-Cravings-Connection-inside

पेट को स्वस्थ रखने के लिए सही खान-पान की आदतें

Dr. Anupama N K के अनुसार, पेट की सेहत और मीठा खाने की क्रेविंग, दोनों को कंट्रोल करने के लिए हेल्दी खान-पान की आदतों को अपनाकर ही होती है। इसलिए, आप अपनी डाइट में इन बदलावों को कर सकते हैं-

  • अपनी डाइट में फाइबर से भरपूर चीजें जैसे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, नट्स और सीड्स शामिल करें, क्योंकि फाइबर पेट के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है।
  • दही, छाछ, किमची और इडली या डोसा का बैटर जैसे फर्मेंटेड फूड्स का सेवन करें, क्योंकि इनमें ऐसे अच्छे बैक्टीरिया मिल सकते हैं जो पेट की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।
  • खाने में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और हेल्दी फैट्स लेने से भी पेट लंबे समय तक भरा रहता है, जिससे मीठा खाने की क्रेविंग कम होती है।

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गट हेल्थ बेहतर रखने और शुगर क्रेविंग को मैनेज करने के टिप्स

Dr. Anupama N K बताते हैं कि गट माइक्रोबायोम को हेल्दी रखने के लिए आप इन टिप्स को फॉलो कर सकते हैं-

  • शरीर का हाइड्रेटेड रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
  • नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियां करें
  • रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लेने की कोशिश करें
  • वॉक, योग और मेडिटेशन जैसी गतिविधियों से तनाव मैनेज करें
  • चीनी का सेवन पूरी तरह छोड़ने की कोशिश करें
  • मीठे की जगह ताजे फल, भुने हुए नट्स या दही जैसे विकल्प चुनें
  • मीठे ड्रिंक्स, पैकेज्ड डेजर्ट और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड को ज्यादा खाने से बचें

निष्कर्ष

Dr. Anupama N K का कहना है कि एक हेल्दी गट और संतुलित डाइट समय के साथ चीनी की क्रेविंग को कम करने के लिए मिलकर काम करते हैं। ऐसे में लाइफस्टाइल में छोटे और लगातार होने वाले बदलाव पेट के बैक्टीरिया में सुधार कर सकते हैं। इसके साथ ही, पाचन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है, भूख कंट्रोल करने में मदद मिलती है और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर रखा जा सकता है।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • बार-बार मीठा खाने का मन क्यों करता है?

    बार-बार मीठा खाने का मन ब्रेन रिवॉर्ड सिस्टम यानी डोपामाइन हार्मोन, लो ब्लड प्रेशर और तनाव या नींद की कमी के कारण होता है।
  • ज्यादा मीठा खाने से कौन सी बीमारी होती है?

    ज्यादा मीठा खाने से मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ता है। इसके अलावा, यह लिवर में फैट, दांतों में सड़न और कमजोर इम्यूनिटी का भी कारण बन सकता है।

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jul 30, 2026 20:23 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Anupama N K

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