हमारे शरीर के लिए प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स अहम माने जाते हैं। इनकी मदद से डायरिया, कब्ज, आईबीएस यानी इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी समस्याओं से बचाव करने में शरीर को मदद मिलती है। प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स को समझने से पहले गुड और बैड बैक्टीरिया के बारे में समझते हैं। गुड बैक्टीरिया हमारे शरीर को उन डिजीज या इंफेक्शन से बचाते हैं जो बैड बैक्टीरिया द्वारा फैलाए जाते हैं। प्रोबायोटिक शरीर में इन्हीं गुड बैक्टीरिया की मात्रा को बैलेंस करते हैं। इन गुड बैक्टीरिया के लिए प्रीबायोटिक भोजन का काम करते हैं। प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स को आगे विस्तार से समझते हैं। बेहतर जानकारी के लिए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।
प्रोबायोटिक और प्रीबायोटिक्स का क्या संबंध है?
- हमारे इंटेस्टाइन में कुछ बैक्टीरिया मौजूद होते हैं। ये बैक्टीरिया हेल्दी होते हैं और खाने को पचाने के लिए अहम माने जाते हैं।
- प्रोबायोटिक्स सप्लीमेंट्स या फूड्स में ये हेल्दी बैक्टीरिया मौजूद होते हैं। प्रीबायोटिक्स इन हेल्दी बैक्टीरिया का भोजन कहलाया जाता है, लेकिन हमारा इंटेस्टाइन प्रीबायोटिक्स को ठीक से पचा नहीं पाता है, लेकिन प्रोबायोटिक बैक्टीरिया प्रीबायोटिक्स को डाइजेस्ट कर पाते हैं। इससे प्रोबायोटिक बैक्टीरिया अधिक हेल्दी होने लगते हैं। अगर इंटेस्टाइन में मौजूद बैक्टीरिया हेल्दी हों, तो ये हमें कई बीमारियों से बचा सकते हैं जैसे पेट की बीमारियां, डाइजेशन संबंधित समस्याएं, पोषक तत्वों से संबंधित समस्याओं से भी बचाव होता है।
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प्रोबायोटिक और प्रीबायोटिक में क्या अंतर है?
- प्रोबायोटिक्स लिविंग बैक्टीरिया होते हैं जो कि फूड्स और सप्लीमेंट्स में पाए जाते हैं जैसे डेयरी या सोया प्रोडक्ट्स। वहीं प्रीबायोटिक्स, हमारे शरीर के गुड बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करता है।
- पेट में मौजूद एसिड से प्रोबायोटिक्स को नुकसान पहुंच सकता है और उसकी मात्रा कम हो सकती है, वहीं प्रीबायोटिक्स शरीर में लंबे समय तक मौजूद रह सकते हैं और इसे पेट के एसिड से नुकसान पहुंचने की संभावना कम होती है।
- प्रोबायोटिक्स की मदद से इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) से बचने में मदद मिलती है। प्रीबायोटिक्स से पुरानी यानी क्रॉनिक डाइजेस्टिव डिसऑर्डर और इंफ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज (IBD) से बचाव में मदद मिलती है।
प्रोबायोटिक क्या है?

प्रोबायोटिक लिविंग गुड बैक्टीरिया होते हैं जो डाइजेशन में मदद करते हैं। कई ऐसे प्रोबायोटिक फूड्स हैं जिनमें गुड बैक्टीरिया पाए जाते हैं। जैसे- दही, फर्मेंटेड फूड्स जैसे अचार। World Gastroenterology Organisation के मुताबिक, लैक्टोबैसिलस (Lactobacillus) और बिफिडोबैक्टीरियम (Bifidobacterium) की प्रजातियां लंबे समय से आम प्रोबायोटिक्स रही हैं।
प्रोबायोटिक शरीर के लिए क्यों जरूरी है?
- प्रोबायोटिक मल त्याग की प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद करता है।
- पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
- आईबीएस के लक्षण जैसे पेट फूलना, गैस से राहत दिला सकता है।
- कुछ प्रोबायोटिक स्ट्रेन, दस्त से राहत में भी मदद करते हैं।
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प्रीबायोटिक क्या है?
प्रीबायोटिक को शरीर पचा नहीं पाता है इसलिए प्रीबायोटिक, प्रोबायोटिक यानी गुड बैक्टीरिया का भोजन बनकर हमें फायदा पहुंचाते हैं। प्रीबायोटिक को आप एक तरह का प्लांट फाइबर कह सकते हैं जो फल, सब्जियों, बीन्स, दाल वगैरह में पाया जाता है। जैसे- सोयाबीन, प्याज, केला, लहसुन वगैरह। Mayo Clinic के मुताबिक, प्रीबायोटिक्स मुख्य रूप से ज्यादा फाइबर वाले खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं। जब प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स को मिलाया जाता है, तो उन्हें सिनबायोटिक्स कहा जाता है।
प्रीबायोटिक शरीर के लिए क्यों जरूरी है?
- प्रीबायोटिक कैल्शियम के एब्जॉर्ब होने की प्रक्रिया को सपोर्ट करते हैं।
- कुछ स्टडीज में बताया गया है कि ये कोलन कैंसर से बचाव में भी शरीर की मदद करते हैं।
- जॉइंट डिस्लोकेशन से बचाने में मदद कर सकता है।
- डायरिया और पेट के इंफेक्शन से बचाव करता है।
- आईबीएस यानी लार्ज इंटेस्टाइन का डिसऑर्डर और आईबीडी यानी इंफ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज से भी बचाव करता है।
कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ के लिए हैं फायदेमंद
साल 2024 में Nutrients में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स गट माइक्रोबायोटा की बनावट में बदलाव करके इम्यून फंक्शन को बेहतर बनाते हैं, जिससे बिफिडोबैक्टीरिया जैसे फायदेमंद बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ जाती है। प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स, कार्डियोवैस्कुलर यानी हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। इससे टोटल कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
डायरिया में फर्स्ट लाइन ऑफ ट्रीटमेंट
अगर किसी को डायरिया हो, तो लूज मोशन के कारण पेट में मौजूद हेल्दी बैक्टीरिया की मात्रा कम हो जाती है। इन बैक्टीरिया को रिस्टोर करने और लूज मोशन को कंट्रोल के लिए प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स की अहम भूमिका होती है जिसके कारण इन्हें डायरिया में फर्स्ट लाइन ऑफ ट्रीटमेंट भी माना जाता है।
निष्कर्ष:
प्रोबायोटिक्स शरीर में मौजूद गुड बैक्टीरिया को सपोर्ट करते हैं और प्रीबायोटिक्स, गुड बैक्टीरिया के भोजन के रूप में शरीर को फायदा पहुंचाते हैं। डायरिया के लिए प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स, इलाज के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं। दही और फर्मेंटेड फूड्स, प्रीबायोटिक्स के उदाहरण हैं। फल, सब्जियों, बीन्स, दाल, प्रीबायोटिक्स के उदाहरण हैं जो कि एक प्लांट फाइबर कहलाता है। आईबीएस, आईबीडी, मल त्याग और पाचन प्रक्रिया को सपोर्ट करने में ये अहम भूमिका निभाते हैं।
FAQ
एंटीबायोटिक्स लेने के बाद प्रोबायोटिक्स क्यों दिए जाते हैं?
अधिक एंटीबायोटिक्स लेने के बाद कुछ मरीजों में गट माइक्रोबायोम का संतुलन बिगड़ सकता है जिसे सुधारने के लिए डॉक्टर प्रोबायोटिक्स लेने की सलाह दे सकते हैं।प्रोबायोटिक्स की कमी के क्या लक्षण हैं?
प्रोबायोटिक्स की कमी से गैस, कब्ज, एसिडिटी, दस्त की शिकायत हो सकती है। इससे इम्यूनिटी भी कमजोर हो सकती है।
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Aug 13, 2026 14:02 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Smita Singh