Fri Sep 11, 2026 | 06:56 PM IST

Medically Reviewed by Dr Kapil Sharma , Group Director - Gastroenterology & Advanced Endoscopy

क्या आपका पाचन तंत्र स्‍वस्‍थ है? डॉक्‍टर के बताए ये 7 संकेत द‍िखें तो मतलब हेल्‍दी है डाइजेशन

पाचन तंत्र स्‍वस्‍थ रहता है, तो इम्‍यून‍िटी मजबूत होती है। शरीर में पोषक तत्‍व बेहतर ढंग से एब्‍जॉर्ब होते हैं और बीमार‍ियों से बचाव होता है। जानें क‍िन संकेत को देखकर कहा जा सकता है क‍ि आपका डाइजेशन हेल्‍दी है? 

जब भी कोई बीमार होता है, हॉस्‍प‍िटल में भर्ती होता है या क‍िसी मरीज की सर्जरी होती है, तो डॉक्‍टर यह जरूर पूछते हैं क‍ि आपका पाचन कैसा है? यह सवाल इसल‍िए अहम है क्‍योंक‍ि हमारे शरीर के कई फंक्‍शन अच्‍छे डाइजेशन पर न‍िर्भर करते हैं। अगर डाइजेशन या पाचन तंत्र अच्‍छा रहेगा, तो शरीर में एनर्जी रहेगी, इम्‍यून‍िटी मजबूत होगी, न्‍यूट्र‍िएंट्स शरीर में ठीक से एब्‍जॉर्ब होंगे ज‍िससे बीमारी और इंफेक्‍शन का खतरा कम होगा। अक्‍सर लोगों के मन में यह सवाल आता है क‍ि कैसे पता चलेगा क‍ि हमारा पाचन तंत्र मजबूत है? पाचन तंत्र जब स्‍वस्‍थ होता है, तो कुछ अच्‍छे संकेत नजर आते हैं ज‍िनके बारे में आगे व‍िस्‍तार से जानेंगे। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Kapil Sharma, Gastroenterologist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

हेल्‍दी डाइजेशन क्‍यों जरूरी है?

National Institute Of Diabetes And Digestive And Kidney Diseases के मुताब‍िक, शरीर के ल‍िए डाइजेशन का स्‍वस्‍थ होना जरूरी है क्‍योंक‍ि शरीर को स्‍वस्‍थ रखने के ल‍िए प्रोटीन, फैट्स, कार्ब्स, व‍िटाम‍िन्‍स की जरूरत होती है और इनके सही ढंग से एब्‍जॉर्ब होने के ल‍िए पाचन का स्‍वस्‍थ होना जरूरी है। हमारा डाइजेस्‍ट‍िव स‍िस्‍टम न्‍यूट्र‍िएंट्स को छोटे पार्ट्स में तोड़ता है ताक‍ि यह शरीर में एब्‍जाॅर्ब हो पाए और एनर्जी या ग्रोथ के ल‍िए इस्‍तेमाल हो पाए।

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1. रेगुलर बाउल मूवमेंट

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इसका मतलब है मल त्‍याग की प्रक्र‍िया आसानी से होना। यानी जब आप सुबह टॉयलेट जाएं और रोजाना पेट ठीक से साफ हो जाए, तो समझ जाएं क‍ि आपका बाउल मूवमेंट ठीक है और यह हेल्‍दी डाइजेशन का अच्‍छा संकेत है। American College Of Gastroenterology के मुताबि‍क, अगर दस्‍त की समस्‍या चार हफ्ते या ज्‍यादा समय तक बनी रहे, तो इसके पीछे खराब डाइजेशन, खानपान से संबंध‍ित समस्‍याएं, इंफेक्‍शन जैसे कारण हो सकते हैं।

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2. नॉर्मल स्‍टूल पास होता है

नॉर्मल स्‍टूल का रंग और टेक्‍सचर यह बताता है क‍ि आपका डाइजेशन स्‍वस्‍थ है। अगर स्‍टूल बहुत हार्ड हो या रंग में बदलाव हो, तो समझें क‍ि यह खराब डाइट, डाइजेशन, स्‍ट्रेस या अन्‍य कोई समस्‍या का संकेत है। स्‍टूल न ज्‍यादा हार्ड होना चाह‍िए और न ज्‍यादा मुलायम।

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3. स्‍टूल पास करने के दौरान दर्द नहीं होता 

अगर आपका पाचन तंत्र स्‍वस्‍थ है, तो स्‍टूल पास करने के दौरान दर्द नहीं होगा। ज‍िन लोगों को अक्‍सर स्‍टूल पास करते समय ज्‍यादा जोर लगाना पड़ता है, पेट में दर्द होता है, ब्‍लोट‍िंग होती है, पेट साफ न होने का एहसास होता है, उनका पाचन तंत्र स्‍वस्‍थ नहीं कहलाता।

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4. गैस या ब्‍लोट‍िंग नहीं होती

कभी-कभी गैस होना आम बात है, लेक‍िन रोजाना या बार-बार गैस और ब्‍लोट‍िंग की समस्‍या नहीं होनी चाह‍िए। अगर हर बार कुछ भी खाने पर गैस हो जाती है, तो इसका मतलब यह है क‍ि आपका डाइजेशन ठीक नहीं है। रोजाना गैस और ब्‍लोट‍िंग न होना, हेल्‍दी डाइजेशन का संकेत है।

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5. द‍िनभर एनर्जेट‍िक रहते हैं 

जब हमें पूरे द‍िन कमजोरी, थकान और लो एनर्जी महसूस होती है, तो हम सोचते हैं क‍ि ऐसा नींद पूरी न होने के कारण हो रहा है, जबक‍ि यह डाइजेशन संबंधि‍त समस्‍या हो सकती है। जब आपका पाचन तंंत्र स्‍वस्‍थ रहेगा, तो शरीर न्‍यूट्र‍िएंट्स को बेहतर ढंग से एब्‍जॉर्ब करेगा और शरीर में एनर्जी रहेगी। इसल‍िए द‍िनभर एनर्जेट‍िक रहना भी हेल्‍दी डाइजेशन का संकेत है।

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6. समय पर भूख लगती है

अगर डाइजेशन सही रहेगा, तो समय-समय पर भूख लगेगी और मील को इंजॉय करते हुए खा पाएंगे। ज‍िन लोगों का पाचन अच्‍छा नहीं होता, उन्‍हें अक्‍सर खाते समय जी म‍िचलाना या भूख न लगने की समस्‍या होती है। इससे वेट लॉस करना भी मुश्‍क‍िल हो जाता है, जबक‍ि हेल्‍दी डाइजेशन के साथ वेट मेंटेन करना आसान होता है।

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7. बार-बार पेट दर्द नहीं होता 

ज‍िन लोगों का पाचन तंत्र अच्‍छा नहीं होता, उन्‍हें अक्‍सर पेट दर्द होता है। कुछ भी खाने पर वॉशरूम जाने की जरूरत महसूस होती है, कुछ भी खाते ही दर्द होने लगता है। अगर यह लक्षण नजर आए, तो समझ जाएं क‍ि पाचन तंत्र को सुधारने की जरूरत है।

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हेल्‍दी डाइजेशन न होने पर क्‍या करें?

अगर आपका पाचन तंत्र स्‍वस्‍थ नहीं है, तो च‍िंता न करें। इसे स्‍वस्‍थ बनाया जा सकता है। कुछ आसान तरीके हैं ज‍िनकी मदद से डाइजेशन को मजबूत बना सकते हैं-

  • रोजाना एक्‍सरसाइज करें। भले ही आप आधे घंटे सुबह-शाम वॉक करें, लेक‍िन फ‍िज‍िकल मूवमेंट जरूरी है। इससे मेटाबॉल‍िज्‍म मजबूत बनेगा और डाइजेशन सुधारने में मदद म‍िलेगी।
  • प्रोसेस्‍ड और शुगर वाली चीजों का सेवन करने से शरीर में सूजन बढ़ती है और पाचन तंत्र कमजोर होता है इसल‍िए इन चीजों से दूरी बनाएं।
  • डाइट में होल ग्रेन्‍स, दाल, फाइबर र‍िच फूड्स को शाम‍िल करें।
  • इसके साथ ही पर्याप्‍त मात्रा में पानी प‍िएं। ये एक छोटी ट‍िप है, लेक‍िन डाइजेशन में यह अहम भूम‍िका न‍िभाती है। पर्याप्‍त मात्रा में पानी का सेवन करेंगे, तो बाउल मूवमेंट ठीक रहेगा और कब्‍ज से बचाव होगा।

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डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

अगर ब्‍लोट‍िंग, कब्‍ज, डायर‍िया या पेट में दर्द की समस्‍या लगातार बनी रहे, तो डॉक्‍टर से संपर्क करना न भूलें।

न‍िष्‍कर्ष:

अगर आपका पाचन तंत्र स्‍वस्‍थ है, तो ये लक्षण नजर आएंगे जैसे- रेगुलर बाउल मूवमेंट, नॉर्मल स्‍टूल पास करना, स्‍टूल पास करते समय दर्द न होना, गैस या ब्‍लोट‍िंग न होना, द‍िनभर एनर्जेट‍िक रहना, समय पर भूख लगना, बार-बार पेट दर्द न होना वगैरह। पाचन तंत्र को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो रोजाना एक्‍सरसाइज करें, पर्याप्त पानी पीना न भूलें, फाइबर, होल ग्रेन्‍स का सेवन करें और प्रोसेस्‍ड एवं शुगरी फूड्र से दूरी बनाएं।

image credit: freepik

FAQ

  • स्‍टूल के रंग में बदलाव कब च‍िंता की बात होती है?

    अगर स्‍टूल का रंग काला हो या टेक्‍सचर में बदलाव हो, तो यह च‍िंता की बात है। खासकर अगर स्‍टूल के साथ खून आ रहा हो, तो तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें।
  • स्‍टूल से बदबू आना सामान्‍य है?

    हां, स्‍टूल से स्‍मेल आना सामान्‍य है क्‍योंक‍ि यह शरीर का वेस्‍ट प्रोडक्‍ट होता है। हालांक‍ि, तेज गंध या बदली हुई गंध को नजरअंदाज नहीं करना चाह‍िए।

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Disclaimer

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 16, 2026 10:58 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jul 16, 2026 10:58 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
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