Fri Oct 16, 2026 | 08:49 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

अक्‍सर रहता है पेट खराब? डॉक्‍टर से जानें पेट की 8 कॉमन समस्‍याएं और उनके आयुर्वेद‍िक उपाय

आयुर्वेद के अनुसार पाचन तंत्र का सही तरह से काम करना तीन दोषों वात, पित्त और कफ के संतुलन पर निर्भर करता है। जानते हैं क‍िस पाचन समस्‍या के ल‍िए आयुर्वेद में क‍िन-क‍िन उपायों को असरदार बताया गया है?
अक्‍सर रहता है पेट खराब? डॉक्‍टर से जानें पेट की 8 कॉमन समस्‍याएं और उनके आयुर्वेद‍िक उपायअक्‍सर रहता है पेट खराब? डॉक्‍टर से जानें पेट की 8 कॉमन समस्‍याएं और उनके आयुर्वेद‍िक उपाय

आयुर्वेद के मुताब‍िक, तीन दोष होते हैं। जब कफ दोष असंतुल‍ित होता है, तो पाचन धीमा हो जाता है। इससे मतली या पेट में भारीपन महसूस होता है। पित्त दोष बढ़ने पर एसिडिटी, सीने में जलन जैसी समस्‍याएं होने लगती हैं। वात असंतुलित होने पर पेट फूलना, कब्ज, गैस जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। National Ayurvedic Medical Association के मुताब‍िक, अग्नि उस पाचन शक्ति को कहा जाता है, जो भोजन को पचाने, पोषक तत्वों को एब्‍जॉर्ब करने और शरीर से अपशिष्ट बाहर निकालने का काम करती है। जब अग्नि (Digestive Fire) असंतुलित रहती है, तो भोजन अच्छी तरह से नहीं पच पाता है और पाचन समस्‍याएं होने लगती हैं। पाचन समस्‍याओं के ल‍िए आयुर्वेद में कई उपाय बताए गए हैं। जानते हैं क‍िस पाचन समस्‍या में कौन सा आयुर्वेद‍िक उपाय काम आता है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।

पाचन समस्‍याएं   आयुर्वेद‍िक उपाय 
1. अपच  सेंधा नमक, काला नमक, हींग, अजवाइन, अनार दाना, धन‍िया
2. गैस और पेट फूलना  हींग, अजवाइन, जीरा 
3. कब्ज  फाइबर, हरीतकी चूर्ण, घृत पान
4. एसिडिटी   धन‍िया, मुस्तक मोथा, त्र‍िफला चूर्ण, लौंग 
5. दस्त  अनार दाना, मुस्तक मोथा
6. इर्र‍िटेबल बाउल स‍िंड्रोम  कब्‍ज की स्‍थि‍त‍ि में फाइबर, हरीतकी चूर्ण या घृत‍ पान, डायर‍िया की स्‍थि‍त‍ि में अनार दाना, मुस्तक मोथा
7. पेट में ऐंठन  लघु आहार लें, जीरा, अजवाइन, हींग, सौंफ 
8. मतली और उल्टी  धन‍िया, लौंग, सौंफ, पुदीना 

1. अपच

Ayurveda Expert Dr. Shrey Sharma ने कहा, ''आयुर्वेद में अपच (Indigestion) को अजीर्ण कहा जाता है। समय पर भोजन न करना, पानी ज्‍यादा पीना, घी या दूध के उत्‍पाद से पूरी तरह से परहेज करना, ज्‍यादा मात्रा में भोजन करना, खाने को ठीक ढंग से न चबाने जैसे कारण अपच की समस्‍या पैदा करते हैं।''

आयुर्वेद‍िक उपाय:

  • इसे दूर करने के ल‍िए सेंधा नमक या काला नमक का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसे गुनगुने पानी में म‍िलाकर भोजन के बाद पी सकते हैं या नींबू के रस के साथ सेवन कर सकते हैं।
  • अपच के ल‍िए हींग या अजवाइन का इस्‍तेमाल करें। इनकी तासीर ठंडी होती है इसल‍िए ये पेट को आराम देते हैं।
  • पित्त वृद्ध‍ि है, तो अनार दाना या धन‍िया इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
  • लौंग प‍ित्तशामक होता है इसल‍िए कम मात्रा में इसका भी प्रयोग कर सकते हैं।

2. गैस और पेट फूलना

hing-benefits-for-stomachhing-benefits-for-stomach

गैस और पेट फूलना (Gas and Bloating) के पीछे कब्‍ज या धीमा पाचन हो सकता है।

आयुर्वेद‍िक उपाय:

  • हींग, अजवाइन और जीरे की मदद से गैस और पेट फूलने की समस्‍या दूर होती है। एक चुटकी हींग को गुनगुने पानी में मिलाकर भोजन के बाद पी सकते हैं। साल 2012 में Pharmacognosy Reviews में प्रकाश‍ित स्‍टडी के मुताब‍ि‍क, हींग की मदद से अपच, गैस, पेट दर्द, पेट फूलने जैसी समस्‍याएं दूर होती हैं।
  • अजवाइन या जीरे को सेंधा नमक के साथ भूनकर खा सकते हैं।

यह भी पढ़ें- खाने के बाद अक्‍सर पेट दर्द होता है? डॉक्टर से जानें इसके कारण और कब है ये चिंता की बात

3. कब्ज

कब्ज (Constipation) को आयुर्वेद में व‍िबंध कहा जाता है। कब्‍ज के पीछे शरीर में पानी की कमी, फाइबर की कमी या शारीर‍िक गत‍िव‍िध की कमी जैसे कारण हो सकते हैं।

आयुर्वेद‍िक उपाय:

  • कब्‍ज के ल‍िए फाइबर का सेवन करें।
  • हरीतकी चूर्ण का इस्‍तेमाल करें। हरीतकी (Haritaki) के सूखे फलों का बारीक पाउडर होता है। ये बाजार में आसानी से म‍िल जाता है। इससे आईबीएस की समस्‍या भी दूर होती है। साल 2012 में AYU (An International Quarterly Journal of Research in Ayurveda) में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, हरीतकी आंतों की गति को बढ़ाने और मल त्याग को आसान बनाने के ल‍िए फायदेमंद है।
  • घृत‍ पान का सेवन भी क‍िया जाता है।

4. एसिडिटी

Dr. Shrey Sharma ने कहा, ''एसिडिटी (Acidity) तब होती है जब व्‍यक्‍त‍ि खाने को ठीक से चबाकर नहीं खाता है। इसके अलावा ज्‍यादा मसालेदार भोजन करना, अनियमित खानपान, स्‍ट्रेस या एसिड रिफ्लक्स के कारण एसिडिटी होती है।''

आयुर्वेद‍िक उपाय:

  • धन‍िया को पानी में भ‍िगाकर रख दें और सुबह इसका सेवन कर सकते हैं।
  • मुस्तक मोथा (Mustak Motha) एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसे नागरमोथा के नाम से भी जाना जाता है। यह एक प्रकार की घास है, जिसकी जड़ का इस्‍तेमाल आयुर्वेद में किया जाता है। मुस्तक चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ ले सकते हैं।
  • एक से दो लौंग को मुंह में रखकर उसके रस का सेवन करें।
  • त्र‍िफला चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ ले सकते हैं।

यह भी पढ़ें- पाचन की समस्या में दवा की जगह इस तरह लेती हूं अजवाइन, झटपट मिलती है राहत

5. दस्त

दस्त (Diarrhea) के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे दूषित भोजन या पानी का सेवन, फूड इंटॉलरेंस, कुछ दवाओं का असर, वायरस, बैक्टीरिया या परजीवी इंफेक्‍शन।

आयुर्वेद‍िक उपाय:

  • अनार दाना में टैनिन (Tannins) होता है ज‍िससे दस्‍त की समस्‍या को दूर करने में मदद म‍िलती है।
  • मुस्तक मोथा का इस्‍तेमाल पाचन संबंधि‍त समस्याओं, जैसे अपच और दस्‍त में प्रयोग क‍िया जाता है।

6. इर्र‍िटेबल बाउल स‍िंड्रोम

इर्र‍िटेबल बाउल स‍िंड्रोम (IBS) को आयुर्वेद में ग्रहणी रोग कहा जाता है। आईबीएस होने पर अगर स्‍टूल लूज है, तो डायर‍िया का इलाज क‍िया जाता है। अगर स्‍टूल हार्ड है, तो कब्‍ज का इलाज क‍िया जाता है।

आयुर्वेद‍िक उपाय:

  • कब्‍ज होने पर फाइबर, हरीतकी चूर्ण या घृत‍ पान का सेवन करें। 
  • डायर‍िया होने पर अनार दाना, मुस्तक मोथा जैसे हर्ब्स का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।

7. पेट में ऐंठन

पेट में ऐंठन होने पर कब्‍ज, पेट में गैस, इर्र‍िटेबल बाउल स‍िंड्रोम जैसे कारण हो सकते हैं।

आयुर्वेद‍िक उपाय:

  • पेट में ऐंठन होने पर लघु आहार जैसे आसानी से पचने वाले आहार का सेवन करें।
  • जीरा, अजवाइन, हींग की मदद से पेट की ऐंठन को दूर कर सकते हैं।
  • अगर एस‍िड‍िटी है, तो ठंडी तासीर वाली चीजें खा सकते हैं।
  • पेट में ऐंठन होने पर सौंफ का इस्‍तेमाल करें। ये कब्‍ज को दूर करने में भी मदद करता है।

यह भी पढ़ें- पेट दर्द के साथ जलन और गैस? डॉक्‍टर से जानें कारण और इलाज

8. मतली और उल्टी

Dr. Shrey Sharma ने बताया क‍ि आयुर्वेद के मुताब‍िक, मतली और उल्‍टी के पीछे अक्‍सर पित्त की वृद्ध‍ि होती है। मतली और उल्टी (Nausea and Vomiting) के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे , अपच, एस‍िड‍िटी, फूड पॉइजन‍िंग वगैरह।

आयुर्वेद‍िक उपाय:

मतली या उल्‍टी होने पर क‍िचन इंग्रीड‍िएंट्स जैसे धन‍िया, लौंग, सौंफ, पुदीना का सेवन कर सकते हैं। साल 2021 में मेड‍िकल जर्नल Molecules में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, धनिया के बीजों में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो पाचन को सुधारते हैं और ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करते हैं।

डॉक्टर से संपर्क कब करें?

अगर पेट दर्द की बार-बार हो रही है, लंबे समय तक बनी रहे या घरेलू उपायों से सुधार न हो, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

न‍िष्‍कर्ष:

पेट की समस्‍याओं के ल‍िए आयुर्वेद‍िक उपायों की मदद ले सकते हैं जैसे मतली और उल्‍टी के ल‍िए धन‍िया, लौंग, सौंफ और पुदीना, पेट में ऐंठन होने पर जीरा, अजवाइन, सौंफ, इर्र‍िटेबल बाउल स‍िंड्रोम का इलाज यह देखकर क‍िया जाता है क‍ि स्‍टूल हार्ड या मुलायम। मुलायम स्‍टूल में डायर‍िया का इलाज होता है और हार्ड स्‍टूल में कब्‍ज का इलाज होता है। कब्‍ज में फाइबर, हरीतकी चूर्ण और घृत पान, डायर‍िया में अनार दाना, मुस्तक मोथा और मोचरस का सेवन कर सकते हैं। एस‍िड‍िटी में धन‍िया, लौंग, मुस्तक मोथा का प्रयोग होता है और गैस और पेट फूलने पर हींग, अजवाइन और जीरे का सेवन क‍िया जाता है।

FAQ

  • आयुर्वेद में कौन सी जड़ी-बूट‍ियां पाचन के ल‍िए फायदेमंद हैं?

    मुलेठी, अश्वगंधा, गिलोय, कुटकी, पिप्पली, आंवला जैसी जड़ी-बूट‍ियां पाचन समस्‍याओं को दूर करने में मदद करते हैं।
  • पाचन समस्‍याओं में क‍िन चीजों का सेवन करने से बचना चाह‍िए?

    पाचन समस्‍याओं से बचने के ल‍िए ज्यादा तला-भुना खाना, कैफीन युक्‍त पेय, ज्यादा मीठी चीजें, इंस्टेंट नूडल्स और फास्ट फूड वगैरह से परहेज करना चाह‍िए।

Read Next

→ कब्ज से राहत के लिए हरड़ का इस्तेमाल कैसे करें? आयुर्वेदिक डॉक्टर से जानें

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jul 27, 2026 17:43 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jul 27, 2026 17:43 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jul 27, 2026 17:43 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma