अस्थमा ज्यादातर लोगों को इम्यूनिटी के कारण होता है। ज्यादा कमजोर इम्यूनिटी है, तो अस्थमा ट्रिगर हो सकता है।
अगर इम्यूनिटी ज्यादा है, तो ऑटोइम्यून डिजीज हो सकती है। इम्यूनिटी लो है, तो इंफेक्शन और बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में अस्थमा मरीजों को कुछ ऐसी हर्ब्स का सेवन करना चाहिए जो इम्यूनिटी को सपोर्ट करे। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से समझते हैं आयुर्वेद में अस्थमा का इलाज कैसे किया जाता है? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।
साल 2013 में Pharmagene में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, अस्थमा यानी तमक श्वास के पीछ मुख्य रूप से वात और कफ का असंतुलन हो सकता है। इसमें हल्दी, मुलेठी, अदरक, काली मिर्च, तुलसी, वासा और पिप्पली जैसी जड़ी-बूटियां का इस्तेमाल लक्षणों को एंटी-अस्थमैटिक प्रभावों से कंट्रोल कर सकता है। साथ ही, आहार, जीवनशैली, एलर्जी पैदा करने वाले कारकों से बचने की भी सलाह दी गई है।
अस्थमा के दोष की पहचान करें
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आयुर्वेद के मुताबिक, पित्त प्रधान अस्थमा है, तो सीने में गर्माहट, जलन, सूजन जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।
कफ प्रधान अस्थमा है, तो सीने में जकड़न या भारीपन और ज्यादा बलगम बनने की शिकायत हो सकती है।
वात दोष है, तो सूखी खांसी और सांस लेते समय घरघराहट हो सकती है।
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बलगम को कंट्रोल कर सकते हैं ये हर्ब्स
काली मिर्च
काली मिर्च में पाइपरिन (Piperine) नाम का यौगिक पाया जाता है जिसमें सूजन-रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण हो सकते हैं। अस्थमा में काली मिर्च के इस्तेमाल से बलगम को कम करने में मदद मिल सकती है। इसे अधिक मात्रा में लेने से पेट में जलन हो सकती है इसलिए मात्रा का ध्यान रखें, इसे चुटकीभर से ज्यादा मात्रा में नहीं लेना चाहिए।
हल्दी
हल्दी में करक्यूमिन नाम का यौगिक होता है, जिसमें सूजन-रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। यह श्वसन तंत्र की सूजन को कंट्रोल कर सकता है। गुनगुने दूध के साथ हल्दी डालकर सेवन कर सकते हैं।
मुलेठी
मुलेठी में सूजन-रोधी गुण पाए जाते हैं। साल 2011 में Toxicology and Applied Pharmacology में प्रकाशित एक अध्ययन में मुलेठी के अस्थमा के प्रभाव का अध्ययन किया गया। इसमें मुलेठी को श्वसन संबंधित समस्याओं पर असरदार होने की संभावना बताई। यह एक पशु आधारित स्टडी थी इसलिए इंसानों पर अधिक शोध की जरूरत है। मुलेठी का सीमित सेवन करें वरना हाई बीपी की समस्या हो सकती है।
अदरक और शहद
अदरक, शहद और लहसुन का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से सांस से जुड़ी तकलीफों में किया जाता है। अदरक में जिंजरोल होता है, जिसमें सूजन-रोधी गुण पाए जाते हैं और ये श्वसन तंत्र की सूजन को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। शहद गले की खराश और खांसी में अस्थायी राहत दे सकता है, लेकिन यह अस्थमा का इलाज नहीं है। साथ ही डायबिटिक मरीजों को इसका सीमित सेवन ही करना चाहिए। इन दोनों के साथ तुलसी को मिलाएं और काढ़ा के रूप में सेवन कर सकते हैं।
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अस्थमा में कफ वर्धक आहार कम करें
अस्थमा के मरीजों को कफ वर्धक आहार को कम करने की सलाह दी जाती है। ज्यादा तेल, घी वाली चीजें, तली-भुनी चीजें, मीठी या ठंडी चीजें जैसे आइसक्रीम, ठंडी ड्रिंक्स, डेयरी उत्पाद, मैदा से बनी चीजों से दूरी बनानी चाहिए। इसके बजाय हल्का, ताजा और गुनगुना भोजन लें और नियमित समय पर खाएं।
आयुर्वेदिक आहार-विहार को अपनाएं
आयुर्वेद में आहार-विहार यानी खान-पान और जीवनशैली को सेहत के लिए खास माना गया है। कई फूड्स ऐसे में होते हैं जो पेट के लिए हल्के होते हैं और आसानी से पच जाता हैं। इन्हें डाइट का हिस्सा बनाना अस्थमा में फायदेमंद हो सकता है। जैसे नींबू, शहद, जौ वगैरह। ऐसी चीजों का सेवन करने से बचें जिनकी तासीर ठंडी हो और जिसे खाने से भारीपन महसूस हो क्योंकि इससे म्यूकस या बलगम बढ़ सकता है।
लाइफस्टाइल में तेल से मालिश (अभ्यंग), हल्की धूप लेना और प्राणायाम जैसे अनुलोम-विलोम, शीतली और भ्रामरी को शामिल किया जा सकता है। आयुर्वेद के अनुसार हल्की से मध्यम एक्सरसाइज, जैसे पैदल चलने का प्रयास करना चाहिए। इससे शरीर में कफ के जमाव को कम करने और सांस से जुड़ी मांसपेशियों को एक्टिव रखने में मदद मिल सकती है।
नोट: अस्थमा एक गंभीर श्वसन संबंधी बीमारी है, इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना इनहेलर या अन्य दवाएं बंद न करें। किसी भी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी या उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
निष्कर्ष:
अस्थमा में अदरक, शहद जैसे विकल्प अस्थमा में लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। साथ ही, काली मिर्च, मुलेठी, हल्दी बलगम को कम करने में मदद कर सकते हैं। अस्थमा में कफ वर्धक आहार जैसे ठंडी चीजें, ज्यादा घी-तेल वाली चीजों से परहेज करने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेद में अस्थमा के इलाज के लिए आहार-विहार यानी खान-पान और जीवनशैली का खास महत्व है। अपने रूटीन में मालिश (अभ्यंग), हल्की धूप लेना और प्राणायाम जैसे अनुलोम-विलोम, शीतली और भ्रामरी को शामिल करें।
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FAQ
क्या अस्थमा पूरी तरह ठीक हो सकता है?
अस्थमा एक स्थायी बीमारी है इसलिए इसे पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन सही इलाज और ट्रिगर से बचकर इसके लक्षणों को कंट्रोल कर सकते हैं।क्या अस्थमा संक्रामक बीमारी है?
अस्थमा संक्रामक नहीं होता है यानी यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता।
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Aug 27, 2026 17:59 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Shrey Sharma
