सुस्ती, भारीपन, बिना वजह वजन बढ़ना, जोड़ों में अकड़न या फिर हर समय नींद-सी आना, अक्सर लोग इन्हें उम्र, थकान या खराब लाइफस्टाइल का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन आयुर्वेद कहता है कि ये संकेत सिर्फ बाहरी नहीं होते, बल्कि शरीर के भीतर चल रहे दोष असंतुलन की ओर इशारा करते हैं। खासकर कफ दोष, जो शरीर को स्थिरता, चिकनाई और मजबूती देता है, अगर बिगड़ जाए तो कई गंभीर बीमारियों की नींव रख सकता है। इस लेख में सिरसा के रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ. श्रेय शर्मा (Ayurvedic doctor Shrey Sharma from Ramhans Charitable Hospital) से जानिए, कफ दोष असंतुलन से कौन सी बीमारियां जन्म लेती हैं?
कफ दोष असंतुलन से कौन सी बीमारियां जन्म लेती हैं? - What are the diseases associated with kapha dosha imbalance
आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि कफ दोष का संतुलन शरीर की संरचना और मानसिक स्थिरता दोनों के लिए बेहद जरूरी है लेकिन जब कफ दोष बढ़ता या घटता है, तो शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं। आयुर्वेद मानता है कि किसी भी दोष की अति या कमी, दोनों ही रोगों को जन्म देती हैं। डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, जब कफ दोष बढ़ जाता है तो व्यक्ति की गति धीमी हो जाती है। शरीर में एक तरह का अवरोध पैदा हो जाता है, जिससे आलस्य, सुस्ती और भारीपन महसूस होता है। कफ बढ़ने से सूजन की समस्या हो सकती है। इसके साथ ही वजन तेजी से बढ़ने लगता है और मोटापा एक आम समस्या बन जाती है। ऐसे लोग अक्सर ठंडे, मीठे और तले-भुने भोजन की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं, जिससे कफ और बढ़ता है।
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1. जोड़ों और घुटनों में कफ दोष का असर
अगर कफ दोष का असंतुलन जोड़ों में हो जाए, तो इसका असर गंभीर हो सकता है। डॉ. श्रेय शर्मा बताते हैं कि कफ अगर घुटनों में बढ़ जाए तो वहां मौजूद प्राकृतिक चिकनाई यानी ग्रीस खत्म होने लगती है। इससे जोड़ों में दर्द, अकड़न और चलने में परेशानी होने लगती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो घुटनों को रिप्लेस करने तक की नौबत आ सकती है। कफ असंतुलन से ज्वाइंट्स से जुड़ी बीमारियां जैसे अर्थराइटिस और सूजन की समस्या बढ़ जाती है।
2. रीढ़ की हड्डी और कफ दोष का संतुलन
रीढ़ की हड्डी के लिए भी कफ दोष का संतुलन बेहद जरूरी है। डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, अगर शरीर में कफ बहुत ज्यादा बढ़ गया तो सूजन की समस्या हो सकती है, जिससे नसों और हड्डियों पर दबाव पड़ता है। वहीं, अगर रीढ़ की हड्डी में कफ की मात्रा बहुत कम हो जाए, तो हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और टूटने का खतरा बढ़ जाता है। यानी कफ की कमी भी उतनी ही नुकसानदायक है जितनी उसकी अधिकता।
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3. पेट में कफ बढ़ने या घटने से होने वाली समस्याएं
आयुर्वेद में पेट को रोगों की जड़ माना गया है। डॉ. श्रेय शर्मा बताते हैं कि अगर कफ दोष पेट में बढ़ जाता है तो व्यक्ति को भूख लगनी बंद हो जाती है। पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और खाना ठीक से नहीं पच पाता। इससे गैस, अपच और भारीपन की समस्या होने लगती है। वहीं अगर पेट में कफ बिलकुल नहीं रहेगा, तो पेट की अंदरूनी परत को सुरक्षा नहीं मिलेगी और अल्सर जैसी गंभीर समस्या हो सकती है। इसलिए पेट में कफ का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।
4. ब्रेन में कफ दोष का प्रभाव
कफ दोष का असर केवल शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह मानसिक स्थिति को भी प्रभावित करता है। डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, अगर कफ ब्रेन में बढ़ जाए तो व्यक्ति किसी से बात नहीं करना चाहता, चुप-चाप रहता है और अंदर से बुझा-बुझा महसूस करता है। ऐसे लोगों में उदासी, सामाजिक दूरी और मानसिक जड़ता देखने को मिलती है। वहीं अगर ब्रेन में कफ बहुत कम हो जाए, तो नींद पूरी तरह खत्म हो सकती है। इससे अनिद्रा, बेचैनी और मानसिक थकावट बढ़ जाती है।
निष्कर्ष
डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, कफ दोष के मामले में सबसे जरूरी है संतुलन। न तो कफ का अत्यधिक बढ़ना अच्छा है और न ही उसका पूरी तरह खत्म होना। सही खान-पान, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद और आयुर्वेदिक लाइफस्टाइल अपनाकर कफ दोष को संतुलित रखा जा सकता है। यही संतुलन शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने की कुंजी है।
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FAQ
शरीर में कफ दोष बढ़ने के लक्षण क्या हैं?
कफ बढ़ने पर सुस्ती, भारीपन, वजन बढ़ना, शरीर या जोड़ों में सूजन, ज्यादा नींद आना, भूख कम लगना, जकड़न और काम करने में धीमापन महसूस हो सकता है।कफ दोष को संतुलित रखने के लिए क्या करना चाहिए?
बैलेंस डाइट, नियमित एक्सरसाइज, दिन में ज्यादा न सोना, ठंडे और भारी भोजन से बचना, दिनचर्या का पालन करना और आयुर्वेदिक लाइफस्टाइल अपनाना कफ दोष को संतुलित रखने में मदद करता है।क्या कफ दोष मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है?
कफ दोष का सीधा असर मानसिक स्थिति पर पड़ता है। कफ बढ़ने पर व्यक्ति चुप-चाप रहने लगता है, सामाजिक दूरी बनाने लगता है और अंदर से बुझा हुआ महसूस करता है।
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Jan 08, 2026 11:23 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Jan 08, 2026 11:23 IST
Modified By : Akanksha TiwariJan 08, 2026 11:23 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Shrey Sharma