Thu Oct 15, 2026 | 10:20 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

कफ दोष बिगड़ते ही शुरू हो जाती हैं ये गंभीर बीमारियां, नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

आयुर्वेद के अनुसार शरीर तीन दोषों वात, पित्त और कफ से मिलकर बना है। इनमें कफ दोष शरीर को स्थिरता, मजबूती, चिकनाई और पोषण देता है। यहां जानिए, कफ दोष असंतुलन से कौन सी बीमारियां जन्म लेती हैं?
कफ दोष बिगड़ते ही शुरू हो जाती हैं ये गंभीर बीमारियां, नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारीकफ दोष बिगड़ते ही शुरू हो जाती हैं ये गंभीर बीमारियां, नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

सुस्ती, भारीपन, बिना वजह वजन बढ़ना, जोड़ों में अकड़न या फिर हर समय नींद-सी आना, अक्सर लोग इन्हें उम्र, थकान या खराब लाइफस्टाइल का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन आयुर्वेद कहता है कि ये संकेत सिर्फ बाहरी नहीं होते, बल्कि शरीर के भीतर चल रहे दोष असंतुलन की ओर इशारा करते हैं। खासकर कफ दोष, जो शरीर को स्थिरता, चिकनाई और मजबूती देता है, अगर बिगड़ जाए तो कई गंभीर बीमारियों की नींव रख सकता है। इस लेख में सिरसा के रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ. श्रेय शर्मा (Ayurvedic doctor Shrey Sharma from Ramhans Charitable Hospital) से जानिए, कफ दोष असंतुलन से कौन सी बीमारियां जन्म लेती हैं?

कफ दोष असंतुलन से कौन सी बीमारियां जन्म लेती हैं? - What are the diseases associated with kapha dosha imbalance

आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि कफ दोष का संतुलन शरीर की संरचना और मानसिक स्थिरता दोनों के लिए बेहद जरूरी है लेकिन जब कफ दोष बढ़ता या घटता है, तो शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं। आयुर्वेद मानता है कि किसी भी दोष की अति या कमी, दोनों ही रोगों को जन्म देती हैं। डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, जब कफ दोष बढ़ जाता है तो व्यक्ति की गति धीमी हो जाती है। शरीर में एक तरह का अवरोध पैदा हो जाता है, जिससे आलस्य, सुस्ती और भारीपन महसूस होता है। कफ बढ़ने से सूजन की समस्या हो सकती है। इसके साथ ही वजन तेजी से बढ़ने लगता है और मोटापा एक आम समस्या बन जाती है। ऐसे लोग अक्सर ठंडे, मीठे और तले-भुने भोजन की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं, जिससे कफ और बढ़ता है।

इसे भी पढ़ें: जीभ के रंग और बनावट से शरीर की प्रकृति का लग सकता है पता, जानें वात, पित्त और कफ दोष की पहचान करने का तरीका 

1. जोड़ों और घुटनों में कफ दोष का असर

अगर कफ दोष का असंतुलन जोड़ों में हो जाए, तो इसका असर गंभीर हो सकता है। डॉ. श्रेय शर्मा बताते हैं कि कफ अगर घुटनों में बढ़ जाए तो वहां मौजूद प्राकृतिक चिकनाई यानी ग्रीस खत्म होने लगती है। इससे जोड़ों में दर्द, अकड़न और चलने में परेशानी होने लगती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो घुटनों को रिप्लेस करने तक की नौबत आ सकती है। कफ असंतुलन से ज्वाइंट्स से जुड़ी बीमारियां जैसे अर्थराइटिस और सूजन की समस्या बढ़ जाती है।

2. रीढ़ की हड्डी और कफ दोष का संतुलन

रीढ़ की हड्डी के लिए भी कफ दोष का संतुलन बेहद जरूरी है। डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, अगर शरीर में कफ बहुत ज्यादा बढ़ गया तो सूजन की समस्या हो सकती है, जिससे नसों और हड्डियों पर दबाव पड़ता है। वहीं, अगर रीढ़ की हड्डी में कफ की मात्रा बहुत कम हो जाए, तो हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और टूटने का खतरा बढ़ जाता है। यानी कफ की कमी भी उतनी ही नुकसानदायक है जितनी उसकी अधिकता।

इसे भी पढ़ें: कफ दोष को बैलेंस करने के लिए करें ये उपाय, एक्सपर्ट से जानें फायदे

diseases associated with kapha doshadiseases associated with kapha dosha

3. पेट में कफ बढ़ने या घटने से होने वाली समस्याएं

आयुर्वेद में पेट को रोगों की जड़ माना गया है। डॉ. श्रेय शर्मा बताते हैं कि अगर कफ दोष पेट में बढ़ जाता है तो व्यक्ति को भूख लगनी बंद हो जाती है। पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और खाना ठीक से नहीं पच पाता। इससे गैस, अपच और भारीपन की समस्या होने लगती है। वहीं अगर पेट में कफ बिलकुल नहीं रहेगा, तो पेट की अंदरूनी परत को सुरक्षा नहीं मिलेगी और अल्सर जैसी गंभीर समस्या हो सकती है। इसलिए पेट में कफ का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।

4. ब्रेन में कफ दोष का प्रभाव

कफ दोष का असर केवल शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह मानसिक स्थिति को भी प्रभावित करता है। डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, अगर कफ ब्रेन में बढ़ जाए तो व्यक्ति किसी से बात नहीं करना चाहता, चुप-चाप रहता है और अंदर से बुझा-बुझा महसूस करता है। ऐसे लोगों में उदासी, सामाजिक दूरी और मानसिक जड़ता देखने को मिलती है। वहीं अगर ब्रेन में कफ बहुत कम हो जाए, तो नींद पूरी तरह खत्म हो सकती है। इससे अनिद्रा, बेचैनी और मानसिक थकावट बढ़ जाती है।

निष्कर्ष

डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, कफ दोष के मामले में सबसे जरूरी है संतुलन। न तो कफ का अत्यधिक बढ़ना अच्छा है और न ही उसका पूरी तरह खत्म होना। सही खान-पान, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद और आयुर्वेदिक लाइफस्टाइल अपनाकर कफ दोष को संतुलित रखा जा सकता है। यही संतुलन शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने की कुंजी है।

All Images Credit- Freepik

FAQ

  • शरीर में कफ दोष बढ़ने के लक्षण क्या हैं?

    कफ बढ़ने पर सुस्ती, भारीपन, वजन बढ़ना, शरीर या जोड़ों में सूजन, ज्यादा नींद आना, भूख कम लगना, जकड़न और काम करने में धीमापन महसूस हो सकता है।
  • कफ दोष को संतुलित रखने के लिए क्या करना चाहिए?

    बैलेंस डाइट, नियमित एक्सरसाइज, दिन में ज्यादा न सोना, ठंडे और भारी भोजन से बचना, दिनचर्या का पालन करना और आयुर्वेदिक लाइफस्टाइल अपनाना कफ दोष को संतुलित रखने में मदद करता है।
  • क्या कफ दोष मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है?

    कफ दोष का सीधा असर मानसिक स्थिति पर पड़ता है। कफ बढ़ने पर व्यक्ति चुप-चाप रहने लगता है, सामाजिक दूरी बनाने लगता है और अंदर से बुझा हुआ महसूस करता है।

Read Next

→ क्या तुलसी की चाय पेट के कीड़ों को खत्म कर सकती है? आयुर्वेदाचार्य से जानें

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jan 08, 2026 11:23 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Jan 08, 2026 11:23 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Jan 08, 2026 11:23 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma