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30 दिन तक रोटी खाना छोड़ दें तो वजन और पाचन पर क्या असर पड़ेगा? डॉक्टर से जानें

30 दिन तक रोटी छोड़ने से तेजी से वजन कम हो सकता है, लेकिन इसका असर पाचन और मेटाबॉलिज्म पर भी पड़ सकता है। यहां जानिए, 30 दिन तक रोटी छोड़ने का क्या असर होगा?
30 दिन तक रोटी खाना छोड़ दें तो वजन और पाचन पर क्या असर पड़ेगा? डॉक्टर से जानें30 दिन तक रोटी खाना छोड़ दें तो वजन और पाचन पर क्या असर पड़ेगा? डॉक्टर से जानें

भारत में रोटी रोजाना की थाली एक मुख्य हिस्सा मानी जाती है, लेकिन वजन घटाने के नाम पर अक्सर लोग इसे अपनी डाइट से पूरी तरह हटा देते हैं। सोशल मीडिया पर भी नो रोटी डाइट और लो कार्ब डाइट काफी ट्रेंड में है। कई लोग मानते हैं कि रोटी छोड़ने से तेजी से वजन कम हो सकता है और शरीर हल्का महसूस करता है। वहीं कुछ लोग इसे पूरी तरह से गलत भी मानते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि रोटी छोड़ने का असली असर शरीर पर क्या पड़ता है और यह पाचन, मेटाबॉलिज्म और एनर्जी लेवल को कैसे प्रभावित करता है। इस बारे में सही जानकारी के लिए हमने, DAMOH’S Aesthetic & Lifestyle Clinic की वेट लॉस और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डॉ. अंजू शाह से बात की-

30 दिन तक रोटी छोड़ने का शरीर पर क्या असर होगा?

डॉ. अंजू शाह के अनुसार, रोटी मोटापा बढ़ाने का सीधा कारण नहीं होती। असली समस्या तब होती है जब लोग रात में देर से, ज्यादा मात्रा में और मक्खन या भारी चीजों के साथ रोटी खाते हैं। अगर कोई व्यक्ति 30 दिनों तक रोटी छोड़ देता है, तो शुरुआती 3 से 7 दिनों में उसे 1 से 2 किलो तक वजन कम होता दिखाई दे सकता है लेकिन यह असली फैट लॉस नहीं होता, बल्कि शरीर में जमा पानी का वजन होता है। जब कार्बोहाइड्रेट कम हो जाते हैं, तो शरीर के ग्लाइकोजन स्टोर खत्म होने लगते हैं। हर एक ग्राम ग्लाइकोजन के साथ लगभग 3 ग्राम पानी जुड़ा होता है, इसलिए वजन तेजी से कम दिखता है। यह शुरुआती बदलाव उत्साहजनक लग सकता है, लेकिन लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होता।

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रोटी छोड़ने का पाचन और आंतों पर क्या असर पड़ता है?

डॉ. अंजू शाह बताती हैं कि गेहूं की रोटी फाइबर का एक अहम सोर्स होती है। जब इसे बिना किसी विकल्प के डाइट से हटा दिया जाता है, तो शरीर में फाइबर की कमी हो सकती है। इससे कब्ज, पेट फूलना और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं। इसके अलावा, लंबे समय तक फाइबर की कमी आंतों के अच्छे बैक्टीरिया यानी गट माइक्रोबायोम को भी प्रभावित कर सकती है। इससे न केवल पाचन बल्कि इम्यूनिटी पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए बिना प्लान के रोटी छोड़ना नुकसानदायक हो सकता है। अगर रोटी छोड़ने के बाद बैलेंस डाइट नहीं ली जाए, तो शरीर एनर्जी के लिए मांसपेशियों को तोड़ना शुरू कर सकता है। इससे मसल लॉस होता है और मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ सकता है, जो आगे चलकर वजन घटाने की प्रक्रिया को मुश्किल बना देता है।

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डॉक्टर की सलाह

डॉ. अंजू शाह के अनुसार, रोटी को पूरी तरह छोड़ने की बजाय बेहतर विकल्प अपनाना ज्यादा सही है। ज्वार, बाजरा और रागी की रोटियां वजन और ब्लड शुगर मैनेजमेंट के लिए ज्यादा फायदेमंद मानी जाती हैं। ये फाइबर से भरपूर होती हैं और शरीर में ग्लाइसेमिक लोड को कम रखती हैं।

निष्कर्ष

रोटी छोड़ना वजन घटाने का कोई खास मैजिकल तरीका नहीं है। शुरुआती दिनों में दिखने वाला वजन कम होना अक्सर पानी की कमी का रिजल्ट होता है, न कि फैट लॉस का। असली रिजल्ट तभी मिलते हैं जब डाइट बैलेंस हो और उसमें प्रोटीन, फाइबर और पोषक तत्व शामिल हों। रोटी को पूरी तरह हटाने की बजाय उसे सही मात्रा और हेल्दी विकल्पों के साथ लेना ज्यादा सुरक्षित तरीका है।

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FAQ

  • क्या रोटी मोटापा बढ़ाती है?

    सिर्फ रोटी खाना मोटापा नहीं बढ़ाता है, बल्कि गलत डाइट और लाइफस्टाइल इसका कारण होते हैं।
  • क्या बिना रोटी की डाइट हेल्दी होती है?

    अगर सही तरीके से प्लान की जाए तो हो सकती है, लेकिन बिना प्लान के नुकसान हो सकता है।
  • क्या रोटी छोड़ने से पाचन खराब हो सकता है?

    अगर फाइबर का सही विकल्प न लिया जाए तो पाचन पर असर पड़ सकता है।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 07, 2026 18:16 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • May 07, 2026 18:16 IST

    Published By : Akanksha Tiwari