
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में थकान, पेट की गड़बड़ी और वजन बढ़ना तो आम समस्या बन चुकी है, लेकिन इसी बीच फैटी लिवर बीमारी चुपचाप लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रही है। हैरानी की बात यह है कि अधिकतर लोग तब तक इस बीमारी को गंभीरता से नहीं लेते, जब तक डॉक्टर अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में Fatty Liver Grade 1 या Grade 2 न लिख दें। इसके बाद सबसे पहला सवाल यही होता है कि अब खाएं क्या और क्या नहीं? खासतौर पर भारतीय थाली की बात करें तो रोटी हमारे खाने का अहम हिस्सा होती है। सुबह का नाश्ता हो या दोपहर का लंच, रोटी के बिना खाना अधूरा सा लगता है लेकिन फैटी लिवर की स्थिति में यही रोज की रोटी कभी दवा बन जाती है तो कभी बीमारी बढ़ाने वाली वजह। इस लेख में जयपुर स्थित Angelcare-A Nutrition and Wellness Center की निदेशक, डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन (Archana Jain, Dietitian and Nutritionist, Director, Angelcare-A Nutrition and Wellness Center, Jaipur) से जानिए, फैटी लिवर में कौन-सी रोटी खानी चाहिए और कौन-सी नहीं?
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फैटी लिवर में कौन-सी रोटी खानी चाहिए? - Which roti is good for fatty liver
डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन बताती हैं कि फैटी लिवर में सबसे जरूरी होता है लिवर पर फैट का दबाव कम करना। इसके लिए रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, मैदा, सफेद चावल और ज्यादा शुगर से दूरी बनानी चाहिए। वहीं फाइबर से भरपूर, लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले अनाज लिवर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। रोटी अगर सही अनाज से बनी हो तो यह लिवर को डिटॉक्स करने और फैट मेटाबॉलिज्म सुधारने में मदद कर सकती है।
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- डाइटिशियन अर्चना जैन के अनुसार, फैटी लिवर के मरीज सामान्य गेहूं की रोटी सीमित मात्रा में खा सकते हैं, लेकिन शर्त यह है कि गेहूं 100% साबुत हो।
- बहुत ज्यादा पॉलिश्ड आटा या बाजार का पैकेट वाला आटा लिवर के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
- अगर मरीज का वजन ज्यादा है या शुगर भी है, तो केवल गेहूं की रोटी की बजाय दूसरे अनाजों को डाइट में शामिल करना ज्यादा फायदेमंद रहता है।
- डाइटिशियन अर्चना जैन बताती हैं कि जौ (Barley) की रोटी फैटी लिवर के लिए सबसे बेहतर विकल्पों में से एक है।
- जौ में घुलनशील फाइबर (बीटा-ग्लूकन) पाया जाता है, जो लिवर में जमा फैट को कम करने में मदद करता है। यह कोलेस्ट्रॉल घटाने, इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारने और वजन कंट्रोल करने में भी सहायक है।
- फैटी लिवर के मरीज रोज 1-2 जौ की रोटी सुरक्षित रूप से खा सकते हैं।
फैटी लिवर में बाजरे की रोटी
बाजरा आयरन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। डाइटिशियन अर्चना जैन के अनुसार, बाजरे की रोटी फैटी लिवर में मेटाबॉलिज्म को तेज करती है और शरीर में जमा अतिरिक्त फैट को कम करने में मदद करती है। खासकर जिन लोगों को फैटी लिवर के साथ मोटापा या ट्राइग्लिसराइड्स की समस्या हो, उनके लिए बाजरा बेहद लाभकारी है।
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कौन-सी रोटी फैटी लिवर में नहीं खानी चाहिए?
डाइटिशियन अर्चना जैन साफ तौर पर बताती हैं कि मैदे की रोटी, नान, कुलचा या रिफाइंड आटे से बनी रोटियां फैटी लिवर में नुकसानदायक होती हैं। ये लिवर में फैट जमा करने की प्रक्रिया को तेज कर सकती हैं। इसके अलावा ज्यादा घी या मक्खन लगाकर खाई गई रोटियां भी लिवर पर अतिरिक्त बोझ डालती हैं।
निष्कर्ष
फैटी लिवर में डाइट सुधार सबसे असरदार इलाज माना जाता है। डाइटिशियन अर्चना जैन के अनुसार, जौ, बाजरा और ज्वार की रोटी फैटी लिवर के लिए सबसे बेहतर विकल्प हैं, जबकि गेहूं की रोटी सीमित मात्रा में ली जा सकती है। मैदा और रिफाइंड आटे से बनी रोटियों से दूरी बनाकर, सही अनाज चुनकर और बैलेंस लाइफस्टाइल अपनाकर फैटी लिवर को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
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FAQ
फैटी लिवर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
शुरुआती स्टेज में फैटी लिवर के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। बाद में थकान, पेट में भारीपन, अपच, गैस और वजन बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।क्या फैटी लिवर पूरी तरह ठीक हो सकता है?
शुरुआती स्टेज का फैटी लिवर सही डाइट, वजन कंट्रोल और लाइफस्टाइल सुधार से पूरी तरह रिवर्स हो सकता है।फैटी लिवर में क्या खाना चाहिए?
फैटी लिवर में फाइबर से भरपूर अनाज, हरी सब्जियां, फल, दालें, लो-फैट डेयरी और पर्याप्त पानी लेना चाहिए। जौ और बाजरे जैसे अनाज खासतौर पर फायदेमंद माने जाते हैं।
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Jan 01, 2026 08:32 IST
Published By : Akanksha Tiwari
