Fri Sep 11, 2026 | 08:19 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

डाइट्री फाइबर पेट को स्वस्थ रखने के लिए क्यों जरूरी है? डायटिशियिन से जानें

डाइट्री फाइबर प्‍लांट-बेस्‍ड न्‍यूट्र‍िएंट होता है ज‍िसका सेवन करने से डाइजेशन बेहतर होता है और गट हेल्‍थ को सपोर्ट म‍िलता है। एक्‍सपर्ट से जानें पेट की सेहत के ल‍िए इसके फायदे।

डाइट्री फाइबर पौधों से म‍िलने वाले फल, सब्‍ज‍ियों, दालोंं, बीजोंं वगैरह में पाया जाता है। डाइट्री फाइबर दो प्रकार का होता है। घुलनशील (Soluble) और अघुलनशील (Insoluble) फाइबर। घुलनशील फाइबर शुगर लेवल और कोलेस्‍ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद करता है और अघुलनशील फाइबर कब्‍ज से राहत देने में मदद करता है। डाइट्री फाइबर पेट की सेहत के ल‍िए फायदेमंद माना जाता है और यह कब्‍ज, बेहतर पाचन वगैरह में मदद करता है। पेट के स्‍वास्‍थ्‍य के ल‍िए इसकी अहम‍ियत समझने के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

पेट के स्‍वास्‍थ्‍य के ल‍िए फायदेमंद है डाइट्री फाइबर

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  • डाइट्री फाइबर का सेवन करने से कब्‍ज की समस्‍या दूर होती है और यह बाउल मूवमेंट को रेगुलेट करता है।
  • लूज मोशन में भी फाइबर का सेवन फायदेमंद होता है, यह स्‍टूल को बाइंड करने का काम करता है।
  • फाइबर गट माइक्रोबायोम (Gut Microbiome) को सपोर्ट करता है जि‍ससे पाचन बेहतर होता है और न्‍यूट्र‍िएंट्स बेहतर ढंग से शरीर में अब्‍जॉर्ब हो पाते हैं।
  • 2021 में Nature Reviews Gastroenterology & Hepatology नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, डाइट्री फाइबर आंतों की सेहत को सुधारते हैं और गट माइक्रोबायोम का संतुलन ठीक रहता है।

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ज्‍यादा डाइट्री फाइबर डाइजेशन को ब‍िगाड़ भी सकता है

Smita Singh ने बताया क‍ि डाइट्री फाइबर पेट को स्‍वस्‍थ रखने के ल‍िए जरूरी है, लेक‍िन अगर इसे जरूरत से ज्‍यादा ले ल‍िया जाए, तो यह पेट की समस्‍याओं का कारण बन सकता है जैसे ब्‍लोट‍िंग, गैस, पेट में दर्द वगैरह। इन समस्‍याओं से बचने के ल‍िए फाइबर की मात्रा को डाइट में अचानक से न बढ़ाएं। सा‍थ ही अगर आपको IBD या IBS जैसी समस्‍या है, तो फाइबर इंटेक को बढ़ाने से पहले डॉक्‍टर से सलाह लें।

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द‍िनभर में क‍ितना फाइबर लेना चाह‍िए?

  • वयस्‍क आमतौर पर द‍िनभर में 25 से 38 ग्राम फाइबर ले सकते हैं।
  • मह‍िलाओं को 21 से 25 ग्राम फाइबर लेने की सलाह दी जाती है।
  • वहीं पुरुषों को 30 से 38 ग्राम फाइबर का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
  • 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिला- 21 ग्राम फाइबर
  • 50 वर्ष या उससे कम उम्र की महिला- 25 ग्राम फाइबर
  • 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष- 30 ग्राम फाइबर
  • 50 वर्ष या उससे कम उम्र के पुरुष- 38 ग्राम फाइबर

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डाइट्री फाइबर के स्रोत

  • होल ग्रेन्‍स जैसे जौ या ब्राउन राइस
  • फल और सब्‍ज‍ियां
  • बीन्‍स
  • नट्स और सीड्स

न‍िष्‍कर्ष:

डाइट्री फाइबर का सेवन करने से कब्‍ज की समस्‍या दूर होती है, बाउल मूवमेंट बेहतर होता है, गट माइक्रोबायोम को सपोर्ट म‍िलता है और आंंतों की सेहत बेहतर होती है। वयस्‍क आमतौर पर द‍िनभर में 25 से 38 ग्राम फाइबर ले सकते हैं।

FAQ

  • डाइट्री फाइबर के फायदे क्‍या हैं?

    डाइट्री फाइबर का सेवन करने से बार-बार भूख नहीं लगती, वजन कंट्रोल होता है, शुगर लेवल कंट्रोल होता है, बैड कोलेस्‍ट्राॅल कंट्राेल करने में भी मदद म‍िलती है।
  • हाई फाइबर डाइट कब नहीं लेना चाह‍िए?

    अचानक से हाई फाइबर डाइट नहीं लेना चाह‍िए, सर्जरी के बाद डॉक्‍टर की सलाह से ही फाइबर लेना चाह‍िए, थायराइड या आयरन की दवा के साथ भी फाइबर का सेवन करने से पहले डॉक्‍टर की सलाह लेना न भूलें।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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  • Current Version

    Apr 28, 2026 18:12 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Apr 28, 2026 18:12 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh

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