Fri Sep 11, 2026 | 07:34 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

क्या फाइबर लेने से फैटी लिवर कम हो सकता है? जानें एक्सपर्ट और रिसर्च क्या कहते हैं

आजकल फैटी ल‍िवर एक कॉमन समस्‍या बनती जा रही है। चाहे पुरुष हो या मह‍िला, फैटी ल‍िवर की समस्‍या दोनों में ही देखने को म‍िल रही है। कई लोगों को लगता है फाइबर का सेवन करने से फैटी ल‍िवर की समस्‍या दूर होती है। एक्‍सपर्ट से जानते हैं इस बात में क‍ितनी सच्‍चाई है?

फैटी ल‍िवर की स्‍थ‍ित‍ि तब आती है जब ल‍िवर की कोश‍िकाओं में जरूरत से ज्‍यादा फैट जमा हो जाता है। शुरू में इसके लक्षण समझ नहीं आते, लेक‍िन इलाज न कराने से सूजन बढ़ सकती है। फैटी ल‍िवर के मामलों में आज ज्‍यादातर खराब लाइफस्‍टाइल ही कारण होती है। ज्‍यादा कैलोरी, मीठे ड्र‍िंक्‍स, प्रोसेस्‍ड फूड्स, शारीर‍िक गत‍िव‍िध‍ि और मोटापा फैटी ल‍िवर का प्रमुख कारण हैं। जब शरीर इंसुल‍िन का सही तरह से इस्‍तेमाल नहीं कर पाता है, तो ग्‍लूकोज और फैटी एस‍िड ल‍िवर में जमा होने लगता है। फाइबर का सेवन करने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है और वेट लॉस में मदद म‍िलती है इसल‍िए लोगों को लगता है क‍ि इससे फैटी ल‍िवर की समस्‍या दूर होती है, लेक‍िन क्‍या वाकई फाइबर बढ़ाने से फैटी ल‍िवर की समस्‍या को कम क‍िया जा सकता है?

केवल फाइबर से फैटी ल‍िवर ठीक नहीं हो सकता- Fiber Is Not The Solution For Fatty Liver

National Library Of Medicine की एक स्‍टडी के मुताब‍िक, नॉन अल्‍कोहोल‍िक फैटी ल‍िवर ड‍िजीज (NAFLD) के मैनेजमेंट के ल‍िए डाइट, कैलोरी कंट्रोल, एक्‍सरसाइज और वजन कम करना शाम‍िल है। केवल फाइबर से फैटी ल‍िवर की समस्‍या से छुटकारा नहीं पाया जा सकता है। इसके ल‍िए अन्‍य हेल्‍दी बदलाव करने भी जरूरी हैं।

National Library Of Medicine की एक स्‍टडी में डाइटरी फाइबर और नॉन अल्‍कोहोल‍िक फैटी ल‍िवर ड‍िजीज (NAFLD) के बीच के संबध की जांच की गई। इसमें 6613 वयस्‍कों को शाम‍िल क‍ि‍या गया था। स्‍टडी के नतीजों में बताया गया क‍ि डाइटरी फाइबर लेने से नॉन अल्‍कोहोल‍िक फैटी ल‍िवर ड‍िजीज के खतरे को कम क‍िया जा सकता है, हालांक‍ि इस स्‍टडी में फाइबर को फैटी ल‍िवर का इलाज नहीं बताया गया है। इसल‍िए स्‍टडी के आधार पर यह कहा नहीं जा सकता क‍ि फाइबर अकेले फैटी ल‍िवर को ठीक कर सकता है।

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फैटी ल‍िवर में फाइबर को संतुल‍ित डाइट का ह‍िस्‍सा बनाएं

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केवल फाइबर का सेवन करने से फैटी ल‍िवर का इलाज होना संभव नहीं है। फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखता है ज‍िससे कुल कैलोरी का सेवन कम हो सकता है। फाइबर गुड बैक्‍टीरि‍या के ल‍िए भोजन का काम करता है। यह सूजन को कम करता है और मेटाबॉल‍िज्‍म को सुधारने में मदद करता है। गट हेल्‍थ पर इसका अच्‍छा असर पड़ता है, लेक‍िन यह फैटी ल‍िवर का सीधा इलाज नहीं है, यह केवल संतुल‍ित डाइट का ह‍िस्‍सा हो सकता है। फैटी ल‍िवर को कम करने के ल‍िए ये उपाय अपनाएं-

  • वेट लॉस करें
  • रोज एक्‍सरसाइज करें
  • शुगर और र‍िफाइंड कार्ब्स से दूर रहें
  • डैश डाइट अपनाएं

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फैटी ल‍िवर को कैसे ठीक करें?- How To Get Rid Of Fatty Liver

National Institute Of Diabetes And Digestive And Kidney Diseases के मुता‍ब‍िक, अगर नॉन अल्‍कोहोल‍िक फैटी ल‍िवर ड‍िजीज है, तो हेल्‍दी डाइट लेकर, पोर्शन साइज कंट्रोल करके और हेल्‍दी वजन मेनटेन करके इस समस्‍या से छुटकारा पा सकते हैं। अगर फैटी ल‍िवर की समस्‍या है और वजन ज्‍यादा है, तो डॉक्‍टर वजन घटाने की सलाह देंगे। इसके अलावा ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट की जगह अनसैचुरेटेड फैट जैसे ओमेगा 3 लें, इससे हार्ट ड‍िजीज का खतरा कम कर सकते हैं। ज्‍यादा मीठे ड्र‍िंक्‍स, मीठी चाय या जूस पीने से बचें।

न‍िष्‍कर्ष:

एक्‍सपर्ट के मुताब‍िक, फाइबर को संतुल‍ित डाइट का ह‍िस्‍सा बनाकर फैटी ल‍िवर की समस्‍या को कम करने में मदद मि‍लती है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेड‍िस‍िन की दो र‍िसर्च के आधार पर पता चला क‍ि फैटी ल‍िवर के ल‍िए फाइबर काफी नहीं है और न ही यह उसका सीधा इलाज है। इसल‍िए फैटी ल‍िवर को दूर करने के ल‍िए फाइबर पर न‍िर्भर होना सही नहीं है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Mar 03, 2026 18:12 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Mar 03, 2026 18:12 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh

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