Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Kapil Sharma , Group Director - Gastroenterology & Advanced Endoscopy

बाउल मूवमेंट को बेहतर बनाने में कैसे मदद करते हैं फाइबर र‍िच फूड्स? डॉक्‍टर से जानें फायदे

फाइबर खाने को पेट और आंत के जर‍िए आसानी से पास कराके बाउल मूवमेंट को हेल्‍दी रखता है। यह स्‍टूल में वॉल्‍यूम एड करता है ताक‍ि वह आसानी से शरीर के बाहर न‍िकल जाए। साथ ही आंत में पीएच बैलेंस बनाए रखने के ल‍िए भी फाइबर जरूरी है। 

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फाइबर एक जरूरी पोषक तत्‍व है जो केवल प्‍लांट फूड्स के जर‍िए हमें म‍िलता है। मीट, फ‍िश, एग या डेयरी प्रोडक्‍ट्स में फाइबर मौजूद नहीं होता है। प्‍लांट बेस्‍ट फूड्स की बात करें, तो सब्‍जि‍यों, फल, होल ग्रेन्‍स, बीन्‍स, सोय फूड्स, नट्स और सीड्स में फाइबर होता है। कोलेस्‍ट्रॉल लेवल, ब्‍लड शुगर लेवल और हेल्‍दी वेट मेनटेन करने के साथ-साथ फाइबर बाउल मूवमेंट को भी बेहतर बनाने में मदद करता है। यह डाइजेस्‍ट‍िव ट्रैक्‍ट को साफ करने का काम करता है। गट हेल्‍थ को सुधारने के ल‍िए यह अपश‍िष्‍ट पदार्थों को शरीर के बाहर न‍िकालने में सपोर्ट करता है। आगे जानेंगे बाउल मूवमेंट को कैसे बेहतर बनाते हैं फाइबर र‍िच फूड्स? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Kapil Sharma, Gastroenterologist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

बाउल मूवमेंट को कैसे बेहतर बनाते हैं फाइबर र‍िच फूड्स?

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1. बाउल मूवमेंट को सपोर्ट करते हैं घुलनशील और अघुलनशील फाइबर

Mayo Clinic में प्रकाश‍ित एक लेख के मुताब‍िक, फाइबर दो प्रकार के होते हैं और दोनों ही बाउल मूवमेंट को सपोर्ट करते हैं। सॉल्‍युबल फाइबर, पानी के साथ म‍िलकर जेल नुमा पदार्थ बनाता है ज‍िससे मल को वॉल्‍यूम म‍िलती है और उसे पास करने में आसानी होती है। वहीं दूसरी ओर, अघुलनशील फाइबर पानी में म‍िक्‍स नहीं होता है। यह उन लोगों के ल‍िए फायदेमंद माना जाता है ज‍िन्‍हें कब्‍ज की श‍िकायत होती है और जो रोज स्‍टूल पास नहीं कर पाते हैं।

2. कब्‍ज से राहत म‍िलती है

Dr. Kapil Sharma ने बताया क‍ि फाइबर र‍िच फूड्स का सेवन करने से मल मुलायम होता है और कब्‍ज की समस्‍या से राहत म‍िलती है। कब्‍ज में होल ग्रेन्‍स, बीन्‍स, फल और फाइबर जैसे हाई फाइबर फूड्स का सेवन करना फायदेमंद होता है। साल 2023 में Journal Of Functional Foods में प्रकाश‍ित एक जर्नल के मुताब‍िक, हाई फाइबर फूड्स का सेवन करने से कब्‍ज से राहत म‍िलती है और प्रत‍ि हफ्ते बाउल मूवमेंट की संख्‍या में बढ़ोतरी होती है। इससे पाचन को बेहतर बनाने में भी मदद म‍िलती है।

3. बाउल मूवमेंट रेगुलर होता है

सॉल्‍युबल फाइबर मल का वजन और मात्रा बढ़ाते हैं ज‍िससे बाउल मूवमेंट रेगुलर होता है। साथ ही आंतों की मांसपेश‍ियों को मल को आगे बढ़ाने में सपोर्ट म‍िलता है ज‍िससे बाउल मूवमेंट रेगुलर होता है।

4. गुड बैक्‍टीर‍िया को बढ़ावा म‍िलता है

कुछ फाइबर, आंतों में मौजूद गुड बैक्‍टीर‍िया के ल‍िए भोजन का काम करते हैं। ये बैक्‍टीर‍िया आंतों की सेहत को सपोर्ट करते हैं और पाचन प्रक्र‍िया को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

5. मल नरम रहता है

फाइबर र‍िच फूड्स की मदद से मल को नरम बनाने में मदद म‍िलती है। फाइबर की मदद से मल सख्‍त नहीं होता और उसे बाहर न‍िकालने में मदद मि‍लती है।

6. आंतों की गति‍ बेहतर होती है

गट मोबि‍ल‍िटी को बढ़ाने के ल‍िए फाइबर फायदेमंद होता है। इसकी मदद से पाचन तंंत्र सही तरीके से आगे बढ़ता है और मल को लंबे समय तक आंतों में होल्‍ड नहीं करता है।

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डाइट में फाइबर की मात्रा को कैसे बढ़ाएं?

  • हाई फाइबर ब्रेकफास्‍ट जैसे ओटमील, च‍िया सीड्स के साथ योगर्ट का सेवन कर सकते हैं।
  • डाइजेशन संबंध‍ित समस्‍याओं से बचने के ल‍िए फाइबर को नाश्‍ते के अलावा, लंच और ड‍िनर में भी शाम‍िल करें।
  • सफेद ब्रेड की जगह मल्‍टीग्रेन ब्रेड और सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस जैसे व‍िकल्‍प चुनें।
  • च‍िप्‍स या नमकीन खाने के बजाय फाइबर र‍िच स्‍नैक्‍स चुनें जैसे फल, भुट्टा, नट्स या सीड्स।

फाइबर बढ़ाने के ल‍िए साबुत फल खाएं

Harvard T.H. Chan School Of Public Health में प्रकाश‍ित एक लेख के मुताब‍िक, साबुत फलों में फाइबर ज्‍यादा होता है इसल‍िए जूस पीने के बजाय फलों का सेवन करना चाह‍िए। इससे पाचन बेहतर होता है और ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है।

फलों को छ‍िलके समेत खाएं

Dr. Kapil Sharma ने बताया क‍ि फलों को छ‍िलके समेत खाने से ज्‍यादा फाइबर म‍िलता है। अक्‍सर लोग फलों की स्‍क‍िन को न‍िकाल देते हैं ज‍िससे फाइबर की मात्रा कम हो जाती है। अगर छ‍िलके से डाइजेशन संबंध‍ित समस्‍या नहीं है, तो उसे छि‍लते समेत ही खाएं। अमरूद, सेब, नाशपाती, संतरा, मौसमी, पपीता, बेरीज, कीवी, अंजीर, अनार, एवोकाडो वगैरह फाइबर से भरपूर होते हैं और बाउल मूवमेंट को बेहतर बनाते हैं। इन्‍हें डाइट में शाम‍िल कर सकते हैं।

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डाइजेशन के ल‍िए ज्‍यादा फाइबर भी है नुकसानदायक

द‍िनभर में 25 से 30 ग्राम फाइबर की जरूरत होती है। अगर इससे ज्‍यादा फाइबर का सेवन करते हैं, तो डाइजेशन सुधरने के बजाय खराब हो सकता है। ज्‍यादा फाइबर का सेवन करने से गैस, ब्‍लोट‍िंग, डायर‍िया, जी म‍िचलाना जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • स्‍टूल में ब्‍लड आना।
  • पेट दर्द या उल्‍टी होना।
  • बाउल मूवमेंट में बदलाव होना।

न‍िष्‍कर्ष:

फाइबर र‍िच फूड्स बाउल मूवमेंट को सपोर्ट करता है, कब्‍ज से राहत द‍िलाता है, बाउल मूवमेंट को रेगुलर बनाता है, गुड बैक्‍टीर‍िया को बढ़ावा देता है, मल को नरम बनाता है, आंतों की गत‍ि को बेहतर करता है। वैसे तो फाइबर डाइजेशन के ल‍िए बेहतर होता है, लेक‍िन द‍िनभर में 30 ग्राम से ज्‍यादा फाइबर लेने के कारण कुछ लोगों में पाचन संबंध‍ित समस्‍याएं हो सकती हैं इसल‍िए मात्रा को सीमि‍त करके खाना चाह‍िए।

FAQ

  • घुलनशील और अघुलनशील फाइबर कौन से हैं?

    ओट्स, बीन्‍स, केला, सेब सॉल्‍युबल फाइबर कहलाते हैं। फलों के छ‍िलके, नट्स, फ्लैक्‍स सीड्स अघुलनशील फाइबर कहलाते हैं। 
  • एक स्‍वस्‍थ व्‍यक्‍त‍ि द‍िनभर में क‍ितनी बार मल त्‍याग करता है?

    आमतौर पर एक से दो बार। अगर हेल्‍दी बाउल मूवमेंट है, तो व्‍यक्‍त‍ि द‍िन में दो से तीन भी मल त्‍याग कर सकता है। अगर स्‍टूल मुलायम है और आसानी से पास हो रहा है, तो समझें क‍ि बाउल मूवमेंट हेल्‍दी है। 

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 21, 2026 14:45 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Kapil Sharma

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