Fri Sep 11, 2026 | 07:31 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

भोजन में फाइबर बढ़ाने का काम करते हैं ये 5 हेल्दी फूड्स, खाकर पाचन भी रहता है दुरुस्त

फाइबर को डाइट में शाम‍िल करके पेट लंबे समय तक भरा रहता है, क्रेव‍िंग कंट्रोल होती हैं और वेट मैनेजमेंट में मदद म‍िलती है। जानें डाइट में फाइबर बढ़ाने के ल‍िए क‍िन फूड्स का सेवन करें?

डाइजेशन को बेहतर बनाने के ल‍िए डाइट में फाइबर को शाम‍िल करना जरूरी है। फाइबर एक प्रकार का कार्ब्स है ज‍िसे शरीर पूरी तरह से डाइजेस्‍ट नहीं करता है, लेक‍िन यह पाचन के ल‍िए अहम भूम‍िका न‍िभाता है। फाइबर गट हेल्‍थ को सपोर्ट करता है और कब्‍ज से बचाव करता है। कई लोग खाने में फाइबर की पर्याप्‍त मात्रा नहीं लेते ज‍िसके कारण आगे चलकर वेट गेन, टाइप 2 डायब‍िटीज जैसी समस्‍याओं का खतरा बढ़ जाता है। बीमार‍ियों से बचने के ल‍िए भोजन में फाइबर की मात्रा को बढ़ाना जरूरी है, तो चल‍िए ऐसे कुछ फूड्स के बारे में जानें ज‍िन्‍हें डाइट में शाम‍िल करके फाइबर की मात्रा को बढ़ा सकते हैं। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

1. च‍िया और अलसी के बीज

chia-seeds-and-flax-seeds

च‍िया और अलसी के सीड्स में फाइबर, ओमेगा 3 फैटी एस‍िड्स और एंंटी-ऑक्‍सीडेंट्स की भरपूर मात्रा होती है। च‍िया सीड्स पानी को अब्‍जॉर्ब कर लेते हैं और जेलीनुमा टेक्‍सचर बना लेते हैं ज‍िससे डाइजेशन को बेहतर बनाने में मदद म‍िलती है। च‍िया और अलसी के सीड्स को स्‍मूदीज, योगर्ट और ओटमील में शाम‍िल कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें- डाइट्री फाइबर पेट को स्वस्थ रखने के लिए क्यों जरूरी है? डायटिशियिन से जानें

2. ओट्स

ओट्स सॉल्‍यूबल फाइबर का अच्‍छा स्रोत माना जाता है। ओट्स खाने से डाइजेश्‍न बेहतर होता है और हार्ट हेल्‍थ को मजबूत बनाने में मदद म‍िलती है। नाश्‍ते में एक बाउल ओटमील का खाएं। इससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस हेगा और फूड क्रेव‍िंग्‍स से भी बच सकते हैं।

यह भी पढ़ें- क्या फाइबर लेने से फैटी लिवर कम हो सकता है? जानें एक्सपर्ट और रिसर्च क्या कहते हैं

3. नट्स और सीड्स

बादाम, अखरोट, प‍िस्‍ता में फाइबर और हेल्‍दी फैट्स मौजूद होते हैं। फाइबर की कमी पूरी करने के ल‍िए मुट्टी भर नट्स और सीड्स को डाइट में शाम‍िल कर सकते हैं। नट्स में फाइबर, ओमेगा 3, एंटी-ऑक्‍सीडेंट्स की भरपूर मात्रा होती है। इसे स्‍मूदीज, योगर्ट और ओटमीट में शाम‍िल कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें- लो फाइबर डाइट से शरीर के ये 5 फंक्‍शन हो सकते हैं प्रभाव‍ित, शुगर लेवल से डाइजेशन तक द‍िखता है असर

4. होल ग्रेन्‍स

होल ग्रेन्‍स का सेवन करने से पेट लंंबे समय तक भरा रहता है और शरीर को एनर्जी म‍िलती है। डाइट में फाइबर बढ़ाने के ल‍िए र‍िफाइंड ग्रेन्‍स की जगह होल ग्रेन्‍स का सेवन करें। ब्राउन राइस, म‍िलेट्स, होल व्‍हीट ब्रेड, क्विनोआ वगैरह को डाइट में शाम‍िल करें। इसमें सफेद चावल या र‍िफाइंड आटे से ज्‍यादा फाइबर मौजूद होता है।

यह भी पढ़ें- एक हफ्ते तक फाइबर न खाएं तो क्या होगा? डायटिशियन से जानें सेहत पर इसका असर

5. हरी पत्तेदार सब्जियां

पालक, केल और अन्‍य हरी पत्तेदार सब्‍ज‍ियां डाइटरी फाइबर का अच्‍छा स्रोत होते हैं। इनमें कैलोरी की मात्रा कम होती है और आयरन, फोलेट और व‍िटाम‍िन सी जैसे पोषक तत्‍व मौजूद होते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियों को सूप, सलाद में शाम‍िल करें। इस तरह भोजन में फाइबर की मात्रा बढ़ाने में मदद म‍िलेगी।

न‍िष्‍कर्ष:

डाइट में फाइबर बढ़ाने के ल‍िए च‍िया, अलसी के बीज, ओट्स, नट्स, होल ग्रेन्‍स, हरी पत्तेदार सब्जियों को डाइट का ह‍िस्‍सा बना सकते हैं।

FAQ

  • फाइबर खाने के क्‍या फायदे हैं?

    फाइबर खाने से कब्‍ज की समस्‍या दूर होती है, पेट लंबे समय तक भरा रहता है, ओवरईट‍िंग से बचाव होता है और शुगर लेवल कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है।
  • फाइबर की कमी के नुकसान क्‍या हैं?

    फाइबर की कमी से पाचन धीमा हो सकता है, गैस और ब्‍लोट‍िंग की समस्‍या बढ़ सकती है, वजन बढ़ सकता है और आंतों की सेहत ब‍िगड़ सकती है।

Read Next

क्या गर्मियों में पूरे दिन खीरे-पुदीने वाला डिटॉक्स वॉटर पीना सही है? जानें एक्सपर्ट से

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    May 11, 2026 14:23 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 11, 2026 14:23 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Neha Mohan Sinha

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content